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Ana Sayfaya Dön

मुश्किल से हाथों में ख़ज़ाना पड़ता है पहले कुछ दिन आना जाना पड़ता है ख़ुश रहना आसान नहीं है दुनिया में दुश्मन से भी हाथ मिलाना पड़ता है यूँ ही नहीं रहता है उजाला बस्ती में चाँद बुझे तो घर भी जलाना पड़ता है तू भी फलों का दावेदार...

48,450 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)

10 Yorum

अनिक (Anik) profil fotoğrafı
अनिक (Anik)2 yıl önce

मनसद का कद चाहे जितना ऊंचा हो एक दिन सबको होश में आना पड़ता है हाथ अगर टूटे भी हों तब भी हमको एक दूजे का वजन उठाना पड़ता है उधड़े सीवन की फिर से तुरपाई कर रिश्ता है, रिश्ते को निभाना पड़ता है दौड़ लगाने को एक सबक जरूरी है सबसे पहले ठोकर खाना पड़ता है ।। 🙏😇

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Aalok Shrivastav2 yıl önce

अरे वाह भैया 🥰 क्या कहने…

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Ashutosh Rana2 yıl önce

प्रिय आलोक 🤗💐

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Gee2 yıl önce

बिलकुल सही कहा आपने । कबीर दास जी भी कह गए हैं : धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतू आए फल होय । मन में धीरज रखने ( और मेहनत करते रहने) से सब कुछ होता है।

Ashutosh Rana profil fotoğrafı
Ashutosh Rana2 yıl önce

पूज्य कबीरदास जी का चिंतन धारणीय कल्याणकारी होता है। सादर धन्यवाद 🙏💐

Santosh Khirwadkar profil fotoğrafı
Santosh Khirwadkar2 yıl önce

@AalokTweet ज़िंदाबाद 🙏🏻 ❤️ आपकी भारी आवाज़ से राहत साहिब की यादें ताज़ा हो गयीं 🙏🏻 धन्यवाद

Ashutosh Rana profil fotoğrafı
Ashutosh Rana2 yıl önce

@AalokTweet कमाल कहते थे राहत साहब, प्रणाम 🙏

𝐍𝐢𝐥𝐞𝐬𝐡 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 𝐕𝐚𝐭𝐬 profil fotoğrafı
𝐍𝐢𝐥𝐞𝐬𝐡 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 𝐕𝐚𝐭𝐬2 yıl önce

🖤🙏

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Jibachh Hajari2 yıl önce

बहुत सून्दर

Arvind Chauhan profil fotoğrafı
Arvind Chauhan2 yıl önce

वाकई, राहत इंदौरी जी की यह शायरी बहुत ही गहराई से जीवन की मुश्किलतों को छूती है। उनका जवाब भी अद्वितीय होता है: "जब ख़ुदा को देखता है बंदा, मुश्किल उसको आसान लगने लगती है।"

Benzer Videolar

मर्द होने का दर्द भी कोई समझे… 💔 रोज़गार की तलाश में घर-परिवार से दूर निकला यह युवक दिनभर मेहनत करता रहा। जब भूख बर्दाश्त से बाहर हुई तो एक कोने में बैठकर अपनी सूखी रोटी और प्याज खाने लगा। तभी सामने से मालिक को आते देखा तो घबराकर उसने अपना खाना छिपा लिया। मालिक ने पूछा—“क्या खा रहे हो, दिखाओ?” जब खाना सामने आया तो उसमें न कोई सब्जी थी, न कोई स्वाद… बस कुछ सूखी रोटियां और प्याज। कभी-कभी इंसान की गरीबी उसके चेहरे से नहीं, उसकी छुपाई हुई थाली से दिखाई देती है। मर्द की जिंदगी भी कितनी खामोश होती है… दर्द हो तो भी छुपाना पड़ता है, भूख हो तो भी सहना पड़ता है और मजबूरी हो तो भी मुस्कुराना पड़ता है। 💔

प्रभाकर श्रीवास्तव

14,117 görüntüleme • 1 ay önce