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'मोडानी' के लालच से तबाह होगा ग्रेट निकोबार

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राहुल ने जो कहा वो हमने चार साल पहले कहा था🙏 "ग्रेट निकोबार की ज़मीन छीन कर अदाणी को दी जा रही है।" ० राहुल गांधी , 29 अप्रैल 2026 "ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश के किस धन्ना सेठ को दिया जाएगा यह आसानी से समझा जा सकता है।" ० हम स्वयं, 17 अप्रैल 2022 हमने चार साल पहले अपनी अंडमान निकोबार यात्रा में इस प्रोजेक्ट से आने वाली तबाही के बारे में विस्तार से बताया था। 🔸 ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट के तहत वहां एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांस शिपमेंट पोर्ट, एक एयरपोर्ट, एक बड़ा पावर स्टेशन और एक ग्रीन फील्ड सिटी का निर्माण होगा। ▪️ १) ग्रेट निकोबार का कुल क्षेत्रफल मात्र 911 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 166 वर्ग किलोमीटर में ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट लागू हो रहा है। २) ग्रेट निकोबार में दुनिया के सबसे ज्यादा समृद्ध वर्षा वन है। यह अब तक संरक्षित था लेकिन अब इसे डी नोटिफाई कर दिया गया है। प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ काटे जायेंगे। ३) ग्रेट निकोबार की वर्तमान आबादी मात्र साढ़े छह हजार है लेकिन इस प्रोजेक्ट के पूरा होने तक आबादी बढ़ कर साढ़े छह लाख हो जाएगी। ४) इस प्रोजेक्ट के कारण धरती के आदिम पुरखे शोम्पेन और निकोबारी आदिवासी बेघर हो जायेंगे। इस समय मात्र दो सौ मंगोलाइट शोम्पेन आदिवासी बचे हैं। निकोबारी आदिवादियों की आबादी भी सिर्फ़ एक हजार बची है। ५) प्रोजेक्ट की चपेट में आकर करीब 1700 पेड़, पौधे, वनस्पतियां, जीव जंतु पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। 6) ग्रेट निकोबार में दुर्लभ लैदर बैक कछुआ और मेगापॉड पक्षी का घरौंदा है जो इस प्रोजेक्ट की बलि चढ़ जायेंगें।

Dr.Rakesh Pathak डॉ. राकेश पाठक راکیش

46,859 просмотров • 3 месяцев назад

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में जो कुछ भी हो रहा है, वो सिर्फ नरेंद्र मोदी के दोस्त अडानी के लिए है। • पिछले 5 साल से INS Baaz को expand करने की मांग की जा रही है पर मोदी सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी, लेकिन वहीं पर अडानी को पोर्ट, टाउनशिप, कसीनो, मॉल्स लाने की मंजूरी मिल गई • ग्रेट निकोबार की जनसंख्या सिर्फ 8,000 है। मगर इस प्रोजेक्ट के तहत 5 लाख से भी ज्यादा लोगों को वहां बसाया जाएगा। सवाल है- इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को क्या फायदा होगा? • निकोबार द्वीप में शौम्पेन जनजाति है, जो पूरे विश्व में सिर्फ 200 लोग बचे हैं, अब उनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है • निकोबार लेवल 6 भूकंप ज़ोन में आता है, मतलब हाइली क्रिटिकल एरिया तो क्या 5 लाख लोगों को बसाना सुरक्षित होगा? • अंडमान और निकोबार में करीब 1.5 करोड़ पेड़ काटे जा रहे हैं, जो हमें हर तरह से सुरक्षा देते हैं। अगर इन्हें तबाह कर दिया जाएगा तो इसका पर्यावरण पर जो असर होगा, उसका अंदाजा हम नहीं लगा सकते ये सरासर तानाशाही है और हमें इस अन्याय के खिलाफ़ मिलकर आवाज उठानी चाहिए। : Adivasi Congress अध्यक्ष Dr.Vikrant Bhuria जी

Congress

17,795 просмотров • 2 месяцев назад