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मोदी कहते हैं—नींबू-मिर्च अंधविश्वास है, पाखंड है ! लेकिन ज़मीन पर पार्टी के नेता कहते हैं— भाषण से पहले नींबू-मिर्च, जहाज़ पर भी नींबू-मिर्च क्योंकि विज्ञान भाषण में है और विश्वास VIP जहाज़ में! देश डिजिटल इंडिया बन गया पर भाजपा का अंधविश्वास अब भी फर्स्ट क्लास में उड़...

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कल Govind Singh Dotasra द्वारा दिया गया भाषण वाकई लाज़वाब रहा। उस भाषण में वह सब कुछ था, जो एक सशक्त विपक्ष के नेता के भाषण में होना चाहिए। उनके शब्दों में आत्मविश्वास झलकता है, सत्ता से टकराने का साहस दिखाई देता है और एक नेता के रूप में अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने का जुनून भी साफ महसूस होता है। भाषण में वर्तमान संघर्षों की पीड़ा है, कार्यकर्ताओं को जगाने वाली अलख है, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गरिमा को पहुँचाई जा रही ठेस का दर्द भी है और उनके प्रति गहरा सम्मान भी है। इस भाषण में मुख्यमंत्री को दी गई सीधी चुनौती है, तो संघर्ष झेल रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिश्रम को संबल देने वाली ऊर्जा भी है। व्यवस्था सुधार की टीस भी इसमें शामिल है और स्वयं पर लगाए जा रहे आरोपों के विरुद्ध सम्मानपूर्वक संघर्ष करने की मशाल भी है। सत्ता से पूछे गए गंभीर सवाल हैं, तो जनता से संवाद के लिए हल्का-फुल्का हास्य और व्यंग्य भी है। कहीं मेज़ पर ज़ोर से पड़ते हाथ की खनक है, तो कहीं प्रदेश प्रभारी से किया गया स्पष्ट वादा है। एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, एक ही भाषण में जो कुछ समाहित हो सकता है, वह सब इसमें मौजूद है। सचमुच, इस समय गोविंद सिंह डोटासरा के भाषण गंभीरता, तीव्रता और ज्वाला के साथ गूंज रहे हैं। ये भाषण प्रदेश के जनमत पर कितना प्रभाव डालते हैं, इसका निर्णय आने वाला वक्त ही करेगा।

Dinesh Bohra

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यदि किसी को ये आपत्ति है कि आतंकी संगठनों और I.N.D.I.A. गठबंधन के नाम की तुलना कैसे कर दी गई तो मैं कहना चाहता हूँ कि बुरा व मानें नाम ही नहीं काम और बयान में भी बहुत सारी समानता है। - आतंकवादी संगठन कहते है की अफ़ज़ल हालात का मारा था इंडिया गठबन्धन वाले लोग भी कहते है। - आतंकवादी कहते है ज़ाकिर नाइक शांति का मसीहा है कांग्रेस के लोग भी कहते हैं। - आतंकवादी कहते हैं कि याकूब मेमन की जुडिशल किलिंग हुई है ये लोग भी कहते है। - आतंकवादी कहते हैं कि कश्मीर में सेना हमारे लोगों को मार रही है इंडिया गठबंधन वाले एक क़दम आगे जाके कहते हैं कि सेना प्रमुख सड़क छाप गुंडा है। - आतंकवादियों के लिए आँख में आँसू आतंकवादी संगठनों के भी आते हैं और इन की अध्यक्षा के भी आते हैं। अब आतंकवाद पर नज़रिए को ले कर इनकी सोच में इतनी समानताएँ हैं तो फिर I.N.D.I.A. वालों की नाराज़गी का आधार क्या है बतायें

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