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मंदिरों में तो शोर है, असली दुआएं तो अस्पतालों में सुनाई देती हैं.
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Комментарии: 10

भगवान करे इन जैसे बकैत को कभी अस्पताल से फुरसत न मिले।

ये तथाकथित सेल्फक्लेम्ड इतिहास कार कम राजनीत के विद्वान का ज्ञान देखिए एक बार अगर ये बोल दे की मस्जिदों में सोर है तो इनकी ganड रूपी मुंह फट जायेगा

ये आरक्षण की ख़ैरात पर पलने वाले खुद को हिंदू विरोधी क्यों दिखाते है। 🤦🏻♀️🤦🏻♀️ एक तरफ़ इसको बिना पढ़े लिखे doctor बनना है और दूसरी तरफ़ मंदिरों पर तंज कसता है की ये सब फ़ालतू है । ग़ज़ब नमूना है

ऐसे ही भांड हिंदुत्व को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं।

यह नीच अधर्मी केवल मंदिर बोला है यदि मस्जिद बोला होता तो इसका सर तन से जुदा हो गया होता

तू भोंकता रे, और वहाँ भाजपा तीसरी और चौथी बार भी सरकार बनाती रहेगी … तेरे भोंकने से घंटा कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला … चल निकल बे

मंदिरों में शोर ? मतलब चपटी धरती के समर्थक ?

बस माइक का अवाज मस्त लगता है 3 बजे सुबह 12 बजे दोपहर 4 बजे शाम 6 बजे फिर रात 8 बजे

मस्जिदों में तुम और तेरे अब्बू का kudhane जाते हो?

मज्जिदो में तो शोर है, असली दुआएं तो अस्पतालों में सुनाई देती हैं.
