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मुकम्मल है इबादत वतन ईमान रखता हूँ, हिंदुस्तान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ, क्यों पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का, मै मुसलमान हूँ सच्चा दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ।

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मार लो डंडे कर लो दमन मैं फिर फिर लड़ने को पेश हूँ हिदुस्तान कहते हैं मुझे मैं गांधी का देश हूँ !! तुम नफ़रत नफ़रत बांटोगे मैं प्यार ही प्यार तुम्हें दूंगा तुम मारने हाथ उठाओगे मैं बाहों में तुम्हें भर लूंगा तुम आवेश की गंगा हो क्या ? तो सुनो मैं शिव शम्भो का केश हूँ हिंदुस्तान कहते हैं मुझे मैं गांधी का देश हूँ जिस सोच को मारने खातिर तुम हर एक खुपड़िया खोलोगे वो सोच तुम्हीं को बदल देगी एक दिन शुक्रिया बोलोगे मैं कई धर्म कई चहरे कई रंग रूप पहचान लो मुझे कई भेष हूँ हिंदुस्तान कहते हैं मुझे मैं गांधी का देश हूँ मैं भाषा भाषा में रहता हूँ में धर्म धर्म में बहता हूँ कुछ कहते हैं मुझे फिक्र नहीं मैं अपनी मस्ती में जीता हूँ मुझ पर एक इलज़ाम भी है मैं सोया सोया रहता हूं पर जब जब जागा हूँ सुन लो इंक़लाब मैंने लाये मेरे आगे कितने ज़ालिम सब सारे गये आये मैं अड़ जो गया हटूंगा नहीं Swanand Kirkire

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तवायफ, सभी मजबूरी से मजबूत स्त्री को समर्पित🙏🏻 हाँ, हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ उसी गली में रहती हूँ, जिस गली में तुम रात बिताते हो परिवार के सामने मुझे नीच बतलाते हो, रात होते ही मुझे अपना बनाते हो नाम मेरा रंडी रखा है, और खुद मेरे पास हवस मिटाते हो हाँ मैं वही मयख़ाना हूँ, जिसके जिस्म से तुम पैमाना भरते हो सांझ होते ही सजती सवंरती हूँ, हर रात तेरे लिए बिस्तर नयी सजाती हूँ हाँ तेरे पाप को अपने कोख़ में पनाह देती हूँ, बिन बाप के बच्चों को अपना नाम देती हूँ बस तुम लोग के वजह से नाम नहीं कमा पाती हूँ, पैसे होने के बाद भी रंडी नाम से जानी जाती हूँ भूख खुद की इज़्ज़त बेचने को मजबूर करती है, बस यही सोचकर आँसू पी लेती हूँ तब भी ज़िंदा हूँ, ना इस काम से शर्मिन्दा हूँ आँशु क्या ज़हर क्या रोज़ सबको अपना बना लेती हूँ हर एक की बाहों में जाकर इश्क़ बाँटना आसान नहीं है, मेरी बेरंग जिंदगी से तेरी रात रंगीन करती हूँ काजल में अश्क़ छुपाती, पल पल नाम छुपाती, हर रोज़ बिकती हूँ, हर पल तेरे मुँह के "मेरी रंडी" नाम को भी अपनाती हूँ हांँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, कुछ मज़बूरी के कारण, काजल के पीछे अश्क़ छुपाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, अपनी भूख के लिए तेरी प्यास बुझाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ

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