Video yükleniyor...

Video Yüklenemedi

Ana Sayfaya Dön

माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी के खिलाफ मुख्यमंत्री Ashok Gehlot जी ने राजनीति से प्रेरित होकर जो टीका-टिप्पणी की है, वो दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन गहलोत जी को उपराष्ट्रपति के बारे में ऐसे बयान शोभा नहीं देते हैं। लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं...

10,105 görüntüleme • 3 yıl önce •via X (Twitter)

10 Yorum

Sita Ram Meena Jamwa Ramgarh 🇮🇳 profil fotoğrafı
Sita Ram Meena Jamwa Ramgarh 🇮🇳3 yıl önce

@ashokgehlot51 गहलोत जी का बस चले तो यह किसी को भी राजस्थान में घुसने ना दे.... राजस्थान के पुत्र को यहां आने से कोई नहीं रोक सकता है.... उम्र और गांधी परिवार के दबाव में कुछ भी कह सकते हैं और किसी भी हद तक गिर सकते हैं। बेहद शर्मनाक बयान

𝐕𝐀𝐂𝐇𝐀𝐍𝐀𝐑𝐀𝐌 𝐃𝐄𝐖𝐀𝐒𝐈 profil fotoğrafı
𝐕𝐀𝐂𝐇𝐀𝐍𝐀𝐑𝐀𝐌 𝐃𝐄𝐖𝐀𝐒𝐈3 yıl önce

@ashokgehlot51 हार का डर

Indra Jeet Vishnoi 🇮🇳 profil fotoğrafı
Indra Jeet Vishnoi 🇮🇳3 yıl önce

@ashokgehlot51 राजस्थान में कांग्रेस रिपीट होगी इसमें कोई संदेह नहीं है। उपराष्ट्रपति पूरे देश के तो मणिपुर क्यों नहीं जाते हैं। पूरी बीजेपी और अन्य जैसे इडी, सीबीआई, इनकम टैक्स सभी आ जाये फिर भी आमजन की कांग्रेस सरकार को रिपीट होने से कोई नहीं रोक सकता।

Kunj Bihari Bilya profil fotoğrafı
Kunj Bihari Bilya3 yıl önce

@ashokgehlot51 गहलोत जी आप किसी को आने से रोक नहीं सकते।आप उपराष्ट्रपति का अपमान कर देश के संविधान का अपमान कर रहें हो। आपके लिए तो केवल गांधी परिवार ही माई बाप है।

Ravi Singh chouhan profil fotoğrafı
Ravi Singh chouhan3 yıl önce

@ashokgehlot51 Bjp jindabad

Suresh Mishra profil fotoğrafı
Suresh Mishra3 yıl önce

@ashokgehlot51 अगर आपने अपने 5 साल के शासनकाल में काम किया होता तो फ्री-फ्री की योजनाओं को चलाने की नोबत नही आती,जनता काम के आधार पर वोट देती जैसे मोदी जी को दे रही है,अपने शासनकाल के अंत मे फ्री की योजना लाना मतलब एक कसाई की तरह प्रदेश की जनता के सामने चारा डाल कर उन्हें हलाल करने की मंशा है

Harish Acharya profil fotoğrafı
Harish Acharya3 yıl önce

@ashokgehlot51 संवैधानिक व्यवस्था की दुहाई देने वाला आज खुद संवैधानिक व्यवस्था में उपराष्ट्रपति पद पर विराजमान एक राजस्थानी की राजनीति से प्रेरित होकर मजाक बना रहा है चुनाव में जवाब भी मिल जाएगा.

Harish Acharya profil fotoğrafı
Harish Acharya3 yıl önce

@ashokgehlot51 कहो दिल से,,, मोदी फिर से....

Harish Acharya profil fotoğrafı
Harish Acharya3 yıl önce

@ashokgehlot51 राजस्थान के सर्वमान्य नेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ साहब जिन्दाबाद...

राजकुमार गुर्जर profil fotoğrafı
राजकुमार गुर्जर3 yıl önce

@ashokgehlot51 गहलोत और कांग्रेस को जो डर है उसकी असली वजह कांग्रेस की हार का डर सता रहा है 👍

Benzer Videolar

देश की जनता को ये 3 बयान सुनने चाहिए। जब देश में अधिनायकवाद का 'राज' हो और 'नीति' विलुप्त हो जाएं तो विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाज़मी है। संवैधानिक पदों पर आसीन एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अपनी सरकारों के कुशासन और कोलैप्स सिस्टम की कहानी कह रहे हैं। पहले बयान में देश के दूसरे सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति माननीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी उस किसान की दुर्दशा से चिंतित हैं, जो 10 साल से पीड़ित है और ठगा जा रहा है। माननीय उपराष्ट्रपति जी, इस अन्नदाता के साथ किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बार-बार छल किया है। MSP की कानूनी गारंटी, किसान कर्जमुक्ति और आय दोगुनी करने को लेकर वादाखिलाफी की है। दूसरे बयान में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी संसदीय कार्य मंत्री के सामने मोदी सरकार की विफलता और मंत्रियों की अक्षमता को इंगित कर रहे हैं। जहां सदन में मोदी मंत्रिमंडल के सदस्यों के पास ना तो जनता के सवालों का कोई जवाब होता है, और ना ही मंत्री जवाब देने के लिए स्वयं सदन में उपस्थित होते हैं। तीसरे बयान में राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता किरोड़ी लाल मीणा जी अपने मुखिया पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। बार-बार मुख्यमंत्री के निर्णयों और उनके विभाग की कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं।

Govind Singh Dotasra

153,631 görüntüleme • 1 yıl önce

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी की दिल्ली यात्रा को लेकर प्रश्न के उत्तर में : ये अंदरूनी पार्टी के मामले हैं जबसे धनखड़ साहब का एपिसोड हुआ है तब से गवर्नमेंट खुद डिफेंस में भी आ गई है । इस संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति धनखड़ साहब ने, धनखड़ साहब से शिकायत कांग्रेस की बहुत रही है विपक्ष की रही है, विपक्ष की भी रही है पार्टियों की, परंतु धनखड़ साहब को जिस रूप में मजबूर किया गया या वो खुद इस्तीफा दिया उन्होंने, इस्तीफा दिलवाया गया ये तमाम बातें रहस्य बनी हुई हैं तो संवैधानिक पदों पर जो बैठते हैं एक पार्लियामेंट के मेंबर भी इस्तीफा देता है या कोई ऐसी बात बोलना चाहता है, या वो पार्टी की ही पार्टी का है, किसी पार्टी की बात करता है वो भी स्पष्टीकरण देता हो उसके अंदर स्पष्टीकरण देता है और उपराष्ट्रपति जी का इस्तीफा हो गया देश के अंदर आज इतने दिन हो गए हैं अभी तक भी न तो वो कोई बोले न उन्होंने प्रेस से बात करी है न सरकार ने कोई बताया है कि हमारे उपराष्ट्रपति चुने हुए थे वो किन कारणों से इस्तीफा दिया , क्या सरकार नाराज़ थी नइत्तफाकी थी मंत्रियों के बीच में या प्राइम मिनिस्टर के बीच में या धनखड़ साहब के बीच में क्या किसी को नहीं मालूम और वो अभी मौन धारण किए हुए हैं तो ये घटना मामूली नहीं है , संवैधानिक पद पर आप किसी को अगर मजबूर कर देंगे, राष्ट्रपति को कल कर देंगे, जो सुनते हैं हम लोग मजबूर होकर इस्तीफा दिया या इस्तीफा दिलवाया गया जो भी है किसी को नहीं मालूम है सुनी सुनी बाते हैं तो संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्राइम मिनिस्टर, लोकसभा स्पीकर, सीजेआई ये सभी लोग होते हैं बड़े बड़े पदों पर ये संवैधानिक पदों पर होते हैं उनके इस्तीफे ऐसे नहीं होते हैं उनके लिए स्पष्टीकरण देश को देना पड़ता है कि क्यों हम ने इस्तीफा दिया पूरे मुल्क को बताना पड़ता है क्या घनखड़ साहब को अवसर दिया गया क्या ?

Ashok Gehlot

50,315 görüntüleme • 1 yıl önce

कांग्रेस के बड़े नेताओं में आजकल आलाकमान को खुश करने की होड़ मची हुई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री Ashok Gehlot जी द्वारा देश के संवैधानिक पद पर आसीन लोकसभा अध्यक्ष श्री Om Birla जी पर श्री Rahul Gandhi जी के छात्र संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों के नहीं आने को लेकर कोचिंग संस्थानो को धमकाने का बिना किसी प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही गहलोत जी को बताना चाहिये कि भारत की किस संसदीय परंपरा या नियमावली में ऐसा प्रावधान किया हुआ है कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किसी सांसद या नेता प्रतिपक्ष का स्वागत किया जाये। गहलोत जी, केवल सुर्खियाँ बटोरने और आलाकमान की वाहवाही पाने के लिए दिए जा रहे ऐसे बेबुनियाद बयान स्वयं आपको ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। #Kota #Rajasthan

Rajendra Rathore

17,213 görüntüleme • 3 ay önce

जिसने खेत में हल चलाया हो वो जब संसद में सवाल करता है तो कुर्सियाँ काँप ही जाती हैं। एक किसान का बेटा जब देश के उच्चतम संवैधानिक पद पर बैठकर सरकार से पूछता है “किसानों से जो वादे किए थे उन्हें निभाया क्यों नहीं” तो जवाब की जगह इस्तीफे की साजिश रच दी जाती है… इस किसान विरोधी सरकार में जब अन्नदाता की पीड़ा संसद की दीवारों से टकराई तो सत्ता ने दरवाजे बंद कर लिए और सविधान की गरिमा को भी वादों की तरह ताक पर रख दिया। यह सिर्फ एक पद का इस्तीफ़ा नहीं अपितु सच्चाई का गला घोटने की भी साजिश है। माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी से इतना कहना चाहूँगा की देश का हर किसान आपके साथ खड़ा है एवं आपका अवकाश युगांत नहीं अपितु विराम है, हम प्रतीक्षा में रहेंगे… #JagdeepDhankharResign

Abhay Singh Chautala

19,862 görüntüleme • 1 yıl önce

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जिस तरह से संवैधानिक पद पर बैठकर अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह न केवल पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। आरोपों का जवाब तथ्यों और पारदर्शिता से दिया जाता है, ना कि शब्दों की आक्रामकता और मुद्दों को भटकाने से। Pawan Khera ने जो सवाल उठाए हैं, वे जायज सवाल है। अगर आपके पास जवाब है तो सामने आइए, स्पष्टता दीजिए। लेकिन डराने-धमकाने की राजनीति अब नहीं चलेगी। आप पुलिस भेजिए, एजेंसियां लगाइए, कांग्रेस पार्टी डरने वाली नहीं है। Rahul Gandhi जी की सोच के अनुरूप, हम सच के साथ खड़े हैं और सच की आवाज को दबने नहीं देंगे। यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सच्चाई, सम्मान और लोकतंत्र की है। और इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ जी के साथ खड़ी है।

Alok Sharma

38,058 görüntüleme • 5 ay önce

आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री Nitin Nabin जी

Sambit Patra

151,864 görüntüleme • 2 ay önce

राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और इटली की राष्ट्राध्यक्ष जैसी संवैधानिक एवं सम्मानित शख्सियतों के लिए जिस तरह की आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है, वह किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए शर्मनाक है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी और संवैधानिक पदों का अपमान राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रमाण है। यह भारत की महान लोकतांत्रिक परंपरा की भाषा नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है, जिसने हमेशा असहमति के बावजूद मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया है। देश की जनता सब देख रही है, शब्द भी, संस्कार भी और सोच भी। यही कारण है कि जनता ने बार-बार राहुल गांधी की राजनीति को नकारा है और आगे भी उनके अहंकार, अमर्यादित भाषा और नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब देती रहेगी।

Sambit Patra

343,711 görüntüleme • 1 ay önce

आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - श्री Nitin Nabin

BJP

311,204 görüntüleme • 2 ay önce