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Ana Sayfaya Dön

मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक ❤️

108,163 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

9 Yorum

BITTU SHARMA- ‏بٹو شرما profil fotoğrafı
BITTU SHARMA- ‏بٹو شرما1 yıl önce

बहुत गहरा दृश्य है. इतने उम्दा कलाकारों का जमावड़ा एक ही दृश्य में और वो राजनीती और कला जैसे गहरे विषय पर.. अद्धभुत

✋Hemant profil fotoğrafı
✋Hemant1 yıl önce

Such serious movies are no longer being made. From the 80s to the 90s, these films conveyed social messages. Since then, movies have become purely commercial, with a focus only numbers. While these films still have an audience, people now prefer larger-than-life movie

Siddharth Tripathi / SidTree profil fotoğrafı
Siddharth Tripathi / SidTree1 yıl önce

मेरी भी, ऐसे विमर्श अब फिल्मों में देखने को नहीं मिलते

Aamna profil fotoğrafı
Aamna1 yıl önce

Wow , seems so so far back .. what an era that was!! Bollywood!! Rich in content, and how !!

Umesh Thakran ( किसान पुत्र ) profil fotoğrafı
Umesh Thakran ( किसान पुत्र )1 yıl önce

बहुत ही शानदार फिल्म है,

Milind Gadagkar profil fotoğrafı
Milind Gadagkar1 yıl önce

What a lovely film !!

sandeep gupta profil fotoğrafı
sandeep gupta1 yıl önce

Those were the days Ek ruka huya faisla Jaane bhi do yaaro Buniyaad Khandaan

Manish Kaptta profil fotoğrafı
Manish Kaptta1 yıl önce

एक से एक कलाकार जैसे अपने आस पास ही जीवंत हो उठते है लगता नहीं की ये फिल्म है इतना वास्तविक अभिनय मुझे फिल्म नहीं पता देखी भी नहीं मगर ज़रूर देखना चाहुंगा

Dr Prashant Purohit profil fotoğrafı
Dr Prashant Purohit1 yıl önce

ज़बर्दस्त फ़िल्म थी ‘पार्टी’।

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रामायण में रावण की भूमिका निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी एक प्रकांड विद्वान और शिक्षाविद भी थे । उनके सगे बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी गुजराती फिल्मों के एक बेहतरीन अभिनेता रहे हैं जिन्होंने ऐतिहासिक और इतिहास पर आधारित सैकड़ों सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया है। उपेंद्र त्रिवेदी और स्नेहलता की जोड़ी पुरानी गुजराती फिल्मों में बहुत प्रचलित हुई थी और उन फिल्मों में बेहद कर्णप्रिय गाने भी होते थे जब आप अहमदाबाद से अंबाजी के तरफ जाएंगे तब हिम्मतनगर के बाद ईडर नामक एक कस्बा आता है उस ईडर कस्बे में प्रवेश करते ही ठीक रोड के किनारे एक बंगला नजर आता है जिस पर लिखा है लंकेश, यही अरविंद त्रिवेदी और उपेंद्र त्रिवेदी का पैतृक आवास है । हालांकि बाद में दोनों भाई अहमदाबाद और मुंबई दोनों जगह रहने लगे लेकिन अरविंद त्रिवेदी ने अपना बुढ़ापा अपने पैतृक मकान में ही गुजारा अरविंद त्रिवेदी जी के मुंह से आप शिव स्त्रोत सुनिए और रामायण के लिए रामानंद सागर जी के पास इतना बजट नहीं था कि वह बहुत बड़े बड़े अभिनेताओं और जाने-माने लोगों को रामायण साइन करे चुकी रामानंद सागर गुजराती और गुजराती रंगमंच तथा गुजराती फिल्मों से भी जुड़े थे इसलिए उन्होंने रामायण में गुजराती रंगमंच के कलाकारों और गुजराती फिल्मों के कलाकारों को लिया। अरुण गोविल भी गुजराती रंगमंच के कलाकार थे दीपिका चिखलिया गुजराती फिल्मों में हीरोइन थी अरविंद त्रिवेदी भी गुजराती फिल्मों में काम करते थे

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

75,556 görüntüleme • 5 ay önce