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"मत मारो, मेरे पापा को, पापा पापा" देहरादून में एक शख्स को कुछ लोग पीट रहे हैं, और साइड में उस शख्स की छोटी बच्ची अपने पापा के लिए रो रही हैं..! बहुत दुखद है यह दृश्य, एक बच्ची के लिए उसका पापा हीरो से कम नहीं होता, बताओ...

61,188 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Dwarka Daiyavor 1 Jahr

यह घटना दिल दहला देने वाली है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। लास्ट बार निवेदन कर रहे हैं स्वीकार कर लीजिए बार बार कहना उचित नहीं होता है ।

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Bhargav Rajputvor 1 Jahr

ऐसे खुलेआम गुंडागर्दी हो रही हैं

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Travala.com 🏨 ✈️vor 5 Jahren

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Vijay Singhvor 1 Jahr

यह दृश्य अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। एक छोटी बच्ची के लिए उसका पापा सबसे बड़ा हीरो होता है, और इस तरह के दृश्य उसके मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसी घटनाओं के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में भय और हिंसा का माहौल खत्म हो सके।

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Bhargav Rajputvor 1 Jahr

दुनिया बड़ी जालिम हैं

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Neelamvor 1 Jahr

यह चाहे किसी भी धर्म के हो प्रशासन को तुरंत वीडियो के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए

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Bhargav Rajputvor 1 Jahr

सही बात

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Deeksha Sengarvor 1 Jahr

एक छोटी बच्ची के लिए उसका पापा सबसे बड़ा हीरो होता है, और इस तरह के दृश्य उसके मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

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Bhargav Rajputvor 1 Jahr

बच्ची पर क्या असर पड़ेगा यह देखकर

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Bhargav Rajputvor 1 Jahr

धन्यवाद आपका, संज्ञान लेने के लिए 🙏

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यह मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल पोस्ट में से एक है। जब लिख रहा हूँ तो बार-बार उस बच्ची का अनदेखा चेहरा मेरी आँखों के सामने आ रहा है। दिल्ली की सड़कों पर गुब्बारे बेचने वाली एक छोटी बच्ची शायद उस रात भी बस खाना जुटाने निकली थी। वहीं से एक कैब ड्राइवर उसे उठा ले गया। वह “पापा बचा लो” चिल्लाती रही, बबलू ने उसे महरौली के पास ले जाकर दो बार उस बच्ची का रेप किया, और फिर उसका गला घोंटकर मार डाला. लाश जंगल में फेंक दी. यह सिर्फ एक बच्ची की हत्या नहीं है, यह हमारी व्यवस्था की नाकामी है। सोचिए, जिस उम्र में बच्चे गुब्बारों से खेलते हैं, उस उम्र में यह बच्ची गुब्बारे बेच रही थी। और उसी गरीबी, बेबसी और फुटपाथ की जिंदगी ने उसे सबसे आसान शिकार बना दिया। हमें सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी पर संतोष नहीं करना चाहिए। सवाल ये है कि रात में सड़कों पर काम कर रहे बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा? बाल मजदूरी, सड़क पर रहने वाले बच्चे और महिला सुरक्षा सिर्फ भाषणों के मुद्दे क्यों हैं? इस बच्ची के लिए न्याय सिर्फ सजा नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम है जहां कोई बच्चा भूख के कारण सड़क पर न उतरे और कोई दरिंदा उसे शिकार न बना सके।

Arvind Chotia

45,085 Aufrufe • vor 3 Monaten

नेपाल से सामने आया एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला एवं बालबालिका मंत्री सीता बादी 17 दिन से रो रही एक बच्ची को गोद में लेकर उसे दूध पिलाती नजर आ रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह बच्ची बाढ़ प्रभावित परिवार से नहीं, बल्कि काठमांडू के बाल मंदिर स्थित नेपाल बाल संगठन के आश्रय गृह से रेस्क्यू किए गए 20 बच्चों में शामिल थी। 18 जुलाई को बच्चों को आश्रय गृह से सुरक्षित निकाला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, आश्रय गृह में कुछ बच्चों की आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याएं थीं, जबकि कुछ बच्चे खांसी से परेशान थे। इसी दौरान 17 दिन की बच्ची लगातार रो रही थी। टीम ने उसके लिए दूध की तलाश की, लेकिन दूध उपलब्ध नहीं हो सका। बच्ची को शांत कराने के लिए मंत्री सीता बादी ने खुद उसे गोद में लिया और दूध पिलाया। मंत्री के इस मानवीय प्रयास का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है और यूजर्स उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।....🤔🤔🤔

Naglot Ram Singh Meena🇮🇳

32,320 Aufrufe • vor 23 Tagen

तानाशाही हिटलर शाही का ऐसा उदाहरण आपको दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगा आप लोगों को याद होगा जब सागरिका घोष दलाल यानी पत्रकार हुआ करती थी IBN7 चैनल में थी तब वह कुछ लड़कियों के साथ ममता बनर्जी का एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था कार्यक्रम में मौजूद एक लड़की तान्या भारद्वाज ने ममता बनर्जी से पश्चिम बंगाल में महिलाओं और लड़कियों पर हो रहे अत्याचार की घटनाओं पर सवाल पूछ दिया बच्ची के सवाल पूछने पर ममता बनर्जी इतना गुस्सा हो गई कि उस बच्ची को माओवादी नक्सली वामपंथी कैडर का और न जाने क्या-क्या बोलकर वहां से गुस्से से चली गई लेकिन रुकिए यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ उसके बाद उस बच्ची और उसके परिवार के साथ क्या हुआ यह खबर भारत की किसी भी मीडिया ने हमको नहीं बताया यहां तक की खुद सागरिका घोष और उनके पति राजदीप सरदेसाई ने यह दुनिया को नहीं बताया कि उसे बच्ची तान्या भारद्वाज के साथ बाद में क्या हुआ तृणमूल कांग्रेस के गुंडे उसे बच्ची के घर जाने लगे उस बच्ची के पिता एक व्यापारी थे रोज उसे बच्ची को परेशान किया जाने लगा बच्ची की पढ़ाई बंद हो गई पिता डर से घर से निकलना छोड़ दिया और अंत में उस परिवार में कोलकाता छोड़ दिया और ममता बनर्जी के हारने के बाद कल यह परिवार कोलकाता पहुंचे सोचिए इस देश में कैसी-कैसी तानाशाही विपक्ष ने किया है लेकिन यह दो गले लोग यह कॉकरोच लोग सिर्फ मोदी को तानाशाह कहते हैं

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

36,080 Aufrufe • vor 4 Monaten

मासूम बच्चे ने खोली पिता और दादा-दादी की पोल - अंजलि की हत्या का सच! 💔😨 समाज में रिश्तों की मर्यादा किस कदर गिरती जा रही है, यह वीडियो उसी का एक खौफनाक उदाहरण है। बिहार के हाजीपुर (फतेहपुर) की रहने वाली अंजलि की उसके ही ससुराल वालों ने बेरहमी से हत्या कर दी। इस वीडियो में अंजलि का छोटा सा बेटा अपनी तोतली आवाज़ में बता रहा है कि कैसे उसके 'पापा और दादा' ने रस्सी से उसकी माँ का गला दबाया और 'दादी' ने माँ का मुँह दबाए रखा ताकि वह शोर न मचा सके। अंजलि के पिता भी इस दुखद घड़ी में टूट चुके हैं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि हमारे समाज के दोहरे चेहरे को भी उजागर करता है जहाँ सैंकड़ों लोग तमाशा देखने के लिए तो खड़े हैं, लेकिन किसी ने भी अंजलि के शव को कंधा देने या उस बूढ़े पिता और मासूम बच्चे की मदद करने की जहमत नहीं उठाई। हमें कब तक ऐसी घटनाओं को केवल एक तमाशा मानकर देखना एक मासूम की जुबानी, उसकी माँ की मौत की दर्दनाक कहानी। 💔 बिहार के हाजीपुर में जो अंजलि के साथ हुआ, वह किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जिस घर को उसने अपना समझा, वहीं उसे मौत मिली। सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि लोग तमाशबीन बने रहे, पर किसी ने उस बूढ़े पिता का हाथ नहीं थामा। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो चुका है? इस वीडियो को इतना शेयर करें कि अंजलि के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा मिले और उस मासूम बच्चे को न्याय

Lakhan meena

85,397 Aufrufe • vor 6 Monaten

एक फ़िल्म में डायलॉग था "क्या साहब आप भी कपड़ों से धोका खा गए... हम तो हिंदुस्तान अपने दिल में लिए फिरते हैं" एक खूबसूरत वीडियो, जिसे देखकर आपको गर्व होगा अपने वतन पर... “यहाँ एक युवती अपने उस नन्हे बच्चे के साथ भारत लौट रही है, जिसका जन्म विदेश में हुआ है। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही वह सबसे पहले भारतीय मिट्टी का थोड़ा-सा तिलक अपने सिर पर लगाती है—अपने जन्मभूमि देश के प्रति आशीर्वाद और सम्मान के प्रतीक के रूप में। इसके बाद वह अपनी दो महीने की बच्ची को भारत माता की गोद में रख देती है, मानो उससे अपनी बेटी को स्वीकार करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना कर रही हो। इसके बाद ही बच्ची की दादी उसे अपनी गोद में उठाती हैं।" ये एक आम हिन्दू का अपने देश अपनी मात्रभूमि के लिए प्रेम और सम्मान है... यहीं से उपजा "वन्देमातरम"

Oc updates

99,579 Aufrufe • vor 1 Monat

बहुत बड़ा ख़ुलासा- यह सिर्फ़ एक केस नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है जहाँ बार-बार जीतने के बाद भी इंसाफ़ नहीं मिलता। 13,000 से ज़्यादा Group A अधिकारी, जो देश की सीमाओं पर खड़े हैं, आतंकवाद से लड़ते हैं, हमारी सुरक्षा की ढाल हैं, वो पिछले एक दशक से अपने ही अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। 2011 से शुरू हुई यह लड़ाई, Delhi High Court से लेकर Supreme Court of India तक पहुँची और हर बार फैसला उनके पक्ष में आया। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है, जब सरकार फैसले लागू ही न करे तो जीत का मतलब क्या रह जाता है? रिव्यू पिटीशन खारिज… अवमानना की स्थिति… और अब, एक नया कानून लाकर उसी फैसले को पलटने की कोशिश। क्या यह न्याय है या व्यवस्था की शक्ति का दुरुपयोग? क्या देश की रक्षा करने वाले अधिकारी अपने ही सिस्टम में ‘दूसरे दर्जे’ के हैं? इस वीडियो में हम सिर्फ़ तथ्य नहीं रखेंगे… हम पूछेंगे वो सवाल, जो हर नागरिक को पूछने चाहिए। अगर आप सच जानना चाहते हैं… अगर आपको लगता है कि न्याय सिर्फ़ किताबों में नहीं, ज़मीन पर भी होना चाहिए… तो लिंक पर क्लिक करके पूरा वीडियो देखिए-

Anuraag Muskaan

11,316 Aufrufe • vor 6 Monaten