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महाराष्ट्र में “सपा” की जमानत जब्त - अखिलेश जी! योगी जी “बास्केट बॉल” के खिलाड़ी नहीं राजनीति के खिलाड़ी हैं, देखो सूपड़ा साफ हो गया। अब आप अपने अहंकार को कम करके आकलन करिये कि लोग आपको क्यों पसंद नहीं करते?

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योगी आदित्यनाथ मुश्किलों में हैं, उन्हें घेर लिया गया है अविमुक्तेश्वरानंद संतों के एक वर्ग को योगी जी के खिलाफ भड़काने में सफल रहे हैं वहीं X पर काफी बड़ी ब्राह्मण ID अविमुक्तेश्वरानंद की आड़ में योगी के खिलाफ बड़ा नैरेटिव फैलाने में सफल हो गई हैं BJP के अंदर का एक वर्ग पहले ही योगी जी के सियासी पतन की साजिशों के जुटा हुआ है UP विधानसभा चुनाव में एक साल बाक़ी है और इससे पहले ही भगवाधारी योगी के सामने भगवाधारी को ही खड़ा कर दिया गया है X पर जो लोग हिंदूवादी बनने का दम भरते हैं, उनमें से काफी ज़्यादा X हैंडल अविमुक्तेश्वरानंद की आड़ में अपनी जातिगत कुंठा जाहिर करते हुए CM योगी के खिलाफ बड़ा माहौल बना रहे हैं और इसमें सफल भी हो रहे हैं 2027 में योगी की लड़ाई सिर्फ अखिलेश यादव से नहीं होगी बल्कि भाजपा के अंदर बैठे योगी विरोधियों और सोशल मीडिया पर हिंदुत्ववादी चोला ओढ़े जातिवादियों से भी होगी जो दिखाने को तो BJP के साथ हैं लेकिन नैरेटिव ऐसा चला रहे हैं कि योगी जी अपराधी हैं और अविमुक्तेश्वरानंद जी ही सच्चे संत हैं योगी बाबा अभिमन्यु की तरह कालचक्र के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं पता नहीं वो इस चक्रव्यूह को तोड़ पाएंगे या 2027 के महासमर में ये धर्मयोद्धा अपनों की ही साजिश का शिकार होकर सियासी पतन को प्राप्त हो जाएगा

Abhay Pratap Singh (बहुत सरल हूं)

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नाथ संप्रदाय में ‘आदेश’ का मतलब और महत्व: नाथ योगी एक-दूसरे से मिलते वक्त ‘नमस्ते’ या ‘राम-राम’ नहीं, बल्कि *“आदेश”* बोलते हैं। इसका अर्थ है: आ = आत्मा, दे = देव/परमात्मा, श = शरीर यानी: _“आत्मा, देव और शरीर एक हैं”_ या _“मैं तुम्हारे भीतर स्थित शिव को प्रणाम करता हूं।” गोरखनाथ जी ने कहा है: “आदेश आदेशे सब कोई, आदेश कहे सो योगी होई।” मतलब जो ‘आदेश’ का मर्म समझ ले, वही सच्चा योगी है! अभिवादन नहीं, उद्घोष है: ये साधारण हैलो-हाय नहीं। ये गुरु-परंपरा को नमन है। आदिनाथ शिव, मत्स्येंद्रनाथ और गोरखनाथ को याद करना है। जब नाथ योगी ‘आदेश’ बोलता है तो वो सामने वाले के अहंकार को नहीं, उसके भीतर के शिव-तत्व को प्रणाम करता है। ‘आदेश’ सुनते ही पता चल जाता है कि सामने वाला नाथ पंथी है। ये उनकी पहचान है। योगी आदित्यनाथ जी को ‘आदेश’ करते कई बार देखा गया है! योगी आदित्यनाथ जी सिर्फ UP के CM नहीं हैं। वो गोरखनाथ मठ के महंत और 'नाथ संप्रदाय के सबसे बड़े "पीठाधीश्वर" हैं। गोरक्षपीठ की परंपरा:गोरखनाथ मंदिर में सुबह गोरक्षनाथ जी की आरती के बाद, या किसी भी नाथ योगी से मिलते वक्त वो हाथ जोड़कर “आदेश” बोलते हैं। ये 1000 साल पुरानी परंपरा है। जब भी कोई नाथ योगी, नागा साधु या संत उनसे मिलने आता है, तो योगी जी पहले ‘आदेश’ करते हैं। कई बार रैली में संत समाज के सामने वो मंच से ‘आदेश’ का उद्घोष करते हैं। ये जनता को बताता है कि उनकी जड़ें कहां हैं। इसीलिए जब योगी जी ‘आदेश’ करते हैं तो वो CM की कुर्सी नहीं, गोरक्षपीठ की गद्दी का धर्म निभा रहे होते हैं। आदेश...🙏🔥

Thakur Saurabh Singh

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