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मरुधरा के रंग थार की अपणायत

18,861 次观看 • 9 个月前 •via X (Twitter)

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थार की अपणायत कोई सिर्फ़ शब्द नहीं यह हमारी आत्मा है, हमारी पहचान है। यह वह भावना है जो हमें जोड़ती है,जाति, धर्म, भाषा, और सीमा से परे। थार की रेत पर सदियों से मोहब्बत ने अपने कदमों के निशान छोड़े हैं,यहाँ की हवा में अपनापन है, यहाँ के पानी में मेल है, और यहाँ के दिलों में जगह है सबके लिए। थार की अपणायत का संदेश साफ़ यह है कि हम अलग नहीं, एक हैं,नफ़रत के शोर में भी हम मोहब्बत की बात करेंगे,जहाँ नफरत की दीवार बनती है, वहाँ थार की अपणायत हमेशा पुल बनती है। आज जब कुछ ताकतें थार की अपणायत और हमारे आपसी सामाजिक सौहार्द को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं,तब हमें जरूरत है और मजबूती से थार की अपणायत की डोर को थामने की। इतिहास बांटने वालो को नहीं जोड़ने वालो को याद रखेगा।

Harish Chaudhary

11,946 次观看 • 11 个月前

नववर्ष 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! इस नए साल की शुरुआत एक सकारात्मक कदम के साथ करते हुए, हम सब मिलकर ‘थार की बात’ मुहिम का आरंभ कर रहे हैं। यह मुहिम थार की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और “थार की अपणायत” को सहेजने और सशक्त बनाने के लिए हम सभी का सामूहिक प्रयास है। ‘थार की बात’ का उद्देश्य हमारी धरोहर, भाईचारा, और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे गर्व के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। यह केवल एक मुहिम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और हमारे गौरव को जीवंत रखने का संकल्प है। आइए, इस नए साल पर एकजुट होकर थार की संस्कृति को संजोएं और इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रण लें। #TharKiBaat Facebook Page : Instagram Account : X handle : Youtube channel :

Harish Chaudhary

41,181 次观看 • 1 年前

हमारे लिए सामाजिक सौहार्द,संस्कृती और सभ्यता ही हमारी थार की अपणायत है। आज बाड़मेर में पूज्य संत श्री जगदीश पुरी जी ने अपने वक्तव्य में जो पीड़ा व्यक्त की, वह हम सभी के हृदय को झकझोरने वाली है। बाड़मेर जैसलमेर जिला सीमा पर आयोजित गांधी रामधुन में राधेश्याम कल्ला जी द्वारा आवेश में आकर दिया गया बयान थार की हमारी अपणायत के अनुकूल नहीं था। मैं व्यक्तिगत रूप से श्रद्धेय जगदीशपुरी जी एवं सभी संतजनों से मिलने और उनसे क्षमा याचना करने को तैयार हूँ। लेकिन मेरा एक सवाल है — क्या बासनपीर में प्रतापपुरी जी द्वारा दिया गया बयान हमारी थार की अपणायत के अनुकूल था? हमारे लिए पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है — थार की आपसी भाईचारा और सद्भाव की वह भावना, जो इस रेगिस्तान की रेत के कण-कण में समाहित है। इसी के लिए हम सब कुछ समर्पित करने को सदैव तैयार हैं। श्रद्धेय जगदीश पूरी जी मैं 140 मठो में से जहाँ भी आप कहोगे वहाँ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी पूरी बात रखूँगा और उसके बाद जो भी आपका निर्णय होगा उसे मैं सहर्ष स्वीकार करूँगा।

Harish Chaudhary

36,653 次观看 • 11 个月前