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मुश्किल से हाथों में ख़ज़ाना पड़ता है पहले कुछ दिन आना जाना पड़ता है ख़ुश रहना आसान नहीं है दुनिया में दुश्मन से भी हाथ मिलाना पड़ता है यूँ ही नहीं रहता है उजाला बस्ती में चाँद बुझे तो घर भी जलाना पड़ता है तू भी फलों का दावेदार... show more
48,450 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)
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मनसद का कद चाहे जितना ऊंचा हो एक दिन सबको होश में आना पड़ता है हाथ अगर टूटे भी हों तब भी हमको एक दूजे का वजन उठाना पड़ता है उधड़े सीवन की फिर से तुरपाई कर रिश्ता है, रिश्ते को निभाना पड़ता है दौड़ लगाने को एक सबक जरूरी है सबसे पहले ठोकर खाना पड़ता है ।। 🙏😇

अरे वाह भैया 🥰 क्या कहने…

प्रिय आलोक 🤗💐

बिलकुल सही कहा आपने । कबीर दास जी भी कह गए हैं : धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतू आए फल होय । मन में धीरज रखने ( और मेहनत करते रहने) से सब कुछ होता है।

पूज्य कबीरदास जी का चिंतन धारणीय कल्याणकारी होता है। सादर धन्यवाद 🙏💐

@AalokTweet ज़िंदाबाद 🙏🏻 ❤️ आपकी भारी आवाज़ से राहत साहिब की यादें ताज़ा हो गयीं 🙏🏻 धन्यवाद

@AalokTweet कमाल कहते थे राहत साहब, प्रणाम 🙏

🖤🙏

बहुत सून्दर

वाकई, राहत इंदौरी जी की यह शायरी बहुत ही गहराई से जीवन की मुश्किलतों को छूती है। उनका जवाब भी अद्वितीय होता है: "जब ख़ुदा को देखता है बंदा, मुश्किल उसको आसान लगने लगती है।"
