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माछ भात पर आपकी क्या राय है?
10 条评论

मैथिल मैथिला वासी शाक्त होते है, हम काली उपासक है, तंत्र साधना विधि विधान पूजा, माछ खाना और छागर बलि देने की परंपड़ा साथ ही। जय कंकाली, जय श्यामा 🙏

हमरा शाक्त छी देवी उपासक। हमर धर्म मे माछ खाएब माने बैकुण्ठ जाएब।

आब करू धर्मक गप्प बाराह पुराण अनुसार 👇

जे नर मछली खात हैं मुंडा पूछ समेत ते नर वैकुंठ जात है नाती पूत समेत।

बिल्कुल गलत बात है सिर्फ मैथिल ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष में जितने भी लोग शाक्त संप्रदाय को मानने वाले होते है वो मांसाहारी होते है उड़ीसा बंगाल मिथिला में 85% लोग शाक्त होते है और जगह कम है वैसे हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी तो मैथिल नहीं थे

बात असल में ये है कि वैष्णव समाज जो बोलेंगे वही सही है, भारत में शैव और शाक्त संप्रदाय कि जो भी परम्परा है, ये लोग गलत ही बोलेंगे। जय मां काली 🚩

परंपरागत जे चीज चलल एलए है ओकरा त नै छोईर सकय छी, शक्ति के आराधक होई छै मैथिल, त बलि हेबे करते, माछ खेबे करते। ई गुरु जी के बात से सहमत नै छी हम सब। बाकी राधे राधे 🙏🙏

Hm v vegetarian h pr hm shakt ko follow krte h maa Kali ko bali pdhti h hmara culture h, shakt M bali kha gya h apne culture ko hm follow krege use koi mita nhii skta🙏🙏 jai maa kali❣️🙏

शिव पूराण अनूसार शिव केँ नेवैद्य चढ़ेबाक बिधि

ई लिया अश्वमेघ मे बलि देबाक पद्धति। घोड़ा केर हरेक अंग अलग अलग देवता के अर्पित होइ छलैन। पहिने बैल केर सेहो होइ छेलै। आजुक समय मे पूरापुरी वर्जित छै। पहिने वैदिक आर्य मने पूर्वज सभ गाय सेहो ग्रहण करैत छलाह। पाणिनी के समय तक। आब ई महापाप अछि। ओकर चर्चा सेहो नै करबाक चाही।
