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मैंने प्रेमानंद जी पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वो मेरे लिए पुत्रवत हैं: जगतगुरु रामभद्राचार्य जी संतों को आपस में लड़ाना बंद कर दीजिए। रामभद्राचार्य जी ख़ुद कह रहे हैं सभी संतों का सम्मान होना चाहिए। संतों पाए अभद्र टिप्पणी करने वालों को अब मौन यूओ जाना चाहिए।
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