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मज़ेदार लोग मिलते रहते हैं
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@Sunil73820648 मुंशी प्रेमचन्द ने कहा था कि "सांप्रदायिकता सदैव संस्कृति का पल्लू ओढ़कर निकलती है" यही हाल अंधभक्तों का है, मैं आपके कई वीडियो देखता हूं, लोग मोदी का सपोर्ट करने का असली कारण तो बता नहीं सकते, उल्टे सीधे तर्क देने लगते हैं और हंसी का पात्र बन जाते हैं। @rajeevranjanMKH

सत्ता ने धर्मांधता की भीड़ इकट्ठी की है ये लोग जनहित के कोई मुद्दे नहीं गिना पाएंगे

ये बड़ा लेवल का गोबर भक्त है

ये खाली व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान अर्जन ले रहे

ऐसे लोगो को अंधभक्त कहा जाता है और इस तरह कि प्रजाति बहुत पाई जाती है आजकल देश में 😀😀

मोदी जी के 3 काम भी नहीं बता पाते इनसे सवाल करो आम का जवाब देंगे गुठली का फिर इनको अंधभक्त बोल दिया जाए तो गाली देने लगते हैं

इनके दिमाग में एक तरीके का मसाला भरा होता है और क्या मसला भरा होता है इसको पूरा पूरा देश जानता है इनको समझाना मुश्किल नहीं नामुमकिन भी है क्यों कि वे मूर्ख होते हैं ।

जब सारा काम विदेशै में किए हैं तो बेचारे अंकल यहाँ कौन सा काम बताएँ? अब सभी लोग लोकल से निकलकर ग्लोबल हो चुके हैं।

सारी गलती नेहरू की है जो ऐसे अंकल लोगो को फ्री की पेंशन दे रहे थे, पुरी जवानी बीत गईं इतनी अराजकता थी तब भी ये जीवित रह गए और इन्हें विकास सिर्फ 9 सालों में दिखा 🤦♂️

ये है चरण चुंबक पत्रकार इनको भी तकलीफ है मोदी से। कौन से ऐसा देश है जो अपना काम करता है सिर्फ और सिर्फ अपना आपको एक देश का नाम बताना है आपने तीन ऑप्शन दिया है ना आपको सिर्फ एक देश का नाम बताएं जो वह खुद पर निर्भर है दूसरे देशों में काम नहीं करता। कोई एक देश का नाम जरुर बताइएगा।
