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मनाली चंडीगढ़ हाईवे पर व्यास नदी का पानी आ गया इस समय पहाड़ों में जाने से बचें 🙏

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11 Comments

Mukesh Pandit's profile picture
Mukesh Pandit1 year ago

Post of hp police for spreading of reumours

𝕾𝖚𝖐𝖍𝖗𝖆𝖏 𝕾𝖎𝖓𝖌𝖍's profile picture
𝕾𝖚𝖐𝖍𝖗𝖆𝖏 𝕾𝖎𝖓𝖌𝖍1 year ago

Punjabis, be prepared to face the brunt of floods. In good times, this water belongs to Himachal and Haryana, and in bad times, it belongs to us.

Pawan Saini(इंसानियत सर्वोपरि )'s profile picture
Pawan Saini(इंसानियत सर्वोपरि )1 year ago

व्यास नदी चंडीगढ़ highway को अपना आशीर्वाद देने आई है डरने की बात नहीं

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Mukesh Pandit1 year ago

It's old video and same has been confirmed by hp policy post

Being Amore's profile picture
Being Amore1 year ago

@HarmeenSoch

vvkashyap 🇮🇳's profile picture
vvkashyap 🇮🇳1 year ago

यातायात में तकलीफ़ तो है पर फसल अच्छी होगी आर्थिक अवस्था सुधरेगी

मां का लाडला's profile picture
मां का लाडला1 year ago

@himachalpolice ई भाई साब फेक खबर फैला रहे हैं आज ही हम ने @himachalpolice का वीडियो देखा था

Manthan Work's profile picture
Manthan Work1 year ago

थोड़ा सा गलत लिख दिया आपने हाईवे के रास्ते में पानी नहीं, पानी के रास्ते में हाईवे आ गया होना चाहिए था

Rishabh's profile picture
Rishabh1 year ago

@Jay_Matoliya

SecretSamaritan's profile picture
SecretSamaritan1 year ago

Old video.

Sam Birdy's profile picture
Sam Birdy1 year ago

@grok is this correct

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नमाज अदा करने के लिए सुख जाता है नदी का पानी , ईद मिलादुन्नबी पर उतावली नदी में फिर अदा हुई खास नमाज ईदमिलादुन्नबी के मौके पर दो से तीन घण्टे नदी सूखती है,, नमाज़ के बाद फिर पानी आजाता है,, ऐसी मान्यता है बुरहानपुर की सदियों पुरानी रिवायत आज भी कायम, हजरत शाह भिखारी रहमतुल्लाह से जुड़ा है इस परंपरा का इतिहास ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर बुरहानपुर की उतावली नदी में इस साल भी मगरिब की नमाज अदा की गई। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने नमाज में शिरकत की और मुल्क व शहर में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ की। बताया जाता है कि हजरत शाह भिखारी रहमतुल्लाह अलैह नदी किनारे बैठे थे। उस समय नदी तेज बहाव के साथ बह रही थी। बुजुर्ग ने नदी से कहा- "उतावली मत बन, ठहर जा।" इसी रिवायत से नदी का नाम 'उतावली' पड़ने की मान्यता है। इसी पवित्र स्थल से जुड़ी यह नमाज की परंपरा सदियों से चली आ रही मानी जाती है। पीढ़ियां बदल गईं, दौर बदल गए, लेकिन बुरहानपुर की यह धार्मिक और ऐतिहासिक रिवायत आज भी कायम है क्या आप इस घटना पर यकीन करते है अपनी राय कमेंट में बताए ,,

TANVIR RANGREZ

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