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मोची जूता सिले तो धंधा, ब्राह्मण पूजा करे तो धर्म। ~ कन्हैया कुमार
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35 Kommentare

सत्य हमेशा सरल शब्दों में ही बयाँ होता है। समाज में समानता और न्याय की यही असली पहचान है

बिल्कुल यह तो दोनों धर्म है या तो दोनों धंधा है।

@thename_vinay धर्म का मतलब ही आप जैसे लोग गलत लगाते हैं। सिर्फ पूजा, पाठ कर्म कांड करना ही धर्म नहीं होता। ये कन्हैया बरसाती मेढ़क की तरह इलेक्शन के समय टर टर्र उल जलूल करने लगते हैं, फिर इन्हें हाइबरनेशन में भेज दिया जाता है, अगले कहीं इलेक्शन तक।

@Sheetal2242 मेरे भाई धर्म की शिक्षा और जानकारी उसने अच्छे ली है। कन्हैया कुमार एक अच्छा प्रवक्ता है आप कभी उसको सुनो तर्कपूर्ण बाते करता है।

@Grok ब्राह्मण के पूरे जनसंख्या में से से कितने % पूजा पाठ से जीवन चलाते हैं ?? क्या ब्राह्मण कम्युनिटी सिर्फ पूजा पाठ कराते हैं? अगर नहीं तो फिर कुछ मानसिक तौर से विकलांग लोग हमेशा अपनी नामर्दी के लिए ब्राह्मण को क्यों कोसते हैं ?

Bsdk के तेरे में दम है तो बोल मुल्ले मौलवी,ईसाई पादरी,बौद्ध भंते ये भी सब धंधा करते है...

शिक्षक पढ़ाता है धर्म है या धंधा? फौजी लड़ता है धर्म है या धंधा? मौलवी अजान देता है धर्म है या धंधा? डोम लाश जलाता है धर्म है या धंधा? पादरी मास करता है धर्म है या धंधा? डाक्टर इलाज करता है धर्म है या धंधा? तेरी मां तेरे बाप को खाना देती है ये धर्म है या धंधा? बोल @kanhaiyakumar

अब सुनो, अगर ये कह दिया जाए कि मोची का जूता सिलना उसका धर्म है? माली का माला बनाना धर्म है? तब यही MC कन्हैया कुमार,मोची और माली को नीचा दिखाने के नाम पर नंगा नाचने लगेगा? तब उनके काम को ये ऊंच नीच के मुद्दे पर भटका देगा? सोचों,ये कितना बड़ा Hरामी है? कैसे लोगों में जहर घोलता है?

धर्म को अपने फायदे के इस्तेमाल करना एक धंधा है धर्म वही जिसमे सब को समान भाव देखा जाय किसी के साथ भेदभाव न हो वही सच्चा धर्म

जिसकी जितनी क्षमता, वैसा उसका काम। कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता और ज़रूरी नहीं कि मोची का बच्चा भी मोची ही बने। वो भी ब्राह्मणों की तरह मेहनत करे तो जीवन में ज़रूर सफल होगा। आपके लिए एक श्लोक: न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥

जब सीपीआई में थे तो कांग्रेस को गरियाते थे जब कांग्रेस आए राहुल जी की मस्त चाटने लगे। फिर चढ़ने नी दिया मंच पे इसकी कड़ी निंदा...

मूर्खों की दलीलें उसकी जाति में नजीर ही लगेगी। ब्राह्मण का ज्ञान है जो उसे धार्मिक कार्यों से धन अर्जित करवाता है। मोची जूता सिले तो क्या उसे भी धर्म का नाम दोगे? या ब्राह्मण ईश्वर पूजा करवाता है तो उसे धर्म से बहिष्कृत करोगे? धर्म की परिभाषा क्या है? कुंठा को चेतना पर हावी न करो

कटु सत्य!!

ब्राह्मण है कौन ? ब्राह्मण कहा किसे गया है?? प्रबंधक हैं कौन सब या जो है वही?? प्रधानमंत्री है कौन सभी या कोई और?? अब दूसरी बात ब्राह्मण के घर में पैदा हुए तो क्या आज सब पुजारी ही है?? अरे हर बात की बात होती है आपस के मतभेद खत्म होंगे नहीं बस बाते वही पुरानी घिसी पिटी।

कन्हैया बाबू ज़रा ये बताइए 👇 मोची जूता सिले तो धंधा, माली फूल उगाए तो काम — इसमें किसी को शर्म नहीं, बल्कि मेहनत का हक़ मिलता है। 👞🌸 तो फिर ब्राह्मण जब पूजा कराए, वेद-पाठ करे, तो अचानक वो "धर्म" बन गया और मेहनताना देना अपमान क्यों समझा जाता है? 🤔 मेहनत का सम्मान सबका हक़ है, चाहे वो मोची हो, माली हो या ब्राह्मण। या फिर आपको सिर्फ ब्राह्मणों की मेहनत मुफ्त चाहिए? 😏 जातिवाद का खेल कांग्रेस का पुराण खेल है। इसमें अब जनता नहीं फसेंगी। 😡

ये वही लिब्रांडु है जो नारे लगाया "भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह" "अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं" अब इसकी नीचताई देखो, देश बांटने का ज्ञान पेल रहा है। इसका चाल चलन, अर्बन नक्सल को परिभाषित करता है। @kanhaiyakumar

भाई , सभी कर्म ही धर्म कहलाता है जैसे क्षत्रिय धर्म , वैश्य धर्म वैसे ही ब्राह्मण धर्म ! धर्म के नाम पर ईमानदारी की गारंटी मिलती है ! कर्म ही धर्म है ! एक जूते बनानेवाला का धर्म भी जुता बनाना ही है जैसे ब्राह्मण का कर्म !

थेथरई का क्या किया जा सकता है। कर्म ही धर्म है। मोची का ठीक से जूता सिलना ही उसका धर्म है। ब्राम्हण का कर्म पूजा पाठ करना और समाज को ज्ञान देना। फर्क यह है के जूता सिल कर उसे पैसे मिलते है और पंडित को गाली।

कुछ दिनों से धर्म के बड़े बड़े प्रकांड विद्वान पैदा हो चुके है जो दिन रात हिंदू धर्म पे जान पेलते है कभी मजहब के लिए एक शब्द नहीं बोलते जहां महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझी जाती है तब तुम जैसलोगो का ज्ञान गान में घुस जाता है क्या।

अबे घोसड़ी के धर्म को धंधा से जोड़ रहे हो. इसी करण से अभी तक लार चाट रहे हो. आगे भी चाटते रहोगे. इसका जन्म ही हुआ है लार चाटने के लिए. धंधा की परिभाषा आपने मालकिन से पूछो ❓

Na mochi bharat tere tukde honge ke mare lagata hai Na pandit bharat tere tukde honge ka nara lagata hai Par aap jaise kansh wadi yadav har aise admi ko uthate hai jo hindu aur bharat ka virodh karte hai

इन मूर्खो को समझाओ! शास्त्र हर कर्म को धर्म कहता है।

बस, यही सोच तुम्हें नफरत का पात्र बनाती है.. अरे जिओ न अपनी जिन्दगी जैसे भी जीना हो.. दूसरों को भला बुरा क्यों कहते फिरते हो.. मुकाबला कर नहीं पाते तो रोने लगते हो.. ऐसे कैसे चलेगा..

तुम अपनी मोची से सिलवा लो, जो भी जहाँ भी चाहो! 🤣😂🤣

तेरी बीबी खानाबनाकर खिलाती हैं धर्म है या धंधा। तुम रात दिन उजूल फिजूल बकते हो कुतार्किक बाते धर्म है या धंधा तुम आधाजीवन जे एन यू में बिताया वो धर्म था या धंधा ।

पता नहीं, कैसी और किस विषय में PhD की है? जो यह नहीं पता है कि पूजा-पाठ करवाना पुरोहित ब्राह्मणों का परंपरागत धंधा ही होता है, जबकि भगवान की उपासना व्यक्ति विशेष का ऐसा स्वधर्म है, जो हर जाति बंधन से मुक्त है!

मानसिक विक्षिप्त है बेतुके सवाल ओर बेतुके जबाब, यह बेवकूफ केवल राजनीति कर रहा है, जातिवाद की बाते कर रहा है खुद दोष दे रहा है ब्राह्मण को।

मोची जूता सिले तो धंधा, ब्राह्मण पूजा करे तो धर्म। धंधा ही है

कन्हैया तुम क्या बोलना चाहते हो? मोची अपनी धर्म निभा रहा है और माली भी अपना धर्म। ब्राह्मण का नाम लेकर धंधा तो तुम कर रहे हो।

कर्म ही धर्म 🙏

Kya gjb dhoya h

जीवन में खुद अपनी लकीर बड़ी न करना और दूसरे को दोष देना ये कमजोरो की निशानी है , मोची अपने हुनर से अपना परिवार पाल रहा है और ब्राह्मण अपने सबको जीने का हक है , आज यही सब करके हुनर के काम हिन्दुओं से दूर कर दिए और एक समुदाय विशेष ने इन पर कब्जा कर लिया

तो अपने से पूजा पाठ कर लिया करो, मगर यहाँ RR ना करो। किसी ने तुम्हें मजबूर नहीं किया है।

एक बहुत बड़ा तबका ब्राह्मण के पीछे पड़ा है देश भर में। उनकी रोजी रोटी और पूरी राजनीति ही चलती है ब्राह्मणों को कोस कोस कर।

मोची भी जूता सिलने को धर्म मानें कौन मना कर रहा है भाई सबको आजादी है कन्हैया कुमार जैसे देश विरोधी एजेंडा चलाने वाले लोगो को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी टिकट दे रही है
