Video wird geladen...

Video konnte nicht geladen werden

Zur Startseite

मेरा बच्चा खाता नहीं है ,वज़न कम है क्या करूँ ? अपने बच्चे को खाना खिलाना कैसे सिखायें 👇🏽 1-रोज़ 6 फूड ग्रुप दें – अनाज, प्रोटीन, वसा, दूध, फल/सब्ज़ियाँ और पानी 2-परिवार संग खाना, TV/मोबाइल से बचें 3-पैकेज्ड फूड, सॉफ्ट ड्रिंक व अधिक शक्कर से परहेज़ 5 साल...

47,276 Aufrufe • vor 11 Monaten •via X (Twitter)

0 Kommentare

Keine Kommentare verfügbar

Kommentare vom Original-Post werden hier angezeigt

Ähnliche Videos

6 जून से लगातार मैं #NEET एग्जाम में विवादों, आशंकाओं व गडबड़झाले को उजागर कर रहा हूँ। कल सुप्रीमकोर्ट में PIL के निर्णय से NEET के 24 लाख बच्चों को कोई लाभ बही हुआ। मोदी सरकार व NTA ने 1,563 बच्चों की दुबारा परीक्षा कराने की आड़ में पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया। असल सवाल ये हैं👇 1. क्या NEET पेपर लीक हुआ? क्या इसकी जाँच हुई? क्या ये सही नहीं कि पटना से पेपर लीक की खबर आई? कई अख़बारों में तो ₹60 करोड़ के लेन देन की खबरें भी आई। जब पटना में FIR दर्ज हुई, तो उसका क्या हुआ? 2. 67 टॉपर कैसे हो सकते हैं, जिनके 720/720 नंबर हों? अगर जिन 1,563 बच्चों की दुबारा परीक्षा हो रही है, उनमें से 6 टॉपर बच्चे निकाल भी दें, तो भी 61 बच्चे टॉपर कैसे हो सकते हैं? 3. मार्क्स V/S रैंक का खेल क्या है? हज़ारों बच्चों के इतने ज़्यादा नंबर कैसे आए कि NEET एग्जाम का पूरा समीकरण ही बिगड़ गया? क्या इसका कारण पेपर लीक है या कुछ और? इन सब बातों की जाँच होनी चाहिए, न की लीपापोती जो मोदी सरकार कर रही है। क्या NEET एग्जाम का टेक्निकल व फॉरेंसिक ऑडिट होगा, क्योंकि तभी दूध का दूध व पानी का पानी होगा। जबाब दें, हिसाब दें। #NEET_पेपर_रद्द_करो

Randeep Singh Surjewala

36,816 Aufrufe • vor 2 Jahren

मां ने 2 मासूम बच्चों को नदी में डुबोकर मार डाला.. तीसरा लापता.. बोली - भूख से बिलखते थे, देखा नहीं जाता था.. क्या करती! UP के औरैया जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों को पानी में डुबाकर मार डाला। तीसरा लापता है। उसकी भी हत्या क़ी आशंका है। पुलिस ने मां को अरेस्ट कर लिया है। महिला का कहना था "पति क़ी मौत के बाद वह बच्चो का भरण पोषण नहीं कर पा रही थी.. भूखे बच्चे तड़पते रहते थे.. ऐसे में उसने बच्चो को मारकर उन्हे भूखा तड़पने से बचा लिया।" फफूंद थाना क्षेत्र के अटा बरौआ गांव की रहने वाली प्रियंका अपने चार बच्चों को लेकर सुबह घर से निकली…प्रियंका का पति डेढ़ साल पहले ही मर चुका था और वह अपने चचेरे देवर के साथ रहती थी… सुबह प्रियंका बच्चों को लेकर केशमपुर घाट पहुंची और उन्हें बंबा नदी में डुबोने लगी… इस घटना में 4 साल और 5 साल के दो मासूम बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई. प्रियंका ने इन शवों को नदी किनारे ही फेंक दिया… 6 साल का एक बच्चा किसी तरह बच गया. वहीं, डेढ़ साल का एक बच्चा भी प्रियंका के साथ था, जो अब लापता है। पुलिस ने प्रियंका को हिरासत में ले लिया है…शुरुआती पूछताछ में प्रियंका ने बताया कि उसने अपने बच्चों को इसलिए मार दिया क्योंकि वह उनका पालन-पोषण नहीं कर पा रही थी. प्रियंका का यह बयान सुन पुलिस भी हैरान रह गई… (TRUE STORY)

Panchjanya

28,059 Aufrufe • vor 2 Jahren

ब्लड प्रेशर (BP) को कंट्रोल करने के लिए उपाय ​उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए शरीर में सोडियम कम करना और पोटेशियम बढ़ाना जरूरी है। लहसुन (Garlic) खाली पेट लहसुन की एक कली पानी के साथ लें। इसमें 'एलिसिन' होता है जो रक्त वाहिकाओं को आराम देता है। अर्जुन की छाल यह दिल के स्वास्थ्य के लिए रामबाण है। आधा चम्मच अर्जुन की छाल के पाउडर को दूध या पानी में उबालकर चाय की तरह पिएं। धनिया और सौंफ का पानी रात भर एक चम्मच धनिया और सौंफ को पानी में भिगो दें और सुबह इसे छानकर पिएं। यह तासीर में ठंडा होता है और BP कम करने में मदद करता है। नमक कम करें भोजन में ऊपर से नमक डालना बंद करें और सेंधा नमक का प्रयोग करें। ब्लड प्यूरीफायर (खून साफ करने के लिए) उपाय ​खून में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकालने से त्वचा में चमक आती है और बीमारियां दूर रहती हैं। नीम की पत्तियां सुबह खाली पेट नीम की 2-3 कोमल पत्तियां चबाने से खून प्राकृतिक रूप से साफ होता है। (यह थोड़ा कड़वा है, पर बेहद असरदार है)। हल्दी वाला दूध हल्दी एक प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक है। रात को सोने से पहले दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर पिएं। तुलसी तुलसी के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। रोजाना 4-5 पत्तियों का सेवन करें। चुकंदर (Beetroot) चुकंदर का जूस या सलाद खून को साफ करने और नया खून बनाने (Heamoglobin) में बहुत मदद करता है। नींबू पानी सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। ​कुछ जरूरी सावधानियां पानी का भरपूर सेवन दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। यह सबसे बड़ा नेचुरल प्यूरीफायर है। योग और प्राणायाम रोजाना 15-20 मिनट 'अनुलोम-विलोम' और 'भ्रामरी' प्राणायाम करें, यह BP के लिए जादुई असर दिखाता है। तनाव कम लें: गुस्सा और चिंता ब्लड प्रेशर को तुरंत बढ़ा देते हैं। ​महत्वपूर्ण नोट यदि आपका ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा रहता है या आप किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो इन घरेलू उपायों को शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अर्जुन की छाल दिल की मांसपेशियों को मजबूत करने और धड़कन को संतुलित करने के लिए यह आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन औषधि है। आधा चम्मच पाउडर को पानी या दूध में उबालकर काढ़ा बनाकर पिएं। ओमेगा-3 फैटी एसिड यह दिल की लय को स्थिर रखने में बहुत मदद करता है। इसके लिए आप अखरोट, अलसी के बीज (Flax seeds) और चिया सीड्स अपनी डाइट में शामिल करें। मैग्नीशियम और पोटेशियम शरीर में इनकी कमी से धड़कन बिगड़ने लगती है। केला, पालक, कद्दू के बीज और बादाम खाएं। मुनक्का रात को 5-6 मुनक्के भिगोकर सुबह खाने से दिल को ताकत मिलती है। कैफीन और निकोटीन से बचें बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक या सिगरेट पीने से धड़कन अनियमित (Irregular) हो सकती है। इन्हें तुरंत कम करें। तनाव कम करें (Vagus Nerve Stimulation) गहरी सांस लेना (Deep Breathing) या 'अनुलोम-विलोम' प्राणायाम करने से दिल की लय शांत होती है। ठंडा पानी अगर अचानक धड़कन तेज हो जाए, तो चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारने से धड़कन को सामान्य होने में मदद मिलती है। Vedio ko zaror dekhe aur coment me bataye kiya vexin ke bad aap ko bhi ye taklifo ka samna karna pad raha hai kiya? 👇

noor

27,565 Aufrufe • vor 7 Monaten

प्राइमरी स्कूल इस देश का प्राण हैं. अगर कोई यह कहते हुए बंद करने की सिफारिश कर रहा कि टीचर पढ़ाते नहीं, स्कूल में बच्चे नहीं आते, सरकारी खर्च बहुत ज्यादा है, तो वह गलत कह रहा। प्राइमरी स्कूलों की बदहाली की वजह से ही प्राइवेट स्कूल मोटा रहे। अगर सरकारी स्कूल पूरी तरह से बदहाल हो जाए तो प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतर आएंगे। फिर जो दिहाड़ी मजदूर है, चना-चूरन बेचने वाले लोग हैं वह अपने बच्चों को प्राइवेट में नहीं पढ़ा पाएंगे। फिर इनकी आबादी पूरे देश में 50% से अधिक है। आप प्राइमरी की आलोचना करते हुए अक्सर अपने गांव को देखते हैं, आपका गांव संपन्न हो सकता है, कमाई के मामले में लोग आगे आ गए हों, लेकिन सुदूर किसी एरिया में जाइए। आप देखेंगे कि पढ़ाई की स्थिति अभी भी भयावह है। लोगों के पास आज भी खाने की व्यवस्था नहीं है। पढ़ाई को लेकर जागरुकता नहीं है। सरकारी टीचर किसी भी राज्य का सबसे जरूरी एसेट्स है। सारे बौद्धिक लोग हैं। राज्य में जो भी लिखा-पढ़ी वाली चीजें होती हैं उनमें आप इन्हीं की सेवा लेते हैं। आप पुलिस या फिर किसी और सर्विस विभाग से काम नहीं ले पाएंगे। आप सरकारों का शिक्षा बजट पर खर्च पता करिएगा। आपको पता चलेगा कि यह कुल बजट का 10% भी नहीं है। मिड-डे-मील पर आज भी प्रति बच्चा 5 रुपए से ज्यादा खर्च नहीं हो रहा। जबकि आपको टीचर की सैलरी ज्यादा लगती है। आप एक चीज और देखिए, जिन स्कूलों में टीचर्स या फिर वहां के ग्राम प्रधान ने अपने से पैसा लगाया, स्कूल को सजाया, बिजली, कुर्सी-मेज, पंखे और पानी की अच्छी व्यवस्था की, वहां बच्चों की संख्या बहुत अधिक मिलेगी। जबकि यह सब व्यवस्था करने का काम शिक्षक का नहीं है। जरूरी है कि स्कूलों की बेहतरी पर काम किया जाए। कुर्सी-मेज, बिजली, पीने की व्यवस्था बेहतर करना सुनिश्चित किया जाए। इंग्लिश मीडिया में तब्दील किया जाए। स्कूल को बारातघर न बनाया जाए। ताश खेलने का अड्डा न बनाया जाए। कम से कम 4 टीचर्स की व्यवस्था की जाए। तब आप देखिए, लोग कैसे अपने बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए लाइन लगाकर खड़े नजर आएंगे। यह वीडियो कुछ महीने पहले का है। लखनऊ के एक स्कूल का है। देखिए।

Rajesh Sahu

35,003 Aufrufe • vor 1 Jahr

दिल्ली में एक महिला को Blinkit से सड़ा हुआ, कीड़ों से भरा सीड मिक्स मिला। अब सवाल सीधे-सीधे जिम्मेदार संस्थाओं से उठते हैं 👇 1. ऑनलाइन फूड/ग्रोसरी कंपनियों की क्वालिटी चेक कौन कर रहा है? 2. Blinkit जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर बेचे जाने वाले पैकेज्ड फूड की थर्ड-पार्टी टेस्टिंग रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं होती? 3. अगर सड़ा हुआ और कीड़ों से भरा उत्पाद डिलीवर हो सकता है, तो FSSAI और जिला खाद्य सुरक्षा विभाग क्या मॉनिटर कर रहा है? 4. क्या इस घटना पर तुरंत सैंपलिंग, सीलिंग और जांच शुरू हुई? अगर नहीं—क्यों नहीं? 5. उपभोक्ता से पैसे लेकर घटिया और स्वास्थ्य-विरोधी प्रोडक्ट भेजना क्या एक कंपनी की “मिस्टेक” है या सीधे-सीधे आपराधिक लापरवाही? 6. Blinkit बताए कि उनके वेयरहाउस में स्टोरेज और हाइजीन स्टैंडर्ड क्या है, और उनका ऑडिट आखिरी बार कब हुआ था? 7. हर दिन लाखों लोग ऑनलाइन ग्रोसरी खरीदते हैं—अगर मॉनिटरिंग इतनी कमजोर है, तो कितने लोग रोज़ बिना जाने ऐसे ही दूषित सामान खा रहे हैं? 8. क्या सरकार एक प्लेटफ़ॉर्म-वार क्वालिटी मॉनिटरिंग रिपोर्ट जारी करेगी ताकि जनता को पता चले किस ऐप पर कितना भरोसा किया जा सकता है? 9. उपभोक्ता अधिकार मंत्रालय बताए—कितने ऐसे मामलों पर अब तक जुर्माना लगा? और कार्रवाई का असर क्यों नहीं दिखता? यह सिर्फ एक प्रोडक्ट की शिकायत नहीं , यह सिस्टम की नाकामी और उपभोक्ता की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ है।

खुरपेंची स्वास्थ्य

50,693 Aufrufe • vor 9 Monaten

भारतीय रसोई में कई ऐसे मसाले हैं जो सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत भी देते हैं। उन्हीं में से एक है — दालचीनी। मीठी-तीखी सुगंध वाली यह छोटी-सी लकड़ी जितनी सरल दिखती है, उतनी ही चमत्कारी है। आयुर्वेद में इसे हजारों वर्षों से औषधीय गुणों के लिए पहचाना गया है। इस लेख में हम जानेंगे दालचीनी के कुछ गुप्त उपयोग, जिन्हें आप अपने किचन में अपनाकर पा सकते हैं अनगिनत लाभ वो भी बिल्कुल प्राकृतिक तरीक़े से। 1. सुबह खाली पेट दालचीनी पानी एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से: * वजन नियंत्रित होता है * पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है * शरीर की सूजन कम होती है यह नुस्खा शरीर को दिनभर ऊर्जावान बनाता है। 2. डायबिटीज के रोगियों के लिए वरदान दालचीनी में मौजूद पॉलीफेनोल्स इंसुलिन की कार्यप्रणाली में सुधार करते हैं। रोज़ाना एक चुटकी दालचीनी पाउडर दही या ओट्स में मिलाकर लेने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है। यह टाइप-2 डायबिटीज़ के रोगियों के लिए प्राकृतिक सहायता सिद्ध हो सकता है। 3. कॉफी या चाय में दालचीनी का ट्विस्ट अपने दिन की शुरुआत करें दालचीनी वाली हर्बल चाय या कॉफी से। * यह शरीर को गर्मी देती है * सूजन घटाती है * तनाव कम करती है बस एक छोटी स्टिक या आधा चम्मच पाउडर पर्याप्त है। 4. वजन घटाने में सहायक दालचीनी मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और भूख को नियंत्रित रखती है। गुनगुने पानी में नींबू और शहद के साथ दालचीनी लेने से फैट बर्निंग की प्रक्रिया तेज होती है। यह पेट की चर्बी को भी कम करती है। 5. सर्दी-जुकाम में रामबाण दालचीनी में एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एक कप पानी में तुलसी, अदरक और दालचीनी उबालकर पीने से गला ठीक होता है। दालचीनी वाला गरारा गले की खराश में राहत देता है। 6. त्वचा के लिए गुप्त उपाय दालचीनी सिर्फ खाने में नहीं, चेहरे की सुंदरता बढ़ाने में भी सहायक है। शहद और दालचीनी पाउडर का पेस्ट मुंहासों पर लगाने से बैक्टीरिया मरते हैं। यह ब्लैकहेड्स हटाने और स्किन को ग्लो देने में मददगार है। > सावधानी: यह मिश्रण लगाकर 10 मिनट से अधिक न रखें। > 7. हृदय स्वास्थ्य में सहायक दालचीनी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स कोलेस्ट्रॉल कम करने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है। 8. बालों के लिए अमृत दालचीनी और नारियल तेल का मिश्रण बालों की जड़ों में मालिश करने से बाल मजबूत होते हैं। यह रक्तसंचार बढ़ाता है, जिससे बालों की ग्रोथ में सुधार होता है। 9. किचन क्लीनर के रूप में प्रयोग दालचीनी में बैक्टीरिया मारने की क्षमता होती है। आप इसका उपयोग प्राकृतिक क्लीनर के रूप में कर सकते हैं: * पानी में दालचीनी का तेल मिलाकर किचन टॉप्स या फ्रिज की सफाई करें। * यह न सिर्फ सफाई करता है, बल्कि खुशबू भी छोड़ता है। 10. कीट भगाने में असरदार दालचीनी की खुशबू कीटों को दूर रखती है। * जहां चींटियाँ आती हों, वहाँ दालचीनी पाउडर छिड़क दें। * यह एक सुरक्षित और रसायन मुक्त उपाय है। दालचीनी वह मसाला है जो स्वाद, खुशबू और स्वास्थ्य तीनों में श्रेष्ठ है। इसका प्रयोग न केवल भोजन में, बल्कि सौंदर्य, सफाई, स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। यह छोटे-छोटे उपाय न केवल हमें बीमारी से बचाते हैं, बल्कि एक प्राकृतिक जीवन शैली की ओर ले जाते हैं। दालचीनी को अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित करें लेकिन सीमित मात्रा में। अधिक सेवन से शरीर पर विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। आयुर्वेद में भी संतुलन को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।

RuchiAdarsh

28,535 Aufrufe • vor 9 Monaten

होम वर्क पूरा ना होने पर टीचर ने बच्चे को थप्पड़ लगा दिया टीचर के डर से 6 साल के मासूम बच्चे की हार्ट अटैक से मौत😢... आंध्र प्रदेश के एक स्कूल में 6 वर्षीय छात्र प्रणय तेजा की कक्षा में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि होमवर्क पूरा न करने पर उसकी शिक्षिका अनुराधा ने उसे डांटा और थप्पड़ मारा। गाल पर थप्पड़ लगने के कुछ ही सेकंड बाद बच्चा अचानक शांत होकर गिर पड़ा। शिक्षकों ने उसे बचाने की कोशिश की और King George Hospital ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती तौर पर मौत को घबराहट और सदमे से जुड़ी हृदय संबंधी घटना बताया जा रहा है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गलती किसकी थी? अपने विचार इसपर जरूर दे ................ हमारी पीढ़ी भी स्कूल में मार खाती थी। हम भी मार खाये हैं...... किसी ने scale से मारा, किसी ने कान खींचे, किसी ने पूरी class के सामने खड़ा किया… और हममें से बहुत लोग आज कहते हैं— “हम भी तो मार खाकर बड़े हुए हैं, हमें क्या हुआ?” लेकिन education का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि “बच्चा डरकर काम करे।” उद्देश्य होना चाहिए— “बच्चा समझकर सीखे।” 🧠 एक बच्चे का brain और nervous system adult जैसा नहीं होता। डर, humiliation और excessive stress बच्चे के behaviour, learning, attention और emotional development पर असर डाल सकते हैं। इसलिए discipline का मतलब physical punishment नहीं, बल्कि boundaries, communication और consistent consequences होना चाहिए। ❤️ और एक दूसरा सवाल—क्या हर स्कूल बच्चों की medical emergencies के लिए तैयार है? क्या teachers को पता है कि बच्चा अचानक बेहोश हो जाए तो क्या करना है? क्या स्कूल में first-aid, CPR training, emergency response protocol, ambulance access और nearby referral hospital की व्यवस्था है? क्योंकि कभी-कभी बच्चा बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिखाई दे सकता है, फिर भी कोई underlying medical condition हो सकती है। इसलिए किसी भी अचानक हुई मौत को केवल “डर गया था”, “heart attack था” या “थप्पड़ से हुआ” कहकर conclude करना medically सही नहीं है। Investigation + medical examination + postmortem जरूरी है। 🚨 लेकिन एक बात पर कोई investigation नहीं चाहिए— बच्चे को मारना education नहीं है। गलती पर समझाइए, parents को involve कीजिए, जरूरत हो तो counsellor की मदद लीजिए- "लेकिन हाथ मत उठाइए।" हमें ऐसी education चाहिए जहाँ बच्चा teacher से सवाल पूछने से न डरे, जहाँ गलती करना learning process का हिस्सा हो और जहाँ marks से ज्यादा mental health, physical safety और curiosity को महत्व मिले। और सबसे जरूरी— School सिर्फ पढ़ाने की जगह नहीं है। School बच्चे के लिए दूसरा घर है। अगर हम बच्चों को सुरक्षित स्कूल भी नहीं दे पाए, तो हमें खुद से पूछना होगा— हम आखिर किस तरह की education system बना रहे हैं? #StopCorporalPunishment #ChildSafety #EducationReform #SchoolSafety #ChildHealth #MentalHealth #Parenting #Neuroscience thebrainyogi

Dr Vikas I The Brain Yogi

51,655 Aufrufe • vor 1 Monat

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इसी अधिकार को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने RTE Act, 2009 बनाया, जिसमें साफ़ कहा गया है कि 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि बच्चों को शिक्षा पाने के अधिकार का व्यवहारिक लाभ मिल सके। संविधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP) का भी उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि “राज्य का यह प्रयास रहेगा कि वह शैक्षिक और आर्थिक हितों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों की विशेष सुरक्षा और प्रोत्साहन करेगा, और सामाजिक अन्याय व शोषण के रूपों से उनकी रक्षा करेगा।” साथ ही, शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। यानी केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि राज्य की कोई नीति या कानून केंद्र के कानून से टकराता है तो केंद्र का कानून सर्वोपरि होता है। अतः राज्यों के लिए RTE Act, 2009 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। विद्यालयों का विलय कर स्कूलों को 1 किमी या उससे अधिक दूर ले जाना संविधान और RTE के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। क्या यह निर्णय कमजोर वर्गों, दलितों, आदिवासियों और गरीब बच्चों की शिक्षा के अधिकार को बाधित नहीं करता? अतः यह स्पष्ट है कि स्कूलों के विलय का निर्णय 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A द्वारा सुनिश्चित मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार, 2. RTE Act, 2009 के निकटता के सिद्धांत, 3. अनुच्छेद 46 में वर्णित सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों के संरक्षण, 4. समवर्ती सूची में केंद्र के कानूनों की सर्वोपरिता के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है। हम Government of UP से माँग करते हैं: 1. इस मर्जर नीति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। 2. हर गाँव में संविधान व RTE Act के अनुसार स्थानीय स्कूल की गारंटी दी जाए। 3.शिक्षा में निजीकरण और केंद्रीकरण के बजाय जन-भागीदारी और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए। "शिक्षा कोई spreadsheet नहीं, यह जीवन का पहला अधिकार है।जिसे मर्ज नहीं किया जा सकता — और न संविधान को मूक दर्शक बनाया जा सकता है।" #SaveVillageSchools

Chandra Shekhar Aazad

11,066 Aufrufe • vor 1 Jahr

BJP से बड़प्पन की उम्मीद करना बेमानी है. और नरेंद्र मोदी से बड़ा दिल दिखाने की अपेक्षा करना बेवक़ूफ़ी संसद सत्र शुरू हुआ, नेता विपक्ष राहुल गांधी और नेता सदन नरेंद्र मोदी एक साथ स्पीकर महोदय को लेकर ऊपर पहुँचे एक नई शुरुआत की पहल ख़ुद राहुल गांधी ने पहले हाथ बढ़ा कर की. नेता प्रतिपक्ष के रूप में सदन में उनका पहला वक्तव्य बेहद उम्दा था. धीर गंभीर बात, हिंदुस्तान के लोगों के प्रतिनिधित्व की बात करते हुए - विपक्ष की आवाज़ को जगह दिये जाने की पुरज़ोर पैरवी की. यहाँ से अगर BJP चाहती तो एक अच्छी पहल हो सकती थी लेकिन छोटे मन के लोगों से बड़ी बातों की उम्मीद करना ही ग़लत है. स्पीकर ने 49 साल पहले लगी इमरजेंसी का प्रस्ताव रखा, फिर आज 27 जून को राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा लिखित अभिभाषण में भी 25 जून 1975 की इमरजेंसी का ज़िक्र किया पुराने घाव कुरेदने से क्या हासिल होगा? इमरजेंसी का निर्णय ग़लत था, इसमें कोई दोराय नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि इंदिरा जी ने ख़ुद उस गलती को माना था और लोकतांत्रिक चुनाव कराए थे. यही नहीं, इमरजेंसी से कोई वास्ता ना होने के बावजूद स्वयं राहुल गांधी ने इमरजेंसी को एक गलती बताया है और ऐसा कभी दोबारा ना हो इसीलिए वह संविधान को हर हाल में सुरक्षित रखने के किए प्रतिबद्ध हैं लेकिन अब क्योंकि छेड़ ही दिया है तो कुछ सवाल पूछ ही लिए जायें : 1) एक साथ एक ही सत्र में क़रीब 146 विपक्षी सांसदों को लोक सभा से निलंबित करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 2) विपक्षी सांसदों के माइक बंद कर देना, क्या यह एमरजेंसी नहीं है? 3) राहुल गांधी के 14 मिनट के भाषण में 11 मिनट ओम बिरला की शक्ल दिखाना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 4) 51 मिनट के राष्ट्रपति के आज के अभिभाषण में 6 बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को और 73 बार नरेंद्र मोदी को दिखाना, क्या ये इमरजेंसी नहीं है? 5) स्पीकर का ‘जय संविधान’ बोलने पर आपत्ति करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 6) जबरन काले कृषि क़ानून, CAA, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 पास कराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 7) सिर्फ़ वॉइस वोट से क़ानून को पारित कराना, लोकसभा में 35% विधेयक एक घंटे से कम समय में पारित कराना और मात्र 16% बिल को Parliamentary Standing Committee के भेजना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 8) संसद के प्रांगण से छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गाँधी और बाबासाहेब की प्रतिमाओं को बिना विपक्ष से चर्चा किये बियाबान में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 9) विधायकों की नीलामी करके चुनी हुई सरकारें गिराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 10) विपक्ष को ED, CBI, Income Tax से प्रताड़ित करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 11) चुनाव के दौरान मुख्यमंत्रियों को जेल में डालना, मुख्य विपक्षी पार्टी के बैंक खाते बंद करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 11) विपक्षी नेताओं की, न्यायाधीशों की, अफ़सरों की, अपने ख़ुद के मंत्रियों की पेगसस से जासूसी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 12) एक साल से जलते हुए मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 13) चीनी अतिक्रमण से आक्रोशित लद्दाख की अनदेखी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 14) किसानों को सवा साल तक दिल्ली की सरहद पर छोड़ देना जिसमें 750 किसानों की शहादत हो गई, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 15) किसान नरसंहार के मुख्य अभियुक्त के पिता को गृह राज्यमंत्री बनाए रखना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 16) रोज़गार की माँग करते युवाओं को पुलिस से बर्बर लाठीचार्ज कराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 17) छात्रों को प्रदर्शन करने पर जेल में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 18) पेपर पर पेपर लीक होना, परीक्षाएँ स्थगित होना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 19) 21 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट को गिरफ़्तार करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 20) पत्रकारों पर असहज सच दिखाने के लिए राष्ट्रद्रोह के मुक़दमे लगाना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 21) मीडिया को अपने बस में करने के बाद सोशल मीडिया और यूट्यूब पर शिकंजा कसने की कोशिश करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 22) सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ की सबसे बड़ी फैक्ट्री चलाने के बाद अगर किसी और का पोस्ट ठीक ना लगे तो उसे सीधे जेल में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 23) मनमाने फ़रमानों से लॉकडाउन लगाना, नोटबंदी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 24) औरतों के ख़िलाफ़ जघन्य से जघन्य अपराध हों और सरकार हर बार आरोपी को संरक्षण दे, क्या यह इमरजेंसी नहीं है?

Supriya Shrinate

431,496 Aufrufe • vor 2 Jahren

🔥 गैस सिलेंडर में आग लगे तो पानी नहीं, ये करो 5 सेकंड में जान बच जाएगी। 50% लोग घबराकर सबसे बड़ी गलती करते हैं और वो गलती जानलेवा है। इस वायरल वीडियो में साफ दिखाया गया है ❌ गलत तरीका: 05 सेकंड पर देखें जलते हुए सिलेंडर को पानी में फेंक दिया गया। नतीजा आग बुझने की जगह और भड़क रही है धुआं दोगुना हो गया। कारण LPG गैस पानी से रिएक्ट करके आग को और ऑक्सीजन देती है। पानी = पेट्रोल का काम करता है यहां। ✅ सही तरीका: 0:14 सेकंड पर देखें सर ने सिर्फ एक बाल्टी सिलेंडर पर डाल दिया। नतीजा 3 सेकंड में आग पूरी तरह शांत। कारण बाल्टी ने ऑक्सीजन की सप्लाई काट दी। ऑक्सीजन नहीं = आग नहीं। 🧯 अगर आपके घर में LPG है तो ये 3 स्टेप याद कर लो - स्क्रीनशॉट ले लो। 1. दिमाग ठंडा रखो, भागो मत घबराहट में आधे एक्सीडेंट होते हैं। 2. ऑक्सीजन बंद करो - सबसे तेज तरीका गीला कंबल, तौलिया, या मोटा कपड़ा सिलेंडर पर कसकर लपेट दो। गीला कपड़ा न मिले? खाली बाल्टी या भगोना उल्टा करके सिलेंडर को ढक दो। 3. गैस की सप्लाई बंद करो अगर रेगुलेटर के पास छोटा गैप दिख रहा है तो उंगली से नॉब दबाकर बंद कर दो। 🙏 एक कड़वी सच्चाई हर घर में सिलेंडर है, हर महीने खाना उसी पर बनता है। पर "आग लगने पर क्या करें" ये बात 10 में से 5 लोगों को नहीं पता। याद रखना आग काबू से बाहर लगे तो हीरो मत बनो। तुरंत घर से बाहर निकलो और 101 पर फायर ब्रिगेड को कॉल करो। जान है तो जहान है। शेयर करो - हो सकता है आपकी एक शेयर से किसी का आशियाना जलने से बच जाए।

Majid Khan

103,806 Aufrufe • vor 5 Monaten

प्रिय शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आप बरसते पानी में उनके सामने अपना स्वास्थ्य ख़राब न करें, जिनकी आँख का पानी मर चुका है। सच तो ये है कि भाजपा न पहले नौकरी देने के पक्ष में थी, न अब है। नयी सूची निकालने में देरी, दरअसल प्रभावित होने वाले दोनों पक्षों के साथ एक छल है। इससे चयनित होने वाले अभ्यर्थियों के साथ ही, जो निकाले जाएँगे उन सबका भी मानसिक उत्पीड़न निरंतर बढ़ रहा है। आप दोनों पक्ष ये मानकर चलें कि ये सरकार किसी के साथ भी न्याय नहीं करनेवाली। कुरेद-कुरेदकर दूसरों की कमियाँ ढूँढकर बुलडोज़र चलवाने वाले भाजपाई अपनी सरकार की इतनी बड़ी धांधली के लिए किसका घर गिरवाएंगे? आप देखियेगा ये नियुक्तियाँ या तो सरकार की तरफ़ से हीलाहवाली से लड़े जानेवाले मुक़दमों शिकार हो जाएँगी या फिर लालफ़ीताशाही का। जिनका जीवन दान-चंदे व भ्रष्टाचार के बल पर चलता हो, वो क्या जानें कि एक घर-परिवार के लिए हर महीने मिलनेवाले ईमानदारी से कमाए वेतन का क्या महत्व है। एक बार फिर निवेदन है कि आप अपने घर, परिवार, माता-पिता, बच्चों व जनता को अपने साथ लेकर ये संघर्ष करें, जिससे शायद इन हृदयहीन-असंवेदनशील भाजपाइयों में ये डर पैदा हो कि वो जहाँ जाएंगे, वहाँ उन्हें विरोध झेलना पड़ेगा, तो हो सकता है, वो कूटनीति छोड़कर सच में दोनों पक्षों को नौकरी दे पायें। यही सच्चा और सही इंसाफ़ होगा। ध्यान रखें कि भाजपा सरकार दोनों पक्षों को आमने-सामने करके, आपके आंदोलन को अंदर से कमज़ोर करने व तोड़ने की अपनी परंपरागत नीति में सफल न हो। इसलिए सलाह है कि एक नयी तरह की एकजुटता दिखाएं और सफलता पाएं! ऐसे लोगों से उम्मीद रखना बेमानी है ‘जिनकी’ आँख का मर गया पानी है आपके संघर्ष में आपके साथ! आपका अखिलेश #69हजार_शिक्षकभर्ती #69000_शिक्षक_भर्ती_आरक्षण_घोटाला

Akhilesh Yadav

275,232 Aufrufe • vor 2 Jahren

आज ये भी साबित हो गया कि असली “भर्ती रोको गैंग” हरियाणा की भाजपा सरकार है। आज के सुप्रीम कोर्ट के द्वारा “सोशियोइकोनॉमिक 5 नंबर” ख़ारिज करने का नतीजा देखें -: (I) हरियाणा की भाजपा सरकार व उसके ‘‘हेराफेरी साँठगाँठ सर्विस कमीशन’’ - HSSC के रोज बदलते ‘‘तुगलकी फरमान’’ व ‘‘भाजपा की मनमर्जी की दुकान’’ ने हरियाणा के 20 लाख से अधिक नौजवानों की जिंदगी को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। (II) आईये भर्तीवार देखेंः- 1ग्रुप डी भर्ती - इसमें कुल पद 13,657 हैं। कुल 13,50,000 अभ्यर्थी हैं। इसके लिए CET Exam की मैरिट के आधार पर चयन किया गया, जिसमें सोशो-इकोनॉमिक आधार के पाँच अंक भी जोड़े गए। करीब 11,000 युवाओं ने नौकरी ज्वाईन कर ली और 2,657 युवाओं द्वारा अभी ज्वाईनिंग रिपोर्ट देना बाकी है। क्योंकि ग्रुप डी की भर्ती में सोशो-इकोनॉमिक आधार के 5 नंबर शामिल हैं, तो अब इन सब बच्चों की नौकरियों पर बर्ख़ास्तगी की तलवार लटक गई है। सोशो-इकोनॉमिक आधार के 5 नंबरों के बगैर नया रिज़ल्ट बनाना होगा और न जाने कितने युवाओं का भविष्य अंधकार में मिल जाएगा। 2ग्रुप सी, सबग्रुप नंबर 1 व 2 – इन ग्रुपों में टेक्निकल पोस्ट JE, ड्राफ्ट्समैन आदि शामिल हैं। लगभग 10,000 से अधिक युवाओं ने 2000 पदों के लिए पेपर दिया था। इसमें CET Exam प्रिलिमिनरी क्वालिफ़ाइंग एग्जाम था, जिसका रिज़ल्ट सोशो-इकोनॉमिक के पाँच नंबरों के आधार पर बनाया गया। क्वालिफाइड बच्चों का फिर एक और एग्जाम लिया। स्वाभाविक तौर से इन बच्चों की नौकरियों पर भी अब बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। 3.ग्रुप 56 व 57 : इसमें कुल पद 12,000 थे। ग्रुप नंबर 56 में योग्यता ग्रेजुएशन व ग्रुप नंबर 57 में योग्यता 12वीं पास थी। इन ग्रुप्स का एग्जाम सोशो-इकोनॉमिक के 5 नंबर जोड़कर निकाला गया है। स्वाभाविक तौर से अब यह परीक्षा रद्द की जाएगी और लाखों युवाओं का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक जाएगा। 4. टीजीटी अध्यापक : इसमें 7,441 पद हैं। टीजीटी अध्यापक का मामला कोर्ट में पेंडिंग होने की वजह से HSSC ने दो तरह का रिजल्ट निकाला है – एक सोशो-इकोनॉमिक के 5 नंबर जोड़कर और एक उसके बगैर। अब सोशो-इकोनॉमिक के 5 नंबर कोर्ट द्वारा ख़ारिज कर दिए गए हैं। पर भाजपा सरकार के मुताबिक़ वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएगी। नतीजा साफ़ है कि यह रिजल्ट अब अधर में लटका रहेगा और बच्चों को नौकरियाँ नहीं मिल पाएंगी। साढ़े तीन साल से इसी जंजाल में भाजपा व इससे पहले की भाजपा-जजपा सरकार ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य को उलझाकर रखा है। ग्रुप डी में 13,50,000 अभ्यर्थी हैं तो ग्रुप सी में 11,00,000 अभ्यर्थी हैं, यानी कुल संख्या 20 लाख से अधिक युवाओं की है। इसके अलावा लाखों बच्चे 12वीं व ग्रेजुएशन पास कर CET Exam में बैठने का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि ग्रुप सी व ग्रुप डी की नौकरियाँ पा सकें। सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार व उसके ‘HSSC – हेरा फेरी साँठ-गाँठ सर्विस कमीशन’ ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य की भ्रूण हत्या कर दी। यह नाक़ाबिले माफ़ी अपराध है। मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा दें व HSSC बर्खास्त हो। #HSSC_बर्खास्त_करो #नायब_सैनी_इस्तीफ़ा_दो

Randeep Singh Surjewala

13,370 Aufrufe • vor 2 Jahren

आज का सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं, या सिर्फ किताबों के बोझ तले दबा रहे हैं? क्लास 1 के बच्चे के बैग में 15–20 किताबें ठूंस दी जाती हैं, मानो ज्ञान का वजन किलो में नापा जाता हो। लेकिन यही बच्चे 20 साल बाद डिग्री लेकर भी बेरोज़गारी की लाइन में खड़े नजर आते हैं। तो समस्या कहां है? समस्या यह है कि हमने शिक्षा को समझने के बजाय “दिखाने” का माध्यम बना दिया है। ज्यादा किताबें = अच्छी पढ़ाई, इस गलत धारणा ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया है। असल में बच्चे को समझ, कौशल और सोचने की क्षमता चाहिए न कि हर विषय की मोटी-मोटी किताबें। इस स्कैम में दोषी सिर्फ स्कूल नहीं हैं, बल्कि हमारे देश का पूरा शैक्षणिक सिस्टम ही दोषी हैं। प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर किताबों का कारोबार चला रहे हैं। 300–500 रुपये में आने वाली किताबों का सेट, कमीशन के खेल में 5–6 हजार तक पहुंचा दिया जाता है। और दुखद यह कि इनमें से कई किताबें सालभर खुलती तक नहीं हैं। इसके बावजूद भी न तो शिक्षा मंत्रालय के कान में जू रेंगता हैं और न ही जनपद स्तरीय पदाधिकारियों को कुछ दिखाई पड़ता है। आज हर माता-पिता मजबूर हैं – क्योंकि “अच्छी शिक्षा” के नाम पर सवाल उठाने से डरते हैं। स्कूल जानते हैं कि यही डर उनका सबसे बड़ा बिज़नेस मॉडल है। और इसी डर व बिजनेस मॉडल के बीच में हम बच्चों को “भविष्य” देने के लिए आज ही उनका बचपन और सोचने की आज़ादी छीन रहे हैं। हम सिर्फ किताबों का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन समझ और कौशल से बच्चों को बहुत दूर कर रहे हैं। ~ साभार: NCIB Headquarters

NCIB Headquarters

10,855 Aufrufe • vor 6 Monaten

⚠️ अगर आपके शहर पर Nuclear Attack हो जाए तो क्या करेंगे⁉️ एक पल में सब कुछ बदल सकता है — घर, लोग, सपने… सब राख में बदल सकता है। लेकिन सच ये है कि सही जानकारी आपकी जान बचा सकती है। Nuclear Explosion सिर्फ विस्फोट नहीं होता, उसके बाद आता है सबसे खतरनाक दौर — रेडिएशन फॉलआउट ☢️ यहाँ जानिए क्या करना है 👇 💥 1. धमाके के तुरंत बाद क्या करें? तेज सफेद रोशनी दिखे तो उसे सीधे मत देखें — इससे स्थायी अंधापन हो सकता है। तुरंत जमीन पर लेट जाएँ। आँखें और कान बंद करें। चेहरे को कपड़े से ढक लें। यह आपकी पहली सुरक्षा है। 🏢 2. कहाँ शरण लें? सबसे सुरक्षित जगह: मेट्रो स्टेशन 🚇 बेसमेंट अंडरग्राउंड पार्किंग 👉 जमीन के नीचे रहना फॉलआउट से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। अगर बाहर शेल्टर न मिले तो: घर की सभी खिड़कियाँ और दरवाज़े बंद करें छोटी से छोटी दरार भी टेप, कपड़े या गत्ते से सील करें हवा का रास्ता बिल्कुल न छोड़ें 💧 3. पानी और भोजन की तैयारी अटैक की खबर मिलते ही बाल्टी, बोतल, ड्रम में पानी भर लें बाद में नल का पानी रेडिएशन से दूषित हो सकता है सिर्फ पहले से स्टोर किया पानी ही पिएँ 🍪 खाने के लिए रखें: बिस्किट ड्राई फ्रूट्स पैकेज्ड फूड ऐसा खाना जो बिना पकाए खाया जा सके 🚿 4. अगर बाहर एक्सपोज हो गए हों अंदर आते ही कपड़े उतारकर पॉलीथिन में सील करें साबुन और स्टोर किए हुए पानी से अच्छी तरह नहाएँ नल का पानी उपयोग न करें ⏳ 5. सबसे खतरनाक समय पहले 24 घंटे बेहद खतरनाक होते हैं। इस दौरान बाहर बिल्कुल न निकलें ❌ अगर कोई आधिकारिक निर्देश मिले तो उसका पालन करें यदि सूचना न मिले तो कम से कम 72 घंटे तक शेल्टर में रहें तीन दिन सही तरीके से गुजार लिए — तो बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। 📱 6. टेक्नोलॉजी की तैयारी न्यूक्लियर अटैक के बाद EMP (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स) आ सकता है जो इलेक्ट्रॉनिक्स खराब कर सकता है। एक पुराना फोन पावर बैंक वॉकी-टॉकी इनको एल्युमिनियम फॉयल में लपेटकर स्टील बॉक्स में रखें (अस्थायी सुरक्षा के लिए)। 🧠 सबसे जरूरी — घबराएँ नहीं पैनिक आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है। न्यूक्लियर अटैक एक टाइम गेम है — जो जितना शांत रहेगा, उसके बचने के चांस उतने ज्यादा होंगे। 🤝 ये जानकारी सिर्फ आपके लिए नहीं है। आपके परिवार, दोस्तों और समाज के लिए है। अगर एक शेयर से किसी माँ का बच्चा बच सकता है, किसी पिता की उम्मीद लौट सकती है, किसी बहन का भाई घर वापस आ सकता है । तो इसे जरूर साझा करें। ❤️ सुरक्षा ही असली इंसानियत है। अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों को जागरूक करना ही असली इंसानियत है। 🤝❤️ गृहमंत्री कार्यालय, HMO India PMO India HinduJagrutiOrg Anand Ranganathan Ashwini Upadhyay Vishnu Shankar Jain

अखण्ड भारत संकल्प

39,098 Aufrufe • vor 7 Monaten

खून सि नि दिलोक बंधन मेरि सरूली कुछ रिश्ते जन्म जन्मांतर से भी परे होते हैं। ये सरस्वती है। मेरे पिता के बड़े भाई की बेटी। #उत्तराखंड के #पिथौरागढ़ ज़िले में गंगोलीहाट के पास नाग में रहती है। प्यार से हम इसे सरूली और पुतली भी कहते हैं। हम दोनों तक़रीबन एक ही उम्र के हैं , मैं 7-8 महीने बड़ा लेकिन हम दोनों एक दूसरे के पैर छूते हैं और बचपन से ही ( शायद 2-3 साल की उम्र से ही ) हम दोनों का एक-दूसरे के प्रति ऐसा लगाव है कि सरूली मेरे लिए कुछ भी कर सकती है और मैं सरूली के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। पहाड़ की बेटियों और पत्नियों की तरह सरूली ने भी इस जीवन में बहुत कुछ देखा है और सहा है। बचपन में ही पिता को खो दिया। बच्चे जब बहुत छोटे थे तो पति को खो दिया।लेकिन सरूली की ज़िंदादिली , हंसी और प्यार में कोई कमी नहीं आई और विनोद दा को तो देखते ही उसे लगता है कि उसने सब कुछ पा लिया। उसका विनोद दा भी हमेशा यही महसूस करता है। अपने दम पर पुतली ने चारों बच्चों को पढ़ाया लिखाया। बड़ा बेटा Coast Guard मेँ है। बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है। सबसे छोटा बेटा CDS की तैयारी कर रहा है और छोटी बेटी MSc Zoology करने के बाद स्कूल में पढ़ा रही है। इस बार बसंत पंचमी के दिन जब मैं सरूली से मिला तो आलू के गुटके , पूड़ी , खीर , खजूरें , देसी घी और बचपन के बहुत सारे क़िस्से पहले से मेरा इंतज़ार कर रहे थे। जीवन में इतना प्यार मिलता रहे , पुराने रिश्ते सहेजे रहें - और क्या ही चाहिए ❤️ कितना आत्मिक था अपनी पुतली से मिलना - मैं बयां ही नहीं कर सकता।

Vinod Kapri

16,795 Aufrufe • vor 8 Monaten

मैं श्री महिपाल ढाँडा की इस बात से तो सहमत हूँ कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, हमें इस पर गर्व है और अगर किसी को अंग्रेज़ी नहीं आती, तो इसमें कोई शर्म या दिक्कत की बात नहीं है। पर बतौर हरियाणा के शिक्षा मंत्री के उनकी बात ये सही नहीं है कि हमारे युवाओं, हमारी अगली पीढ़ियों को हिंदी के साथ अंग्रेज़ी सीखने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार तो हम उन्हें दुनिया भर में आगे बढ़ने से वंचित कर देंगे। अंग्रेज़ी जानने और सीखने में न हिचक होनी चाहिए और न ही इसका अनावश्यक विरोध करने की आवश्यकता है। अंग्रेज़ी दुनिया भर में, ख़ास तौर से दक्षिण भारत में, एक ‘लिंक लैंग्वेज’ है। अंग्रेज़ी जानने से रोज़गार के साथ साथ तकनीक व विज्ञान के अनगिनत दरवाज़े खुलते हैं, संभावनें बढ़ जाती हैं। मैं तीन उदाहरण दूँगा-: 1. हरियाणा में नौकरी न मिलने से रोज़ी रोटी की तलाश में हरियाणा के लाखों लड़के-लड़कियां विदेशों में चले गए हैं और वहाँ अंग्रेज़ी की कमज़ोरी रोज़ उन्हें खलती है। अगर हमने उन्हें हिंदी के साथ साथ अंग्रेज़ी भी सिखाई होती तो उन्हें नये सिरे से सीखना नहीं पड़ता। यही स्तिथि हरियाणा के उन बच्चों की भी है जो लाखों की संख्या में विदेश पढ़ने जा रहे हैं । 2. गुरुग्राम में ही दिल्ली और देश से दस लाख से अधिक लोग काम करते हैं और इनमें से अधिकतर हरियाणा से बाहर से हैं। कारण - काल सेंटर हो या सॉफ्टवेर कंपनी, सबमें ही फ़्लूएंट अंग्रेज़ी जानना नौकरी पाने के लिए अनिवार्य है। अगर हरियाणा के युवा, जो बहुत गुणी हैं, अच्छे से अंग्रेज़ी में निपुण हों तो उन्हें अपने प्रांत में बेहतरीन रोज़गार में मदद मिलेगी। अच्छे रोज़गार का यही मापदंड पुणे, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवंतापुरम की IT, सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी कंपनियों में भी है। 3. इंटरनेट, इथरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, सोलर व हाइड्रोजन रेवोलुशन के युग में पूरी दुनिया तेज़ी से बदल रही है। ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन ही भविष्य की कुंजी है। इन सबके लिए भी लिंक लैंग्वेज अंग्रेज़ी है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने युवाओं को हिंदी के साथ साथ अंग्रेज़ी में भी ट्रेन करें। यह प्रदेश के लिए भी जरूरी है और युवाओं के भविष्य के लिये भी। उम्मीद है इसे अलीचना के तौर पर नहीं बल्कि सार्थक सुझाव के तौर पर देख, जरूरी दुरस्ती के कदम उठायेंगे।

Randeep Singh Surjewala

12,320 Aufrufe • vor 1 Jahr

खाड़ी में युद्ध हो रहा है, मगर मोदी सरकार को लफ़्फ़ाज़ी से ही फुर्सत नहीं। बेचारी जनता महंगाई की मार झेल रही है। ▪️आज 1 अप्रैल से हिंदुस्तान में तमाम चीज़ों के दाम बेतहाशा बढ़ाये गए • कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम ₹218 बढ़ाये गए • प्रीमियम पेट्रोल के दाम ₹11/लीटर बढ़ाये गए • प्रीमियम डीजल ₹1.5/लीटर महंगा हुआ • टोल टैक्स 10% महंगा हुआ • FastTag पास के दाम ₹75⁠⁠ बढ़ाये गए • 900 दवाओं के दाम 10% बढ़ाये गए: बुखार, ल‍िवर, क‍िडनी, BP, शुगर की दवाएं शामिल • ₹5 का बिस्किट अब ₹6 में बिकेगा • ₹30 की ब्रेड अब ₹35 में बिकेगी • ₹100 की चप्पल अब ₹120 में • पहले भी LPG गैस, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाये गए हैं 👉वहीं दुनिया के तमाम देशों ने अपने लोगों को राहत दी है ▪️ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने • 3 महीने के लिए पेट्रोल 26 सेंट सस्ता किया • Excise duty आधी करके सीधा फायदा जनता को दिया है • ट्रक वालों के लिए road user charge फ्री कर दिया है, जिससे ट्रांसपोर्ट होने वाली चीज़ें जैसे दूध, फल, सब्ज़ी, अंडे, मीट महंगा ना हो ▪️ब्रिटेन की सरकार ने • हर परिवार को बिजली बिल पर 100 पाउंड की छूट दी है 👉जब भी दिक्कतों और महंगाई की बात करो तो चरणचुंबक पाकिस्तान और नेपाल जैसे छोटे देशों के बुरे हाल का हवाला देने लगते हैं - हम अपनी तुलना ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया से करेंगे या टुच्चे पाकिस्तान से? 👉मोदी सरकार की कोई ज़िम्मेदारी है या नहीं? या लोगों को उनके हाल पर छोड़कर महामानव बस प्रचार करते फिरेंगे? 👉लोगों को राहत देना सरकार का काम है. कब तक झुनझुना बजा कर जुमले फेंकते रहेंगे? कुछ सीखिये उन देशों से जो अपने लोगों को प्राथमिकता देते हैं - आपकी तरह उनको उनके हाल पर नहीं छोड़ देते : AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी

Congress

14,915 Aufrufe • vor 6 Monaten

#हरियाणा_सरकार और #HPSC बहुत खतरनाक ट्रेंड अपना रहे हैं ~ Nayab Saini 1- हरियाणा GK से कोई प्रश्न न पूछना 2- हर भर्ती में दी गयी पोस्ट्स में से लगभग 30%-40% INFACT कभी कभार तो 50% से भी ज़्यादा सीट खाली छोड़ देना 3- हरियाणा से बाहर के बच्चों का भारी मात्रा में चयन / हरियाणा के बच्चों के लियर चयन प्रक्रिया में कोई भी प्राथमिकता न होना (जैसे अन्य राज्य देते हैं अपने राज्य के बच्चों के लिए). 4- केटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए SAME पैमाने! 5- WRITTEN का एक तरीके से नाटक ही करना क्यूंकि लगभग सारे सिलेक्शन इंटरव्यू के आधार पर ही हैं ! यह सब हवा में नहीं तथ्यों के आधार पर है - अभी हाल ही में आये #AMO के रिजल्ट से समझाना चाहूंगी - HPSC और हरियाणा सरकार ने ठान रखी है कि #हरियाणा_के_युवाओं_की_अच्छे_से_बेइज़्ज़ती करनी है और वो हर रिजल्ट के साथ करते भी हैँ यह खाली सीट छोड़कर !! 12 साल बाद हुए AMO के पेपर में भी इन्हे योग्य बच्चे नहीं मिले पोस्ट के लिए --- इसलिए reserved तक की सीट खाली !! और चमत्कार देखो, यही योग्य बच्चे इन्हे #HKRN के माध्यम से जॉब देने में मिल जाते हैँ ! और हर बार हरियाणा से बाहर से भी !! इस रिजल्ट में भी बहुत से बच्चे हरियाणा से बाहर से ही हैँ --- हमारे युवा बहुत अच्छी संख्या में #IAS में सेलेक्ट होते हैँ हर साल~~ लेकिन HPSC के exam में नहीं हो पाते -- क्यों ??!! यही तो तगड़ी प्लानिंग है ~~ अपने वाले ग्रुप D में लग कर खुश हैँ, वोट देके सरकार बनवा रहे हैँ तो अधिकारी लगाने ही क्यों !! हमारे CM Nayab Saini जी भी खुश मालूम पड़ते हैँ क्यूंकि वे कभी इस संदर्भ में न कोई टिप्पणी करते हैँ न दखलअंदाज़ी ..infact जवाब देने की बजाए मुझ जैसे सवाल करने वालों को हँसकर भर्ती रोको गैंग कहकर टाल देते हैँ -- यही tactics है -- जवाब मत दो -- पर्सनल कटाक्ष कर दो, मज़ाक बना दो, जनता का ध्यान हटवा दो और फिर बड़ी बड़ी बातें कर दो !! #भर्ती_बेचो_गैंग सक्रिय है --- बेइज़्ज़ती हरियाणवी युवा और टैलेंट की हो रही हैँ CM साहब की थोड़े ना !! हैँ न CM साहब ??!!! सादर🙏 #श्वेता_ढुल

Shweta Dhull

15,544 Aufrufe • vor 1 Jahr

अभी कुछ दिन पहले 18 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दावा किया था कि “अपराधियों को अब 24 से 48 घंटों के भीतर दबोच लिया जाता है।” लेकिन वाराणसी की यह घटना मुख्यमंत्री जी के दावे की पूरी तरह पोल खोल देती है। यह मामला कोई नया नहीं है — सामुहिक बलात्कार यह घटना साल भर पहले हुई थी, लेकिन आज तक पीड़िता को न्याय नहीं मिला। 7 नामजद आरोपियों में से 5 अब भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। यह साफ़ दिखाता है कि अपराधियों को सत्ता-प्रशासन का संरक्षण हासिल है और सरकार के दावे महज़ दिखावा हैं। सबसे शर्मनाक यह है कि यह घटना प्रधानमंत्री Narendra Modi जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की है। यहाँ एक सामुहिक बलात्कार पीड़िता को न इंसाफ़ मिला, न स्वास्थ्य सुविधा। प्रसव पीड़ा के दौरान परिवार ने ऑनलाइन नंबर पर कॉल किया, थाने में भी गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद नहीं आई। आख़िरकार मजबूरी में पिता और रिश्तेदार उसे ऑटो में चौबेपुर से वाराणसी ले आए। रास्ते में ही उसने बेटी को जन्म दिया और सड़क पर लोगों से मदद माँगनी पड़ी। कई महीने थाने के चक्कर लगाने के बाद पुलिस ने केस लिखा। साल भर बीत जाने के बावजूद सिर्फ़ 2 आरोपी जेल में हैं और 5 अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस परिवार को धमकाती है कि “मीडिया को बताओगी तो थाने क्यों आती हो?” मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, मेरा सवाल है — क्या बेटी को सिर्फ़ गरीब होने की वजह से न्याय नहीं मिल रहा है? Government of UP से हमारी माँगें हैं — 1. गैंगरेप के सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी हो। 2. मुक़दमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को कठोर सज़ा दी जाए। 3. पीड़िता और उसकी बेटी की सुरक्षा व शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए। 4. लापरवाह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्यवाही हो। यह घटना साबित करती है कि उत्तर प्रदेश में न कानून का डर है, न महिलाओं की सुरक्षा, न गरीब की सुनवाई। अगर मुख्यमंत्री जी के दावे सही होते तो साल भर पहले हुई इस घटना के आरोपी अब तक जेल में होते और प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सड़क पर प्रसव करने जैसी शर्मनाक स्थिति कभी पैदा न होती। CM Office, GoUP MyGovIndia PMO India

Chandra Shekhar Aazad

30,773 Aufrufe • vor 1 Jahr