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भाषा की मर्यादा डिबेट में क्यों गिर रही है ।
19,934 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)
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भाषा की मर्यादा केवल डिबेट में ही नहीं, पूरे समाज में गिर रही है लेकिन इस पर चर्चा आपको तब करनी चाहिए थी जब कांग्रेसी बदतमीज प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इन्हीं प्रेम शुक्ला की मां को बार-बाला कहा। अब यह बात बहुत आगे निकल चुकी है। इस समय आपका बोलना ऐसा लग रहा है कि जैसे खुद आपकी मां के विषय में बोल दिया गया लेकिन वैसा ही तब आपको नहीं लगा, जब सुरेंद्र राजपूत ने प्रेम शुक्ला की मां को बोला

ये हरिया सबसे ज्यादा बदतमीज और नीच है टीवी चैनलों पर सिर्फ बतमीजी के सिवा आज तक इसने कुछ नहीं किया चैनल वालो से विनम्र अनुरोध है कि इसको मत बुलाया करे ये सभ्य समाज में रहने लायक नहीं हैं।

तुमने अपने डिबेट का स्तर कभी देखा है भदौरिया ?? लगता है कि चंडूखाने में बैठे हुए हो, न बात करने की तमीज और न हि सलीका। तर्क तो तुम्हारे पास होते ही नहीं हैं और सिर्फ चिल्ला चिल्लाकर इसे मछलीबाजर बना देते हो।

ज्यादातर प्रवक्ता पालतू कुत्तों जैसे व्यवहार करते हैं, वैसे आप भदौरिया जी"स्वयं का मूल्यांकन कर लीजिए"आप कैसे प्रवक्ता है। सुरेन्द्र जी का पूरा वीडियो देखिए पहले उन्होंने उकसाया, फिर अमर्यादित टिप्पणी दूसरी तरफ से हुई।

Abey O j@@hil hare kûrtewale !! Yeh👇 dekh le Mc

अनुराग जी ।। आजकल सभी की भाषा का स्वर बदल गया है कारण सिर्फ एक ।। हर प्रवक्ता अपने नम्बर बढ़ाने के चक्कर में इतना झूठ परोसते है कि सामने वाले का दिमाग हिल जाता है ।। खासकर कांग्रेस में तो भरमार है आप भी उसी में शामिल है ।। जबकि किसी भी सरकार ने आज तक गरीबों का कल्याण नहीं किया ।

जब सत्ता में बैठे लोगों के पास तर्क नहीं होते तब वो भाषा की मर्यादा भूल जाते है

ये वही नेता है ना जो दूसरे नेता के मुंह में पानी फेका था टीवी में बैठकर , ज्ञान देने में पैसा थोड़े लगता है। इनके बारे में पूरा भारत क्या कहता है शायद पता नहीं है।

सुरेंद्र राजपूत को पता है और तुम्हे भी सत्ता का लालच तथ्यों से हट अनर्गल आरोप लगाने को मजबूर करता है और इसके पीछे होता है एक भयानक सच - ज्यादातर जानता को समझ नहीं नियमों की। उनको लगता है सब कुछ सरकार ही करती है। इसका लाभ विपक्ष उठा लेता है।

सबसे निचले स्तर की भाषा आपकी भी है अनुराग भदौरिया जी आपके पास बीजेपी सरकार के खिलाफ बोलने के सिवाय कुछ भी नहीं होता है। आप खुद डिबेट में भारतीय सेना और सरकार से सबूत मांगते हो।
