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ये अधिकार तो सिर्फ सैफ के पास है 😄😜

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भारत एकमात्र ऐसा सेक्युलर देश है जहां अल्पसंख्यक आयोग भी है और अल्पसंख्यक मंत्रालय भी। वक्फ बोर्ड जैसा अधिकार अल्पसंख्यकों में सिर्फ मुसलमानों के पास है। ऐसा अधिकार न ईसाइयों के पास है, न सिखों के पास है और न जैनों के पास है। यानी अगर मैंने कह दिया कि यह जमीन हमारी थी, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है। यह अधिकार किसी और अल्पसंख्यक के पास नहीं है, हिंदुओं को तो छोड़ ही दीजिए। दूसरा अधिकार है 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' जिसमें अगर आपके धार्मिक स्थल को मुगल काल में तोड़कर दूसरे धर्म के लोगों ने बना लिया था, तो आप कोर्ट भी नहीं जा सकते। तीसरा है कि आप 9 साल की बच्ची से शादी कर सकते हैं, 4 बीवियां रख सकते हैं। ये अधिकार न सिखों के पास हैं, न ईसाइयों के पास, न जैनों के पास। अधिकारों की फेहरिस्त काफी लंबी है, ये तो सिर्फ तीन उदाहरण हैं। इनके पास कुछ ऐसे अधिकार हैं जो कट्टर मुस्लिम देशों में भी नहीं हैं। इसलिए यहां दो प्रकार के मुसलमान हैं। एक मुसलमान वो जो शराफत अली है और दूसरा वो जो शरारत खान है। एक मुसलमान वो जिसके दिल में भारत माता की जय है और एक मुसलमान वो है जो फिलिस्तीन की जय बोलता है। एक मुसलमान वो है जो 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा निकालता है एक मुसलमान वो है जो हमास और हिजबुल्लाह के लिए श्रीनगर से लेकर लखनऊ-हैदराबाद तक यात्राएं निकालता है।

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भाजपा के अंदर आपस में ‘विचारों का विलय’ नहीं हो रहा है और दावे दुनिया भर के। आप तो लखनऊ की कुर्सी पर ध्यान दें, जिसे दिल्लीवाले विलय ही नहीं, विलीन भी करनेवाले हैं। एक मुख्यमंत्री होने के नाते वैसे भी ये विषय आपके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। ऐसा लगता है कि ये सुझाव देने के लिए आपको दिल्लीवालों ने मिलने का समय नहीं दिया तभी आप माइक पर बोलने को मजबूर हैं, नहीं तो ये बात तो आप भी समझते ही हैं कि जब आपस में खटास हो तो एक-दूसरे के अधिकार-क्षेत्र में अतिक्रमण और भी खलता है। ध्यान रखिएगा कहीं ऐसा न हो कि इस अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कोई तोड़क कार्रवाई हो जाए, बुलडोज़र तो दिल्लीवालों के पास भी है।

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