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मध्यप्रदेश से एक और खबर: मालवा के प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में सारे पंडितों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है! आरोप है कि SDM सर्वेश यादव (जो खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तदार बताते हैं) ने ब्राह्मणों पर अभद्र टिप्पणी की! अब मंदिर के हजारों पंडित व सेवादार ने...

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भारतीय जनता पार्टी बार बार एक सवाल खड़ा कर रही है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में आने से रोका था। इस झूठ का पर्दाफ़ाश हम करें, उससे पहले क्या भाजपा इस बात का जवाब देगी कि मोदी सरकार के दौरान अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास में दलित समाज से आने वाले तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को किसने रोका था? मोदी सरकार के दौरान अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन में आदिवासी समाज से आने वाली वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को आने से किसने रोका था? क्या इन दोनों राष्ट्रपतियों को इसलिए कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया क्योंकि वह दलित और आदिवासी समुदाय से आते हैं। और यह जगजाहिर बात है कि भाजपा और RSS के लिए नीति दलित और आदिवासी समाज के ख़िलाफ़ है। अब आइए ऐतिहासिक संदर्भ पर। 28 नवम्बर 1947 को भी दिल्ली में अपनी प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि जूनागढ़ कि सरकार सरकारी ख़ज़ाने से सोमनाथ मंदिर का निर्माण नहीं कर सकती। जब गांधीजी ने सरदार पटेल से पूछा कि क्या तुम सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से कुछ पैसा दे रहे हो। तो सरदार पटेल ने कहा था कि "जब तक मैं ज़िंदा हूँ सरकारी ख़ज़ाने से एक पैसा सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए नहीं दिया जाएगा। हिन्दू समाज चंदा करके मंदिर का निर्माण कर सकता है।" जब 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन का समय आया तो यह जानकारी प्राप्त हुई कि तत्कालीन सौराष्ट्र की सरकार ने मंदिर निर्माण में 5,00,000 रुपया दिया है। सरकारी धन से मंदिर का निर्माण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और भारतीय संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल था। पंडित नेहरू इसी नीति का पालन करते हुए मंदिर के निर्माण में सरकारी धन के उपयोग का विरोध कर रहे थे। 2 मार्च 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ख़ुद पत्र लिखकर नेहरू जी से पूछा कि वे तो मंदिर के उद्घाटन में निजी हैसियत से जाना चाहते हैं। इसके जवाब में उसी दिन पंडित नेहरू ने लिखा है कि मेरा विरोध इस बात से है कि मंदिर के निर्माण में सरकारी धन का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में अगर सरकार इसमें शामिल होंगी तो यह हमारी सेकुलर नीतियों के ख़िलाफ़ होगा। लेकिन अगर आपने पहले से ही मंदिर के उद्घाटन में जाने का वादा कर दिया है तो मैं आपको नहीं रोकूँगा। 11 मार्च 1951 को चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को लिखे पत्र में भी पंडित नेहरू ने यही बात दोहराई और कहा कि डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जाना चाहते हैं तो जाएं। 22 अप्रैल 1951 को के एम मुंशी को लिखे पत्र में भी पंडित नेहरू ने कहा कि सौराष्ट्र की सरकार का पाँच लाख रुपया देना उचित नहीं है। जो बात पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के बारे में कही थी वही बात अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के फ़ैसले के समय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कही। सुप्रीम कोर्ट ने एक ट्रस्ट बनाने के लिए कहा, जिस ट्रस्ट ने सार्वजनिक चंदे से राम मंदिर का निर्माण किया। मोदी सरकार ने राम मंदिर के निर्माण के लिए एक पैसा नहीं दिया। जो बात राम मंदिर के लिए सही है, वह सोमनाथ मंदिर के लिए ग़लत कैसे हो सकती है। अगर दो वर्तमान राष्ट्रपतियों को राम मंदिर के शिलान्यास और उद्घाटन से बाहर रखना सही है तो तत्कालीन राष्ट्रपति से सरकारी धन से बने मंदिर के उद्घाटन में न आने की बात कहना, हालाँकि उस कार्यक्रम में शामिल हुए, कैसे ग़लत हो सकती है?

Piyush Babele||पीयूष बबेले

25,922 views • 8 months ago

प्रिंसपल छात्रों से कहता है "तुम नाली के कीड़े हो उसी में मर जाओगे"..! खाने में कीड़े मकौड़े निकलते हैं शिकायत करने पर कहते हैं यहां यही मिलेगा..! यूपी के कन्नौज जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों ने प्रधानाचार्य के खिलाफ घटिया भोजन देने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा मोर्चा खोल दिया है..! तकरीबन 100 छात्रों ने खुद को हॉस्टल के कमरे में बंद करके भूख हड़ताल शुरू कर दी..! छात्रों का सीधा आरोप है कि उन्हें कई दिनों से घटिया भोजन दिया जा रहा है..साथ ही प्रिंसिपल, शिक्षक और वार्डन द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है...! इन छात्रों ने सड़क पर न उतरकर अनोखे तरीके से खुद को कमरे में बंद कर नारेबाजी करते हुए विरोध जताया और DM को बुलाने की मांग पर अड़े रहे..! छात्रों की पीड़ा खुद उन्हीं की जुबानी सुनिए 👇👇

Rahul Saini

63,272 views • 1 month ago

स्पष्ट वीडियो में दिखता है कि पुलिस प्रशासन ने मंदिर पर ताला लगाया। दूसरे वीडियो में एक महिला अफसर कहती हैं कि यहाँ हमेशा रामायण का पाठ होता है, फिर 15 तारीख (मंगलवार) को मंदिर क्यों बंद किया गया? जब रिपोर्टर ने मंदिर के संबंध में पूछा, तो अफसर ने जवाब देने से मना कर दिया। मेरा निवास मंदिर के बगल में है, जो वीडियो में दर्शित है, पेंटिंग और शटर मेरे मकान के साइड की वाल पर दिख रहे हैं। मैं स्पष्ट करता हूँ कि जय श्री राम के नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासन के इस अन्यायपूर्ण कृत्य के खिलाफ हैं। हम किसी प्रोपेगंडा के बहकावे में नहीं आएँगे। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: अपने आंदोलन को दृढ़ता से जारी रखना और रिजर्वेशन मुक्त भारत एवं सर श्री बी एन राउ साहब जी की स्थापना की माँग को सरकार के समक्ष रखना। आप सभी से अनुरोध है कि वीडियो देखें, सच्चाई समझें। जय श्री राम! #जय_श्री_राम #रिजर्वेशन_मुक्त_भारत

Adv. Anil Mishra

69,600 views • 11 months ago