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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जो रोना रोते हैं कि हमें पैसे नहीं मिल रहे, हमें पैसे नहीं मिल रहे, मैं इनकी तस्वीर आपको बताना चाहता हूँ। 2021-22 में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत हिमाचल को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹360 करोड़ दिए गए। 15 क्रिटिकल केयर...

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पत्रकार का सवाल : क़ानून व्यवस्था को लेकर लगातार जोधपुर में फायरिंग भी हो रही है। जवाब : अब देखो ना, दौड़ा-दौड़ा के मारा। यह घटना राजस्थान भर में हो रही है, कहीं मर्डर हो रहे हैं, कहीं रेप हो रहे हैं। सुनवाई नहीं हो रही है और एक नई बात हो गई है, थानों के अंदर जो है पैसे खा लेते हैं क्योंकि करप्शन की हदें पार हो गई राजस्थान के अंदर। करप्शन तो देखो हर राज के वक़्त में होता है, मैं स्वीकार करता हूँ। इस बार तो सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं। सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं और थाने वाले कहते हैं, जिसका रेप हो गया, पहली बात तो ग़रीब परिवार है वो, थाने में जाते ही नहीं हैं, चले भी गए, चले भी गए मान लो वो, तो क्योंकि पहले खा लेते हैं रेपिस्ट से, कहते हैं, "तुम जाके समझौता कर लो जयपुर के अंदर।" क्या मज़ाक है यह? स्थिति बड़ी नाज़ुक है। पत्रकार का सवाल : आपके द्वारा जो अस्पताल बनाए गए हैं, जो सैटेलाइट किए गए हैं ना, उनमें पद तो भर दिए गए हैं लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं दे रहे हैं, पैसों के लिए। जवाब : भैया, मैं बोल चुका हूँ यह पॉइंट अभी। वो बिल्डिंग अभी खड़ी है, ना इक्विपमेंट है, ना डॉक्टर वहाँ पर हैं। पत्रकार का सवाल : सर, शेखावत जी ने एक आरोप और लगाया था कि हमने ₹27,000 करोड़ दिए लेकिन जानबूझकर राजनीतिक द्वेष के चलते जो है, पानी के जो है कनेक्शन नहीं दिए गए, उसमें भारी घोटाला किया गया है। जवाब : यह वेग बातें हैं देखो। इन बातों, जब तक आप आँकड़े नहीं दो कि भाई हमने यह दिए थे, इसमें यह खर्च हुए, इसके खर्च नहीं हुए, तब तक कोई स्वीकार भी नहीं करेगा और ऐसे आरोप तो वेग आरोप हैं, मतलब इनमें कोई दम नहीं होता है। उनको पूछो भाई, हिंदुस्तान भर में आप तो मंत्री थे, विभाग इंपॉर्टेंट था आपका, हमें ख़ुशी हुई, मैंने प्रधानमंत्री मोदी जी को कहा मीटिंग के अंदर, "यह आपने अच्छा काम किया कि आपने यह नया विभाग को इस रूप में इंपॉर्टेंस दी है।" तो आप बताइए हमारी कितनी बड़ी रुचि होगी? अब क्यों नहीं काम कर रहे हैं ये? हमारी सरकार के वक़्त में काम कम हुआ, अब क्यों नहीं काम कर पा रही है? अब तो इनकी सरकार है, क्यों नहीं काम कर पा रही है? दूसरा, इनको चाहिए सब राज्यों का हिसाब दें, कहाँ पर कितना पैसा पहुँचा है, कहाँ मैंने एक्स्ट्रा मदद करी है। ईआरसीपी (ERCP) में जो व्यक्ति झूठ बोल सकता है, प्रधानमंत्री के मुँह से हमने टेप सुना दिया इनको, प्रधानमंत्री ने तीन बार बोला, दो बार बोला राजस्थान में, "ईआरसीपी को हम राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेंगे।" और यह खड़े होकर बोल गए मीटिंग के अंदर, ऐसा कोई हो तो मैं पता नहीं क्या बोला, "इस्तीफ़ा दे दूँगा" या क्या बोलूँगा, पता नहीं, यह बोल गए वहाँ। मुझे याद नहीं, पर कुछ बोले थे खड़े होकर जयपुर की मीटिंग के अंदर। तो इनको पता ही नहीं है। जो प्राइम मिनिस्टर की कही हुई बात है, आप नहीं स्वीकार कर पा रहे हो, या पूरा नहीं कर पा रहे हो, अलग बात है। आप कहो भाई, "यह हमारी मजबूरी थी, भूल गए, पर इसमें यह अड़चन आ रही है, यह नियम नहीं कहते।" कुछ भी बोलो, आप यह कैसे कह सकते हो, बोले ही नहीं वो? तो यह इनके बारे में मैं नहीं बोलूँ तो अच्छा है।

Ashok Gehlot

25,542 Aufrufe • vor 2 Monaten

बिग ब्रेकिंग न्यूज़:: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं की हिमाचल प्रदेश का पूरा खजाना खाली है और हिमाचल प्रदेश भयंकर यानी 1 लाख करोड़ के कर्ज में डूब चुका है अब वह कह रहे हैं कि उनके प्रदेश में 153 IAS है 150 आईपीएस है और फॉरेस्ट विभाग में भी 100 से ज्यादा आईएफएस ऑफीसर है इनकी सैलरी और भत्तों पर का खर्च अब हम नहीं उठा सकते और मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार इनको दूसरी जगह पर समायोजित करें हमारे प्रदेश की जनसंख्या मात्र 70 लाख है तो हमें इतनी ज्यादा संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों की जरूरत नहीं है यही होता है जब कांग्रेस किसी राज्य में सत्ता में आती है पूरा प्रदेश बर्बाद कर देती है पूरा खजाना खाली कर देती है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

135,027 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

32,660 Aufrufe • vor 19 Tagen

यह अमेरिका की नवनियुक्त व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी हैं यह बता रही है कि हमने यह देखा कि 50 मिलियन डॉलर जो अमेरिका के टैक्स पेयर के पैसे हैं वह गाजा के लोगों को हर साल सिर्फ कंडोम खरीदने के लिए 50 मिलियन डॉलर दिए जा रहे हैं ताकि गाजा के लोग कंडोम का खूब प्रयोग करें हम अपने पैसों की इस तरह से बर्बादी नहीं करने देंगे इसीलिए हमने यह फंड वापस ले लिया अब मैं यह सोच रहा हूं की जानवर भी यौन क्रिया करते हैं तब माहौल और यह सोच विचार कर करते हैं कि उनकी होने वाली संतान सुरक्षित रहेंगे कि नहीं रहेंगे आपने देखा होगा चिड़ियाघर में बहुत से जानवर संतान उत्पत्ति नहीं करते क्योंकि मादा हीट में इसलिए नहीं आती क्योंकि उसके दिमाग को यह संकेत नहीं मिलता की उसका होने वाला बच्चा सुरक्षित रहेगा लेकिन यह गाजा में कौन से सूअर कुत्ते हैं कौन से नीच जानवर हैं जो बमबारी के बीच में भी सेक्स में लगे हुए हैं ? और अभी एक रिपोर्ट पढा कि सिर्फ एक साल में गाजा में 68000 बच्चे पैदा हुए मतलब इजराइल इन की जनसंख्या को कंट्रोल करके बहुत अच्छा करता है इसराइल गाजा के लोगों के लिए प्रकृति द्वारा दिया गया उपहार है जो इनकी इकोसिस्टम को बैलेंस रखना है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

152,340 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज देश के बैंकों में हमारे नागरिकों का 78,000 करोड़ रुपये बिना दावे के पड़ा है। हमें नहीं पता कि यह पैसा किसका है, यह यूँ ही पड़ा है। बीमा कंपनियों के पास 14,000 करोड़ रुपये हैं, म्यूचुअल फंड्स के पास 3,000 करोड़ रुपये हैं। डिविडेंड में 9,000 करोड़ रुपये पड़ा हुआ है। और यह सारा पैसा बिना दावे के पड़ा है। यह पैसा गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का है और यह सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा किसका है, क्योंकि हम इस पैसे के असली मालिक का पता लगाना चाहते हैं। हमारी सरकार देश में इस धन के मालिको इसके मालिकों तक वापस पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। अब तक, इस पैसे के मालिकों की पहचान के लिए लगभग 500 जिलों में विशेष शिविर लगाए जा चुके हैं और हमने उन्हें कई हज़ार करोड़ रुपये वापस किए हैं। साथियों, यह सिर्फ एसेट की वापसी का मामला नहीं है। यह विश्वास का मामला है। यह जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है। और जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसिकता हावी होती और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते। - प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi

DFS

51,990 Aufrufe • vor 8 Monaten

माननीय केजरीवाल जी अब चुनावी जुमले नहीं, छलावे कर रहे हैं। ‘संजीवनी योजना’ के नाम पर दिल्लीवासियों को गुमराह किया जा रहा है। आज माननीय उपराज्यपाल जी ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई योजना अस्तित्व में ही नहीं है। सच्चाई यह है कि देश में स्वास्थ्य के लिए अगर कोई ठोस योजना लागू है, तो वह माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी की आयुष्मान भारत योजना, जो बुजुर्गों को 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देती है, जिसे #AAP सरकार ने दिल्ली में अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते लागू नहीं होने दिया। मैं सभी से अपील करती हूँ कि अपना निजी डेटा किसी भी राजनीतिक दल को न दें। यह न तो अधिकृत है, न विश्वसनीय। झूठे वादों और पंजीकरण के नाम पर सतर्क रहें। #अब_नहीं_सहेंगे_बदल_के_रहेंगे BJP Delhi BJP

Bansuri Swaraj

86,433 Aufrufe • vor 1 Jahr

हम सदन में अपनी बात रखना चाहते हैं। हम देश को बताना चाहते हैं कि जनता के मुद्दों के लिए हम किस स्तर से अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन हमें वक़्त ही नहीं दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष के लोग कानून के खिलाफ बात करते हैं तो उन्हें मौका दिया जाता है। मैं दुख के साथ कहना चाहता हूं कि जो लोग किसी विषय पर नहीं बोलना चाहते, सिर्फ दूसरों पर टीका-टिप्पणी करने में लगे रहते हैं, उन्हें सरकार और सभापति की ओर से प्रोत्साहन मिल रहा है। मैं बार-बार उठता रहा, लेकिन उन्होंने कभी हमारे लिए गंभीरता नहीं दिखाई। सभापति को किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए। दोनों पक्षों को बराबरी का दर्जा देना चाहिए। एक तरफ नेता सदन को बात करने के लिए मौका दिया जाता है, दूसरी तरफ विपक्ष में बैठे हुए लोगों को मौका ही नहीं मिलता। इस बारे में हमने कई बार अपील की, लेकिन वे सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं। जब हमें बोलने का मौका ही नहीं मिलता तो अपनी बात हम कहां रखें? आज तक ऐसा नहीं हुआ कि जब सत्ता पक्ष ही सदन बंद करने के लिए आगे आता है। हम लोग शांति से सुनना चाहते हैं, डिबेट करना चाहते हैं, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग वेल के नजदीक आकर चिल्लाते हैं। सभापति हमेशा कहते हैं कि मैं किसान का बेटा हूं। इस पर मेरा कहना है कि हम भी किसान और मजदूर के बेटे हैं। मैं कभी डरने वाला नहीं हूं। मैं अपने स्वाभिमान के लिए लड़ता रहूंगा। हम लड़ते आए हैं और ये लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हमें समान अधिकार नहीं मिल जाते। संविधान के तहत हमें जो मिलना चाहिए, वह अगर नहीं मिला तो हम लड़ते ही रहेंगे। सदन में जब हम खड़े होते हैं तो पूरा सत्ता पक्ष खड़ा हो जाता है। उन्हें शांत कराना और हमें बोलने देना यह सभापति का काम है और कई सारे लोग यह करते आए हैं। आजकल तो सदन में ऐसा माहौल हो गया है कि टीवी भी उनका, दिखाने वाले भी उनके... यानी सब कुछ उनके कंट्रोल में है। हम जब बोलते हैं, तब दिखाया नहीं जाता। ऐसा पहले नहीं था। पहले सभापति को भी दिखाया जाता था और जो बोलते थे, उनको भी दिखाया जाता था। हमारे लोग ही बाहर पूछते हैं क्या आप सदन में नहीं थे- क्योंकि आप दिखे नहीं। ये सब करके लोगों के बीच ऐसा नजरिया बनाना चाहते हैं कि सदन में विपक्ष के लोग ही हंगामा करते हैं। अगर आप कभी गैलरी में बैठेंगे तो आपको पता चलेगा कि असलियत में हंगामा सत्ता पक्ष कर रहा है। सदन में हमारे बोलने के समय सत्ता पक्ष के लोग हंगामा करने लगते हैं, ऐसे में हमें जोर से बोलना पड़ता है, जो कि हमें पसंद नहीं है, लेकिन ये सब मजबूरी में करना पड़ता है। अगर सत्ता पक्ष अपनी गलतियां नहीं सुधारेगा और दूसरों को बात करने के लिए मौका नहीं देगा, तो लोकतांत्रिक तरीके से सदन कैसे चल पाएगा?

Mallikarjun Kharge

50,714 Aufrufe • vor 1 Jahr