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मेरे ज़मीर का मुझ पर कोई उधार नहीं मैं ज़ख़्म खा के तो लौटा हूँ, शर्मसार नहीं।
10 条评论

YourFellowHuman1 年前
होगी अभी सावरकर की हवा, बहुत जल्द गांधी की आंधी आएगी!!

S D1 年前
अब बंद भी करो ये रुदाली कार्यक्रम वो अब गुजरा हुआ वक़्त और वक़्फ़ हो चूका है

kuldeepdayma1 年前
@ShayarImran तेलंगाना पर कुछ सर

Damodar Prasad Jalan1 年前
बाकी सब ठीक है यह ज़मीर ही तो उधार का है!

Prathmesh Gaikwad ( Patil )1 年前
एक जिहादी जमीर की बात कर रहा है…….गजब ड्रामा है मुल्लो का

महादेव का दीवाना ( कट्टर सनातनी )1 年前
काहे रो रिया हैं, जो होना हैं वो तो होकर ही रहेगा, कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को दूसरे दर्जे का गिना था, अब औकात पता चली कांग्रेस को

Prem Kumar Jha1 年前
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय

Nabi (OBC not Yadmulla)1 年前
मेरे ज़मीर का मुझ पर कोई उधार नहीं मैं ज़लील हो के तो लौटा हूँ, फ़िर भी शर्मसार नहीं। मैं उम्मापरस्त खांग्रेसी हूँ, मुल्क का वफ़ादार नहीं ।

Ravi Kumar Jain1 年前
वाह, शानदार वक्तव्य दिया है आपने आज

meraj khan1 年前
Zindabaad bhai

