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मैं DSP हूँ और मैं पढ़ लिख कर ही DSP बनी हूँ : ग्वालियर DSP पूनम थापा ये है ग्वालियर DSP पूनम थापा जो अनुसूचित जातियों की कॉलोनियों में चल रहे एससी संगठनों द्वारा नि:शुल्क कोचिंग सेंटर में जाकर समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित और जागरूक...

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सभी को मेरा जय भीम जय जोहार साथियों मैं SC/ST उपवर्गीकरण के विरोध में चल रहे भारत बंद का समर्थन करता हूँ, SC/ST उपवर्गीकरण का उद्देश्य आरक्षण प्रणाली को कमजोर करना और इसके प्रभाव को कम करना है,इससे समाज में समानता और न्याय के सिद्धांतों को नुकसान होता है। हमारा लक्ष्य है कि सभी वर्गों को समान अवसर और न्याय मिले।हमें एक ऐसे समाज की आवश्यकता है जहां हर व्यक्ति को उनके अधिकार और अवसर मिले बिना किसी भेदभाव के ! इस आंदोलन में शामिल होते समय हमें शांति और कानून व्यवस्था का पालन करना हैं यह हमारी एकता और संकल्प को दिखाता है मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप सभी इस आंदोलन का समर्थन करें और मिलकर एक सशक्त और समान समाज के लिए आवाज़ उठाएँ ! धन्यवाद 🙏 विनोद जाखड़ प्रदेशाध्यक्ष NSUI राजस्थान #21_अगस्त_भारत_बंद_रहेगा #कल_भारत_बंद_है

VINOD JAKHAR

41,624 Aufrufe • vor 2 Jahren

राज्य सभा में 21 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर चर्चा के दौरान मेरा भाषण, जिसमें मैंने भाजपा-आरएसएस के घिनौने एजेंडों और मनुस्मृति की कड़ी आलोचना की थी, और संविधान सभा में 25 नवंबर 1949 को दिए गए अपने दादा बाबासाहेब के आखिरी भाषण में सामाजिक असमानता को लेकर जताई गई उनकी चिंताओं का ज़िक्र किया था। मेरे भाषण का अंश — "आरएसएस की विचारधारा मूल रूप से वह है जिसे मैं ब्राह्मणवाद कहता हूँ। मैं ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नहीं हूँ... लेकिन ब्राह्मणवाद से मेरा जो अर्थ है, वह संप्रभुता, समानता और बंधुत्व के खिलाफ है। ब्राह्मणवाद का आधार क्या है? ब्राह्मणवाद का आधार मनुस्मृति है। मनुस्मृति आरएसएस के दिल में है। (आरएसएस द्वारा बाबरी मस्जिद गिराए जाने के लिए) 6 दिसंबर को चुनने का कारण क्या था? उस दिन देश ने संविधान के शिल्पकार को अंतिम विदाई दी थी... एक तरफ, हम संविधान के शिल्पकार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे और दूसरी तरफ, आरएसएस इसे जश्न का दिन बनाना चाहता था! यह एक विरोधाभास रहा है और इसीलिए उन्होंने इस तारीख को चुना है। यह आरएसएस की विचारधारा है और यही वह चीज़ है जिससे हमें लड़ना है। हमें मूल रूप से यह समझना होगा कि आरएसएस राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी ताकतें हैं।" जय भीम। जय संविधान। जय भारत।

Prakash Ambedkar

23,086 Aufrufe • vor 1 Monat

उत्तर प्रदेश के जनपद कौशाम्बी के हमारे परिवार की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और प्रयागराज के करछना में हमारे परिवारजन की बेरहमी से हत्या के बाद जलाए जाने की दुखद घटना हुई। मैं कल अपने इन दोनों पीड़ित परिवारों से मिलने गया था। इस दौरान प्रयागराज में सुनियोजित साजिश के तहत हमारे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की गई है। संलग्न वीडियो में देखिए — पुलिस के साथ इतनी बड़ी संख्या में ये लोग कौन हैं? और कैसे पुलिस के साथ मिलीभगत करके ये लोग खुद ही सड़क पर खड़ी मोटरसाइकिल और स्कूटी व गाड़िया तोड़ रहे हैं। हमारे आंदोलन को बदनाम करने के लिए यह एक पूरा षड्यंत्र है। मैं साफ करना चाहता हूँ कि भीम आर्मी – आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) का संघर्ष संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर चलता आया है और चलता रहेगा। मैं फिर से दोहरा रहा हूँ, अम्बेडकरवादी कभी हिंसा कर ही नहीं सकते हैं। यह एक साजिश है, इसीलिए मैं इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग करता हूँ। साथ ही मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमारा हर कार्यकर्ता हमारा परिवार है। यदि पुलिस प्रशासन किसी भी निर्दोष कार्यकर्ता को परेशान करने या झूठे मुकदमों में फँसाने का षडयंत्र करेगा, तो मैं हर हाल में अपने उस कार्यकर्ता के साथ खड़ा रहूंगा। हम संगठनात्मक और संवैधानिक तरीकों से संघर्ष आए हैं, और अन्याय के विरुद्ध पूरे देश का संगठन अपने साथियों के साथ खड़ा रहेंगे। हम हर स्तर पर आवाज़ उठाएँगे। सड़क हो या कोर्ट, हम मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे। हमारे आंदोलन को कमजोर करने या हमें झुकाने की हर एक साजिश नाकाम होगी। हमारे कार्यकर्ताओं और आंदोलन को बदनाम करने वालों को मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। भीम आर्मी – आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) अपने हर कार्यकर्ता की ढाल बनकर खड़ी है। जय भीम! जय भारत! जय संविधान!

Chandra Shekhar Aazad

133,628 Aufrufe • vor 1 Jahr

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इसी अधिकार को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने RTE Act, 2009 बनाया, जिसमें साफ़ कहा गया है कि 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि बच्चों को शिक्षा पाने के अधिकार का व्यवहारिक लाभ मिल सके। संविधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP) का भी उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि “राज्य का यह प्रयास रहेगा कि वह शैक्षिक और आर्थिक हितों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों की विशेष सुरक्षा और प्रोत्साहन करेगा, और सामाजिक अन्याय व शोषण के रूपों से उनकी रक्षा करेगा।” साथ ही, शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। यानी केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि राज्य की कोई नीति या कानून केंद्र के कानून से टकराता है तो केंद्र का कानून सर्वोपरि होता है। अतः राज्यों के लिए RTE Act, 2009 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। विद्यालयों का विलय कर स्कूलों को 1 किमी या उससे अधिक दूर ले जाना संविधान और RTE के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। क्या यह निर्णय कमजोर वर्गों, दलितों, आदिवासियों और गरीब बच्चों की शिक्षा के अधिकार को बाधित नहीं करता? अतः यह स्पष्ट है कि स्कूलों के विलय का निर्णय 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A द्वारा सुनिश्चित मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार, 2. RTE Act, 2009 के निकटता के सिद्धांत, 3. अनुच्छेद 46 में वर्णित सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों के संरक्षण, 4. समवर्ती सूची में केंद्र के कानूनों की सर्वोपरिता के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है। हम Government of UP से माँग करते हैं: 1. इस मर्जर नीति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। 2. हर गाँव में संविधान व RTE Act के अनुसार स्थानीय स्कूल की गारंटी दी जाए। 3.शिक्षा में निजीकरण और केंद्रीकरण के बजाय जन-भागीदारी और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए। "शिक्षा कोई spreadsheet नहीं, यह जीवन का पहला अधिकार है।जिसे मर्ज नहीं किया जा सकता — और न संविधान को मूक दर्शक बनाया जा सकता है।" #SaveVillageSchools

Chandra Shekhar Aazad

11,066 Aufrufe • vor 1 Jahr

भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती, बेईमान - ये चार शब्द मेरे नहीं, ये देश के छात्र आज भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। और सच यही है - भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक बेईमान वसूली तंत्र बन चुकी है। जो व्यवस्था बच्चों के भविष्य को तैयार करने के लिए बनी थी, वो आज उन्हें और उनके परिवार को कर्ज़, तनाव और निराशा में धकेल रही है। इसी भ्रष्टाचार ने पेपर लीक माफ़िया को जन्म दिया - जो तैयारी कर रहे लाखों छात्रों की सालों की मेहनत एक झटके में लूट लेता है। यहां दोषी vendors और अधिकारियों को मिलती है tender और तरक्की। और सजा किसे मिलती है? छात्रों को, जिन्हें टूटे सपनों के साथ अकेले छोड़ दिया जाता है। मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री यह सब देख रहे हैं। पर उन्होंने चुप्पी चुनी है - जवाबदेही से मुँह मोड़ लिया है। और मीडिया में? बस एक लंबा सन्नाटा। अब बहुत हुआ - अब वक़्त है शिक्षा में Revolution का। 17 जुलाई, देहरादून - मेरे साथ आइए, ‘छात्रों की गूँज’ को और बुलंद करें। यहां जुड़ें: #ChhatronKiGoonj

Rahul Gandhi

470,819 Aufrufe • vor 2 Monaten