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मेरी छोटी बहन अश्विनी ने हमारे पापा का सालों पुराना सपना पूरा किया !! 1993 में घर की गरीबी की वजह से पापा ने अपनी LLB की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी एडवोकेट बनने का सपना अधूरा रह गया था लेकिन आज बेटी ने सनद ले कर...

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अग्निवीर बन बेटे ने पूरा किया पिता का सपना, लेकिन पिता वर्दी में नहीं देख पाए अपने लाल को। अजमेर के भवानीखेड़ा नरवर गांव निवासी कृपाल सिंह रावत चाहते थे कि उनका बेटा सन्नी सिंह रावत सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करे। बेटे ने मेहनत कर अग्निवीर में चयन हासिल किया और ट्रेनिंग के लिए रवाना हो गया। लेकिन इसी बीच हाई शुगर और हार्ट फेल होने के कारण पिता का निधन हो गया। पिता के निधन की खबर मिलते ही सन्नी ट्रेनिंग से छुट्टी लेकर गांव पहुंचा और वर्दी पहनकर अपने पिता को अंतिम सलामी दी। जिस बेटे को वर्दी में देखने का सपना पिता ने देखा था, उसी वर्दी में बेटे ने उन्हें अंतिम विदाई दी। यह पल हर आंख को नम कर देने वाला था।

Mandeep RajBhar

56,656 views • 2 months ago

ये पहली बार नहीं है जब भाजपा के नेताओं ने बाबा साहेब का अपमान किया है। लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा संसद में बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी का अपमान हमारा समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। मैंने और मेरे समाज ने सदियों से ऐसे जातीय अपमान को झेला है। खुद बाबा साहेब को कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जी ने कई बार अपमानित किया और कई मौकों पर उनको नीचा दिखाने का काम किया। यही नहीं नेहरू जी ने तो सुनियोजित तरीके से बाबा साहेब को चुनाव हराने का भी काम किया। लेकिन तब के कांग्रेसी नेताओं के हथकंडों से बाबा साहेब विचलित नहीं हुए और हमारे समाज को जो ताकत दी उसे एक राजनैतिक ताकत बना कर आदरणीय मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी और आदरणीय बहन कु. मायावती जी ने हमारे समाज को उसका हक दिलाने का काम किया। मुझे याद है कि 2006 में कांग्रेस की सरकार में NCERT की किताब में एक बेहद अपमानजनक कार्टून छापा गया था जिसमें नेहरू कोड़ा लेकर बाबासाहेब पर हमलावर हैं।बताइए कांग्रेस बच्चों को क्या पढाना चाहती थी। सबको याद है 2012 में भी संसद में ऐसा ही हंगामा हुआ था, तब कांग्रेस की सरकार थी और आज भाजपा की सरकार है। इसलिए ही मान्यवर साहब ने एक को सांपनाथ और दूसरे को नागनाथ कहा था, यही वजह है कि हमें इस देश को इन दो दलों की जागीर नहीं बनने देना है। हमारे समाज को सम्मान सिर्फ और सिर्फ आदरणीय बहन कु. मायावती जी के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी ही दिला सकती है। जय भीम, जय भारत।

Akash Anand

52,520 views • 1 year ago

हमारा अस्सी वाला दशक सही था। डाक्टर बन जाओ या इंजीनियर! बहुत बढ़िया गणित हैं तो PO या CA ( जिसके बारे में यह कह कर डराया जाता था कि IAS तो बन सकते हो CA नहीं) उन दिनों कुछ एक बच्चे NDA या CDS में चले जाते थे। याद नहीं पड़ता कि कभी किसी से सुना हो कि IAS की तैयारी कर रहा है। राव का नाम नब्बे में सुना था जब मेरे दोस्त ने दिल्ली जाकर तैयारी की थी। नब्बे में MBA और MCA भी आ गया था और फिर शुरू हुई MBA और MCA की दुकानें! जब थोक के भाव से ग्रेजुएट निकल रहे हो और फुटकर के हिसाब से नौकरियां तो बस भगवान ही मालिक हैं। वो बात अलग है कि हम ने ना MBA किया और न MCA! हम ना बने डाक्टर और ना बने इंजीनियर! हमने ना कोशिश की IAS की और न PO और CA की! हमने चुनी थी वो नौकरी जो शराबियों और जुआरियों की नौकरी मानी जाती थी।

Manish Shrivastava

14,099 views • 8 months ago

बड़े भाई ने अपनी कमाई से पढ़ाया, अपने सपनों से बड़ा सपना दिया — देश की सेवा का। और छोटे भाई संतोष वर्मा ने वह सपना पूरा भी किया, पर केवल चार महीने में ही मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। आज बड़े भाई की आँखों में जो नमी थी। वह केवल शोक नहीं था, वह उस प्रेम का भार था, जो शब्दों में कभी समाता नहीं। एक भाई ने रास्ता दिखाया, दूसरे ने उस रास्ते पर अपना सब कुछ अर्पित कर दिया। यही है वह रिश्ता जो खून से नहीं, त्याग से बनता है। हमारे आम लोग देश को अपने बेटों के खून से सींचते हैं और राजनेता अपने बेटों को या तो राजनीति में भेजते हैं या क्रिकेट में या फिर किसी बड़े कारोबार में। 🙏अमर रहें वीर संतोष वर्मा #sikar #बलिदान Praveen Bishnoi

Tribhuvan_Official

11,329 views • 4 months ago

UP- संतकबीरनगर के बुद्धिराम ने 5 बच्चों की मां अपनी बीबी की गांव के ही एक लड़के से शादी करा दी. बुद्धिराम ने 21 साल पहले खुशी से प्रेम विवाह किया था. दोनों के 5 बच्चे है. सबसे बड़ा बेटा 18 साल का है. इसी बीच खुशी को गांव के ही अवधेश से प्रेम हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि अवधेश अब खुशी के साथ उसी के घर में मैग्जेमम समय स्पेंड करने लगा. बुद्धिराम ने खुशी को अवधेश से अलग करना चाहा तो खुशी ने उसे धमकी दी कि उसके टुकड़े ब्लूड्रम में भर दिये जायेगें. बुद्धिराम ने समय रहते बुद्धि का इस्तेमाल किया और मंदिर ले जाकर खुशी और अवधेश की शादी करा दी. नया पति मिलने से खुशी खुश है और नया पापा मिलने से बच्चे. बुद्धिराम अपनी जान बचने से खुश है. खुशी की मांग भरते अवधेश को कनखनियों से देखते बुद्धिराम की आंखों की खुशी देखी जा सकती है.

Narendra Pratap

76,137 views • 2 months ago

आज दिव्या का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया सुबह 9-10 बजे का वक्त दिया गया है…मम्मी को अब भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाई..दिव्या की हालत क्रिटिकल है ये झूठ बताकर बगल में सुला दिया है..पहली बार लग रहा है कि सच कहना कितना मुश्किल होता है…वो पोस्टमॉर्मट हाउस के फ्रीजर में है..ये सच मैं नहीं कह पाई... बैंक के सामने हत्या के समय का एक सीसीटीवी मिला है इसमें बैंक कर्मचारियों की भीड़ भाग रही है..और हत्यारा हत्या कर रहा है..बैंक में काम करने वाले हत्यारे के पास तीन-तीन रिवॉल्वर कहां से आए..किसने उस तक ये रिवॉल्वर पहुंचाईं..किसने उसे इतना जघन्य अपराध करने के लिए प्रेरित किया...हत्यारा कार नहीं चला पाता था. तो कार से आने जाने वाली थ्योरी कहां से आई..वो ऑटो से हत्या करने आया था..ऑटो से ही भागा तो कोई दूसरा इन्वॉल्व जरूर है..ऑटो वाला कौन था..कोई तो होगा जिसे सबके मर जाने के बाद फायदा हो रहा होगा पुलिस को खोजना चाहिए.. हत्यारे ने मेरा नाम स्टेटस में लिखा है कि मुझे सब पता था..हां मुझे पता था कि हत्यारा मेरी बहन के साथ क्रूरता करता था..इसलिए वो उससे अलग होना चाहती थी…ब्लिंकिट से मंगाए गए टमाटर में अगर कोई टमाटर खराब निकल जाता था तो वो उसे ये कहकर पीटता था कि तूने कैसे ब्लिंकिट किया कि टमाटर खराब निकला..बकौल मेरी बहन..हत्यारे और उसकी बहन ने मिलकर अपनी माता जी को इतना पीटा था उसकी अपनी बीमार मां का निधन हो गया था...दिव्या सिर्फ हत्यारे से अलग होना चाहती थी..मेरी बहन ने मुझे बताया था कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर के साथ भी हत्यारे की झड़प हुई थी…मेरी बहन ने बताया था कि शादी की सुहागरात पर हत्यारे ने घर के खर्चों की एक लिस्ट बनाई थी और आधा खर्च उठाने की शर्त रखी थी…जिसे मेरी बहन ने सहर्ष स्वीकार किया था…दिव्या ने पिछले एक साल से अपने हिस्से का खर्च उठाना बंद कर दिया था..साइको हत्यारे की नजर में ये चीटिंग हो सकती है…मेरी बहन ने मुझे बताया कि उसका पति साइको था…लेकिन इतना बड़ा इसका अंदाजा नहीं था.. मुझे वो चीजें पता थीं जो मेरी बहन ने मुझे बताया…इतना सब होने के बाद भी वो तीज का व्रत रखने वाली थी…हाथ में हत्यारे मानस का टैटू नहीं हटवाया था..भीतर ही भीतर वो चाहती थी सब ठीक हो जाए..साइको सुधर जाए.. मीडिया इंटस्ट्री में 2017 के पहले पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों में मैं सबसे छोटी हूं…अभी बैठी हूं तो देख रही हूं कि कुछ हमपेशा मेरी बहन की हत्या में राजनीति खोज रहे हैं… 9 वर्षों में मैंने ऐसी पत्रकारिता की है..कि जिसकी आलोचना भी करती हूं उसके सामने खड़े होकर आंख में आंख डालकर बात कर सकती हूं…नजरें नीची करने वाली पत्रकारिता मैंने कभी नहीं की…इसलिए मतभेद रखिए...मतों का अलग-अलग होना जरूरी है..मनभेद मत रखिए…आप मुझसे स्नेह करते हों.. या घृणा प्रज्ञा मिश्रा ने अपने होशो हवास में कोई अनैतिक कृत्य ना कभी किया है ना करेगी.. हत्यारे ने पहले भी दिव्या का पीछा किया था..स्ट्रेस की वजह से कुछ दिन पहले उसका एक्सीडेंट हुआ था..उसका हाथ और पैर टूट गया था..डेढ़ दो महीने बाद उसने ऑफिस जाना शुरू किया था…वो अब भी लंगड़ाकर ही चलती थी..आज जब घर से निकली थी तो लंगड़ा रही थी..दिव्या ने कितनी प्रताड़ना झेली है उसे जानने वाला हर कोई जानता है…आंखों में आंसू हैं…वक्त ये बस बातें करने का नहीं है..लेकिन आप सबको बताना जरूरी है…तीन सीसीटीवी फुटेज हैं..एक में दिव्या घर से जा रही है..दूसरी में लंगड़ाते हुए हत्यारे से लड़ रही है…

Pragya Mishra

653,809 views • 1 month ago

मां-बाप को लगता है बेटी कॉलेज पढ़ने गई है… और बेटी “फ्रीडम” के नाम पर सड़कों पर रोमांस कर रही है। घर में पापा ओवरटाइम कर रहे हैं, मां पड़ोसियों के ताने सुनकर भी मुस्कुरा रही है क्योंकि उन्हें भरोसा है अपनी बेटी पर। उन्हें लगता है वो लाइब्रेरी में होगी, किताबों के बीच अपना भविष्य बना रही होगी… लेकिन हकीकत? बॉयफ्रेंड की बाइक पर शहर की सैर। दोस्ती करना गुनाह नहीं, रिलेशनशिप रखना भी अपराध नहीं। पर झूठ बोलकर, भरोसा तोड़कर “मॉडर्न” बनने का नाटक करना — यही असली शर्म है। आज़ादी मिली है, लेकिन क्या जिम्मेदारी भी समझी है? मां-बाप की आंखों में जो सपना है, उसे तोड़कर कोई भी “कूल” नहीं बनता। सवाल सिर्फ इतना है — थोड़ा सा रोमांच बड़ा है या मां-बाप का भरोसा? सोचिए… क्योंकि जब भरोसा टूटता है, तो आवाज नहीं आती… लेकिन दर्द बहुत होता है। 🔥

Surendra Yadav

16,730 views • 7 months ago

आज मेरी आँखों में खुशी के आँसू हैं। ❤️🎓 आज मेरा बेटा निखिल सिंह ने Royal Holloway, University of London से (Business) के साथ Computer Science की पढ़ाई पूरी कर ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। उसे लंदन में ही ₹75 लाख वार्षिक वेतन का जॉब ऑफर भी मिला है। आज मुझे नवंबर 2023 का वह दिन याद आ रहा है, जब उसे लंदन के हॉस्टल में छोड़कर लौटते समय मेरी आँखें नम थीं। एक पिता के मन में हजारों चिंताएँ थीं। लेकिन आज वही बेटा अपनी मेहनत और लगन से इस मुकाम पर पहुँचा है। मुझे अपना बचपन याद आ गया। भोजपुर के छोटे से गाँव बखोरापुर में मैंने बोरा बिछाकर पढ़ाई की, ₹40 की मजदूरी से जीवन की शुरुआत की और एक सपना देखा कि मेरे बच्चों को वह हर अवसर मिले, जो मुझे नहीं मिला। आज गर्व से कह सकता हूँ कि एक किसान का बेटा अपने बेटे को लंदन में पढ़ाने का सपना पूरा कर सका। यह सिर्फ निखिल की सफलता नहीं, बल्कि हमारे पूरे परिवार के संघर्ष, मेहनत और विश्वास की जीत है। बेटा, तुमने सिर्फ डिग्री नहीं ली, बल्कि अपने पिता का अधूरा सपना भी पूरा किया है। ईश्वर तुम्हें हमेशा सफल और विनम्र बनाए रखे। ❤️🙏 #NikhilSingh #Graduation #RoyalHolloway #UniversityOfLondon #ProudFather #London #DreamsComeTrue #HardWork #Education #Bihar #Bhojpur #Bakhorapur #FarmerSon #Success #Family #Blessed #AjaySingh

Ajay singh

290,863 views • 2 months ago

जब महात्मा गांधी जी ने 'करो या मरो' का नारा दिया और सारे बड़े नेता जेलों में थे, तब देश के नौजवानों ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' को आगे बढ़ाया। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने सिर्फ अंग्रेजी हुकुमत से नहीं, बल्कि गरीबी, बेरोजगारी, छुआछूत, अन्याय और भय से मुक्ति का सपना देखा था। आजादी सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, हर भारतीय के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प था। कांग्रेस के हर प्रधानमंत्री ने इसी सोच को आगे बढ़ाया है। नेहरू जी ने कहा था- 'हमारी पीढ़ी के महानतम व्यक्ति की अभिलाषा हर व्यक्ति के आंसू पोछने की रही है। हो सकता है हम इतना कुछ न कर पाएं, लेकिन जब तक लोगों की आंखों में आंसू हैं, हमारा काम पूरा नहीं होगा।' लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नींव मजबूत की, तो इंदिरा गांधी जी ने भारत की सैन्य और स्ट्रेटेजिक शक्ति को मजबूत किया। कांग्रेस पार्टी का देश के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन आज कुछ लोग लाल किले से कहते हैं कि सब कुछ उन्होंने ही किया है। : कांग्रेस अध्यक्ष श्री Mallikarjun Kharge 📍 इंदिरा भवन, दिल्ली

Congress

29,763 views • 1 month ago

एक व्यक्ति ने अपनी मेहनत और सालों की कमाई लगाकर घर बनवाया। मकान लगभग तैयार होने पर उसने छत की ढलाई के लिए एक नामी ब्रांड का सीमेंट इस्तेमाल किया, क्योंकि उसे उस पर भरोसा था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति बिगड़ने लगी। छत में बीच से दरारें दिखने लगीं और धीरे-धीरे वे बढ़ती चली गईं। इससे घर मालिक को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा और उसका सपना भी प्रभावित हुआ। उसने संबंधित दुकान और डीलर से शिकायत की, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यहां तक कि गुणवत्ता को लेकर अलग-अलग बातें सामने आने लगीं, जिससे मामला और उलझ गया। पीड़ित का कहना है कि जिस ब्रांड और सामग्री पर भरोसा करके उसने इतना बड़ा निवेश किया था, उसी में कमी के कारण उसे नुकसान उठाना पड़ा। ऐसी घटनाएं आम उपभोक्ताओं के मन में बड़ा सवाल खड़ा करती हैं—आखिर वे किस पर भरोसा करें? घर बनाना पहले ही बेहद महंगा और मेहनत भरा काम होता है, और अगर सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ जाए तो पूरा सपना टूटने जैसा महसूस होता है। 🏠💔

Dilip Yadav

71,007 views • 3 months ago