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मार्केट में नया सुपरस्टार टाइल मिस्त्री! जो मेरे हिसाब से ₹1,72,000/- की चप्पल पहनकर टाइल लगाता है! 😁 अगर चाहिए स्टाइलिश टाइल्स, तो तुरंत संपर्क करें - राहुल गाँधी पोता फ़िरोज़ ख़ान अकबर रोड वाले! 🤣 ऐसा मौका और मिस्त्री दोबारा नहीं मिलेगा!

383,910 views • 2 years ago •via X (Twitter)

9 Comments

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Naveen Gurjar2 years ago

अपने साहब के भी शूट देख ले एक बार दूसरों की तो चप्पल भी चाटता घूमता है 😂🤣

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Anuradha Mishra (Modi's Family)2 years ago

ये सब कर के यह अपने राजा बाबु के किरदार बढ़ा रहें हैं और कुछ नहीं, जनता भी समझती है कि सिर्फ कैमरा चालू होता है और ये ड्रामा शुरू हो जाता है, उस के बाद कुछ नहीं!

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TravellerOnBoard2 years ago

Rabbit जी से मेरा एक मासूम सवाल, बालक बुद्धि अच्छा या बैल बुद्धि??? 😄

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विवेक मुरलीधर नाकाडे2 years ago

पुराना है यह...

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*Sanjeev*2 years ago

इस बेशर्म आदमी पर मानहानि का मुकदमा करिये, वरना ये मोदी का तोता बोलता ही जायेगा जैसे गाय पूँछ उठाती है तो गोबर ही करती गाना नहीं गाती वैसे ही ये राजनीतिक हिन्दू सिर्फ गंदा बोल सकता अपमान कर सकता बदले मे अपमान ही रोज झेलता टीवी पर रोज रेला जाता है विपक्षी प्रवक्ता इसका रोज संबित पात्रा करते हैँ 😄😄

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विवेक मुरलीधर नाकाडे2 years ago

क्या बात है....

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pankaj singh chhetri2 years ago

😂😂😂😂

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Prataprao PingaleINC2 years ago

#चौकीदार_चोर_है #अड़ानी_का_नौकर

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ManojSharma2 years ago

यही हुनर को देखकर बीजेपी ने राज्यसभा में भेजा हैं भाषा देखिए इनकी गरीब छोटे-छोटे काम करने वाले लोगों के प्रति नफ़रत दिखाई देती हैं

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🚨 BREAKING: देश में एक नया नारा गूंज रहा है—"हिसाब दीजिए!" अब सिर्फ़ वादे नहीं… अब सिर्फ़ भाषण नहीं… अब सिर्फ़ नारों से काम नहीं चलेगा… अब सवालों का जवाब चाहिए। अब काम का हिसाब चाहिए। "हिसाब दीजिए" किसी एक व्यक्ति, दल या विचारधारा का नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग का संदेश है। लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा अधिकार है—सवाल पूछना। और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है—जवाब देना। क्या आपको लगता है कि "हिसाब दीजिए" आने वाले समय का सबसे बड़ा जननारा बन सकता है? अपनी राय कमेंट में लिखिए और अगर आप मानते हैं कि लोकतंत्र में जवाबदेही ज़रूरी है, तो इस पोस्ट को रीपोस्ट कीजिए। #हिसाब_दीजिए #HisaabDo #Accountability #Democracy #India #YouthVoice #Trending #Viral

Shambhu Patwa Dighwara wala

26,168 views • 5 days ago

एक व्यक्ति का आरोप है कि Care Health Insurance ने यह कहकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया कि आप 6–7 बार क्लेम ले चुके हैं , इसलिए अब आपका क्लेम नहीं मिलेगा। सवाल ये है कि 👇 क्या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लिमिट के हिसाब से चलती है या कंपनी के मूड के हिसाब से? क्या ज्यादा बीमार पड़ जाना अब पॉलिसी की शर्तों के खिलाफ है? क्या प्रीमियम समय पर भरना ग्राहक की जिम्मेदारी है और क्लेम देना कंपनी की मर्जी? अगर पॉलिसी डॉक्युमेंट में 6–7 क्लेम के बाद रिजेक्शन लिखा नहीं है, तो यह नया नियम कब और किसने बनाया? क्या इंश्योरेंस अब सुरक्षा नहीं, सिर्फ कागजी भरोसा बनकर रह गया है? जब जरूरत पड़े तो रिजेक्ट और जब प्रीमियम लेना हो तो तुरंत एक्सेप्ट , क्या यही नया बिजनेस मॉडल है?

खुरपेंची स्वास्थ्य

17,610 views • 5 months ago

सरकार को तुरंत प्रभाव से अधीनस्थ भर्ती बोर्ड को भंग कर देना चाहिए Bhajanlal Sharma CMO Rajasthan और इसका पूर्णगठन किया जाये सभी इसकी कमियों को दूर करते हुए इसके वर्तमान अध्यक्ष और सचिव को भर्ती प्रक्रियाओं की बेसिक समझ ही नहीं है ये ऐसा झुंड है जो केवल सोशल मीडिया पर बिजी है जबकि 1.इनके यहाँ कोई एक्सपर्ट्स कमिटी नहीं है अगर होती तो #JRA23 #IA7 नहीं होता और न अब #LDC में सिलेबस से बाहर सवाल 2.इन्होंने सवाल डिलीट का खेल चला रखा है जो स्टूडेंट्स के अवसर की समानता के मूल अधिकार को ख़त्म कर रहा है 3.इनकी जवाब सेंसिबल नहीं होते 4.मनमाना तरीक़ा अपनाया जा रहा है स्टूडेंट्स में ये विश्वास खो चुके है तो सरकार तुरंत संज्ञान ले सरकार भी इन स्थितियों की ज़िम्मेदार नज़र आती है केवल भाषण और बातें वादे हो रहे है प्रयास नहीं RPSC का वादा किया था वो तो संविधान की बनाई संस्था है उसमें भी सुधार करो पर RSSB तो सरकार का बनाया है उसका तो सुधार हो तुरंत प्रभाव से आज ही अभी #rssb_भर्तियों_पर_रहम_करें #RSSB_का_पुनर्गठन_हो #RSSB_भंग_हो

me_jitender

36,974 views • 2 years ago

PCC मुख्यालय में ओबीसी विभाग के पदाधिकारियों की बैठक के बाद मेरे विचार - डॉ जय हिन्द जी ने बताया कि क्या एजेंडा है राहुल गाँधी जी का और एजेंडा देशवासियों को मालूम है, जिस रूप में खुले रूप में पार्लियामेंट के अंदर भी और बाहर भी बोल रहे है, सामाजिक न्याय। सामाजिक न्याय मैं समझता हूँ मेरी दृष्टि के अंदर जो राहुल गाँधी का एजेंडा है, जो राहुल गाँधी जी की सोच है वो प्रत्येक देशवासी की होनी चाहिए, तभी देश मजबूत बनेगा। विश्वगुरु बनने की बात हम करते हैं। विश्वगुरु तब बनेगा तब सभी जाति, सभी धर्म के लोग, वो एकजुट रहेंगे और एकजुट तब रहेंगे जब सामाजिक न्याय मिलेगा। अगर जाति के आधार पर भेदभाव होगा, ऊँच-नीच होगी, छुआ-छूत होगी। तो जब देश के अंदर छुआ-छूत भी है जातिगत भेदभाव भी है, भागीदारी है ही नहीं, जुरिस्टिक में नहीं है, मीडिया में नहीं है, इंडस्ट्रीज़ में नहीं है कही नही है, तो फिर विश्वगुरु कैसे बनेगा? विश्वगुरु ऐसे नही बनता है, विश्वगुरु बनने के लिए पूरा मुल्क पहले एकजुट रहे, जिसका राहुल गाँधी जी ने आहावन किया है और आप देखेंगे की सामाजिक न्याय की लड़ाई जो है ये लोगों के जेहेन में बैठ रही है, की अन्याय, अन्याय किसी के साथ न होन चाहिए चाहे वो कोई भी जाती का हो कोई भी धर्म का हो और मैं उम्मीद करता हूँ की जीस प्रकार का इन्होंने एजेंडा बना रखा है बीजेपी ने धर्म के नाम पे राजनीति करना और वो तमाम, इस कैंपेन के बाद में। कैंपेन के बाद में हर व्यक्ति समझ जाएगा। ये धर्म के नाम पर हमें भड़का रहे हैं। असली रास्ता राहुल गाँधी का है, जो न्याय का रास्ता है, जो न्याय का रास्ता है। अगर हमें देश को आगे बढ़ाना है। ओबीसी को एससी एससी को गरीबों को गरीब कोई कॉम का हो, उसके लिए अच्छी स्कीमें बने, ये सोच राहुल गाँधी की है। ये सोच राहुल गाँधी की है तब जाके ये मुल्क जो है विश्वगुरु बनने का कभी सपना देख सकता है। वरना जो अभी ऑपरेशन सिंदूर के बादमें मालूम पड़ा की हमारे पड़ोसी मुल्क भी हमारे साथ नहीं आए। दुनिया का कोई मुल्क हिंदुस्तान के साथ खड़ा नहीं रहा है। ये प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए भी एनडीए गवर्नमेंट के लिए सोचने की बात है। कि पाकिस्तान के साथ में तो चाइना हो गया, तुर्की हो गया और एक दो मुल्क हो गए हमारा साथ में कोई मुल्क क्यों नहीं आया दुनिया का? अमेरिका को तो आप छोड़ो रशिया भी नहीं आया, जो हमारा दोस्त था वो भी नहीं आया तो बहुत ही स्थिति ऐसी बन गई है। दुनिया के मुल्क एक भी साथ नहीं है और दुनिया जो है वो दुनिया के विश्वगुरु बन रहे है, पूरी तरह सरकार एक्सपोज़ हो गयी है, अब राहुल गाँधी का जो रास्ता है उसको अपना के ही मैं समझता हूँ, हम सामाजिक न्याय दिला सकते है जनता को। और वो दिलाना आवश्यक है देश के हित में है देश तभी एक जुट रहेगा। एक रहेगा, अखंड रहेगा तब सब को सामाजिक न्याय मिलेगा। धन्यवाद।

Ashok Gehlot

12,908 views • 1 year ago

माननीय विधायक महोदय कुलदीप धनकड़ जी आप राजनीति के लिए अपने संस्कार भी भूल गए। मेरे दिवंगत पिताजी के लिए इतने हल्के शब्दों का उपयोग, क्या पार्टी आपको यही संस्कार सिखाती है। मैंने तो जनभावनाओं को उठाया था। इसमें मैंने क्या ग़लत बोल दिया, मैंने तो उसमे आपके परिजनों का नाम नहीं लिया था क्योंकि मेरे परिवार और पार्टी ने मुझे ऐसे संस्कार नहीं दिए। क्या लोकतंत्र में ग़लत बात का विरोध करना ग़लत है ? मैंने तो ये कहा था की ये गोदामों की ज़मीन पावटा की जनता की संपति है इसको नहीं बेचना चाहिए। क्योंकि पावटा क़स्बे में वैसे ही सरकारी भवनों के लिए जगह नहीं है तो आने वाले समय में इस भूमि में अनेक सरकारी कार्यालय बन सकते है। क्या ये माँग करना जायज़ नहीं है। मैंने कब कहा की ये मेरे बाप की ज़मीन है। मैंने तो जनता की संपति बताया था, हाँ आपको एक बात बताना चाहता हूँ की जो शब्द आपने मेरे दिवंगत पिताजी के लिए बोले है वो मुझे भी बोलने आते है लेकिन मेरे संस्कार मुझे ऐसे हल्के शब्दों के लिए अनुमति नहीं देते। जनता ने मुझे विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है इसलिए मेरा धर्म बनता है की अगर सत्तापक्ष कोई ग़लत निर्णय करे तो मैं उसका विरोध करूँ। और हाँ आपने बोला है की मैंने काम नहीं किए है क्या ऐसे, तो मैंने तो मेरे कार्यकाल में एक भी सार्वजनिक संपति नहीं बेची। और हाँ आप जनता को सार्वजनिक रूप से ये बताए की आप और आपकी सरकार इस ज़मीन को क्यो बेचना चाहती है। जनता को ये पूछने का अधिकार है। आप पावटा में सर्वदलीय सभा बुलाओ और जनता से राय करो की ये ज़मीन बेचनी चाहिए या नहीं। आप और आपकी सरकार जनता से बड़े नहीं हो। लोकतंत्र में जनता ही मालिक है। सरकार जनता की मालिक नहीं है बल्कि जनता सरकार की मालिक है।सत्ता का इतना अहंकार ठीक नहीं है विधायक महोदय, सत्ताये तो आती जाती रहती है लेकिन अपने परिवार के संस्कार मत भूलो, आप जिंदगी भर इस पद पर नहीं रहोगे।

Indraj Gurjar

19,673 views • 11 months ago

पिछले दिनों जिस तरह अशोक गहलोत ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिस तरह से वो बोले उसकी जरूरत नहीं थी... अब गांधी फैमिली को राजस्थान में दोनों में से किसी को चुनना होगा! राहुल गांधी कांग्रेस के ओल्ड गार्ड को क्लियर मैसेज दे चुके हैं चाहे वो कमलनाथ हों या अशोक गहलोत की अब आप घर बैठिये....अगले दो से तीन महीनों में आप देखोगे सचिन पायलट राजस्थान के पीसीसी चीफ बना दिए जाएंगे। राहुल गांधी को पता था मीनाक्षी नटराजन नहीं जीतेंगी लेकिन वो कमलनाथ की जगह उनके साथ गए कई पूर्व मुख्यमंत्रीयों(गहलोत और कमलनाथ)ने उनसे कहा कि अगर हम राज्यसभा जाते हैं तो टाइप 8 बंगला नियम के तहत 24 अकबर रोड हमें मिल सकता है लेकिन राहुल गांधी ने कहा 24 अकबर रोड जाता है तो जाने दो..! सचिन पायलट को काफी पहले से प्रोमिस किया गया था अब समय आ गया है कि उन्हें 2028 में राजस्थान का चेहरा घोषित कर देना चाहिए। Sachin Pilot

Jeetu Besla

26,586 views • 1 month ago

लवजेहाद का नया तोड़..महाकाली ! वेस्ट यूपी में BJP महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री डॉ उदिता त्यागी लवजेहाद के खिलाफ "महाकाली वाहिनी" लेकर आयी है. बेटियां समय से शादी करें और हिंदू महिलाओं 4 बच्चे पैदा करें, यह आह्वान किया है. श्रीमती त्यागी ने 3 बार पीएचडी की है. पत्रकार- आपने कहा हिंदू 4 बच्चे पैदा करे तो क्या लालू यादव आपके आइडियल हो सकते है, उन्होने 9 बच्चे पैदा किये है? डॉ उदिता त्यागी- 9 बच्चे या 4 बच्चे. अगर मेरे घर में गला कटने की नौबत आयेगी तो मेरे घर में बच्चे और हथियार नही है तो मैं नही बचूंगी. ये प्रैक्टीकल कैलकुलेशन है. लालू आइडियल नही थे, ना होगें. 9 बच्चे पैदा करने के लिए नही कह रहे है लेकिन 3-4 बच्चे हर महिला पैदा करें. पत्रकार- आपने कहा सामने वाले, ये कौन है? डॉ उदिता त्यागी- सामने वाले जेहादी सुअर. जो सुअरो की तरह बच्चे पैदा कर रहे है वो है और कौन है...कितनी क्लियरिटी चाहिए आपको.. हम मुस्लिम्स की बात कर रहे है. - PVS मॉल, मेरठ, उत्तरप्रदेश

Narendra Pratap

80,463 views • 3 months ago

जब पता है कि दूसरी साइड एक ऐसी पार्टी है जो साम, दाम, दंड, भेद हर चीज़ का प्रयोग करेगी, तो क्या नेता प्रतिपक्ष की इतनी भी ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वो उप-राष्ट्रपति चुनाव से पहले देश में रहकर हर दल को अपनी तरफ़ करने की कोशिश करें? वो तो हाफ़ पैंट पहनकर मलेशिया घूमने निकल गए? नेपाल पर चर्चा थी, पर भाजपा डिबेट से गायब। ऐसा क्यों? नेपाल से अगर कुछ समझने को मिलता है, तो वो ये है कि पुलिस के पास बेहिसाब पावर नहीं होनी चाहिए। कि जनता अगर इतने समय तक खामोश थी, तो इसका मतलब ये नहीं था कि उन्हें दिख नहीं रहा था कि वहाँ की सरकार ने सरकारी ख़ज़ाने का मुँह अपनी तरफ़ मोड़ रखा था। जनता को समझ आ रहा था कि नीतियाँ ऐसी बन रही थीं जो सिर्फ़ मंत्रियों के बच्चों की कंपनियों को फायदा दें। जनता की ख़ामोशी को स्वीकृति समझने की भूल नहीं करनी चाहिए किसी भी सरकार को।

Priyanka Kakkar

22,783 views • 11 months ago

जब भी कोई विदेशी मेहमान आता है तो यह उस पर भी निर्भर करता है कि वह किससे मिलना चाहता है और किससे नहीं मिलना चाहता। राहुल गांधी ने भारत दौरे पर आने वाले मलेशिया, मॉरीशस, बांग्लादेश और वियतनाम के कई गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की है। जहां तक इस मौजूदा मीटिंग की बात है, तो राष्ट्रपति पुतिन बहुत ही कम समय के लिए और संक्षिप्त दौरे पर भारत आए हैं। तो यह सिर्फ भारतीय सरकार का ही अधिकार नहीं है, बल्कि राहुल गांधी से मिलना है या नहीं, यह रूस की सरकार का भी अधिकार है। मनमोहन सरकार के समय जब राहुल गांधी जी बराक ओबामा से मिले थे, तो ओबामा ने अपनी किताब A Promised Land में क्या लिखा था? कि राहुल गांधी एक नर्वस स्टूडेंट की तरह लगते हैं, जो यह दिखाना चाहता है कि उसे बहुत कुछ पता है। वह यह दिखाना चाहता है कि हर चीज में महारत हासिल कर ली है, जिसे वह समझ भी नहीं पाता हो। अगर आप चाहते हैं कि राहुल गांधी की राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात होनी चाहिए, तो फिर खड़गे जी क्यों नहीं? वह भी तो नेता प्रतिपक्ष हैं और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी हैं, और राहुल गांधी से कहीं अधिक वरिष्ठ भी हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि प्रतिष्ठा केवल आग्रह करके नहीं पायी जाती है, प्रतिष्ठा अर्जित करनी पड़ती है और यह आपके आचरण व कार्यों से हासिल होती है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

33,562 views • 8 months ago

नमस्कार दोस्तों , ये शर्मनाक घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की है , जहां एक गालीबाज दरोगा जी , जो खुद एक जिम्मेदार पद पर हैं , इंडियन बैंक की एक शाखा में पहुंचते हैं और वहां मौजूद महिला व पुरुष बैंककर्मियों के सामने खुलेआम मां-बहन की गालियों की बौछार कर देते हैं। बैंक में उस समय कई महिला कर्मचारी और महिला ग्राहक भी मौजूद थीं , लेकिन दरोगा जी को न तो वर्दी की शर्म रही और न ही महिलाओं की गरिमा का ख्याल। जब बैंककर्मी शालीनता से बात करने की कोशिश करते हैं, तो दरोगा महोदय और भड़क उठते हैं और कहते हैं >> जिसको बोलना है बोल दो , जो उखाड़ना है उखाड़ लो। बर्ताव ऐसा जैसे कोई शराब के नशे में धुत सड़कछाप गुंडा हो , ना कि जनता का रक्षक। और हैरानी की बात ये कि वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे। क्यों? क्योंकि उनको पता है >> बस एक दो फॉर्मेलिटी और मामला रफा-दफा। चौकी थाना तो अपना ही है। अब ज़रा सोचिए >> अगर यही हरकत किसी आम आदमी ने की होती , तो पुलिस वाले उसका पिछवाड़ा लाल कर चुके होते। भाइयों और बहनों , कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। बैंककर्मी हो या ठेले वाला, महिला ग्राहक हो या ऑफिसर >> हर किसी का सम्मान होना चाहिए। ऐसे घटिया मानसिकता वाले दरोगाओं को तुरंत निलंबित नहीं, सीधा टर्मिनेट करना चाहिए। उत्तर प्रदेश पुलिस को एक सख्त उदाहरण पेश करना चाहिए , ताकि वर्दी पहनकर कोई दोबारा गुंडई करने की हिम्मत न कर सके।

खुरपेंच Satire

114,150 views • 1 year ago