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मुझे पढ़िए तो किताबों की तरह से पढ़िये आप तो सुबह का अखबार समझते हैं मुझे

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लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी है कि 46 साल का होने के बावजूद मेरी शादी नहीं हुई। इसलिए लोग मुझे रं@#% रं@#% कहकर पुकारते हैं। गांव और रिश्तेदारी में शादी-ब्याह हो, तो लोग मुझे बुलाते तो जरूर हैं, लेकिन काम करवाने के लिए- कुर्सियां लगाने, पानी भरवाने, टेंट संभालने के लिए। घर में हवन हो तो कह दिया जाता है- तू यहां से हट जा, जोड़ा बैठेगा। इस व्यवहार की इतनी आदत हो चुकी है कि कोई इज्जत दे तो अजीब लगता है।

Shivani Sahu

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