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ये बच्चे 13 महीने से लगातार जगह बदल रहे हैं, इनके पैर खून और चोट से लथपथ हैं, ये भूखे-प्यासे हैं, थके हुए हैं, इनमें बात करने की भी ताकत नहीं है, ज़मीन फट जाए और मुस्लिम हुक्मरानों को उसमें समा जाना चाहिए, हम कितने बेशर्म लोग है

290,458 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

9 Kommentare

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Amit Tiwaryvor 1 Jahr

इज़राइल पर हमला करने के पहले सोचना चाहिए था न॥

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Yogi Gvor 1 Jahr

तुम्हारे जैसे नीच लोगों के कर्म औरतें और बच्चे भुगतते हैं

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Agastyavor 1 Jahr

तो तू क्यो मदद नही करता बे

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Veteran & Adv R N YADAVvor 1 Jahr

मुस्लिम हुक्मरानों की यही तो पूंजी है। सात अक्टूबर 23 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए जघन्य अपराध एवं यह स्थिती इन्सानियत के खिलाफ है।

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अखण्ड भारतvor 1 Jahr

सही कहा निहायती बेशर्म

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MR.ALONEvor 1 Jahr

ज़मीन फट जाए और मुस्लिम हुक्मरानों को उसमें समा जाएं हम कितने बेशर्म लोग है

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LALIT AWASTHIvor 1 Jahr

इजरायल के आस पास सारे मुस्लिम देश है फिर भी गाज़ा के बेघर लोगों को कोई भी अपने देश में शरण देने को तैयार नहीं है क्योंकि उनकी भी पता है कि इनको अपने देश में लाने का मतलब है कि अपने देश में सिविल युद्ध को न्योता देना😀 यही है मुसलमानों का आपसी भाईचारा??🤣🤣

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भारतवासी.vor 1 Jahr

और मारो इजराइल के बेगुनाह, मासूस बच्चों और औरतों को, जिसने मारा वो तो छुप गए और मर रहे है ये मासूम लोग, जिहाद के चक़्कर मै अपनी ही कौम को मार दिया हमास ने 🤔

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SANJIV AGARWALvor 1 Jahr

जब मुस्लिम हिन्दु लडकियो से धोखे से शादी करके उनके टुकडे करके सूटकेस/फ्रिज मे पैक कर देते है या फैक देते है तब भी मुस्लिम हुकुमरानो को धरती मे समा जाना चाहिए

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मेरे सभी हिंदू भाइयों से जो कावड़ यात्री हैं, उन सभी से ये गुजारिश है कि सड़कों पर आपको जगह-जगह पर मुसलमान शरबत पिलाते हुए और केला खिलाते हुए मिलेंगे। कृपया इनसे न ही केला खाइए, और न ही शरबत पीजिए। वजह ये है कि ये लोग जो भी पैसा खर्च कर रहे हैं आपको केला खिलाने के लिए या शरबत पिलाने के लिए, ये वो अपने सदके और खैरात के पैसे से करते हैं। मुझे बहुत से लोगों ने बताया है कि मुसलमान सदका खैरात निकालता है और उससे आपको ये केला खिलाते हैं, शरबत पिलाते हैं। आपको बता दूं सदका और खैरात पैसे की मैल की तरह होता है। मुसलमान जो पैसा कमाता है, उसमें से वो पैसे की मैल की तरह उसको निकालता है कि ये पैसे में से निकाल दो, किसी गरीब को खिला दो, किसी फकीर को खिला दो, और फिर उसके बाद तुम्हारी बाकी कमाई जो है वो पाक हो गई। तो कृपया आप इनके मैल को न खाएं, ये आपको मीठी-मीठी बोली दे रहे हैं, और आपका धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं। तो कृपया इन लोगों को जहां देखिए इनके खिलाफ एफआईआर कराइए, इनके खिलाफ कार्रवाई कराइए। और मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाबा जी से भी ये रिक्वेस्ट करूँगा कि मुसलमानों को इस तरीके के किसी भी काम को करने से पूरी तरह रोका जाए, ये कावड़ियों का धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं।

Sidd

28,129 Aufrufe • vor 1 Monat

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव न होना कांस्टीट्यूशन ब्रेकडाउन की तरह, सरकार बर्खास्त होनी चाहिए। : गवर्नर साहब को और राष्ट्रपति को इंटरवीन करना चाहिए। जिस प्रकार का ये कानून उल्लंघन कर रहे हैं, ये सरकार कैसे रह सकती है? ये संविधान की मूल भावना को चोट कर रहे हैं तो, ये संविधान के ब्रेकडाउन की तरह है। इस सरकार को बर्खास्त करना चाहिए। अब बर्खास्त कौन करे? बर्खास्त करने वाले इनके पार्टनर हैं, डबल इंजन जो ये कहते हैं, एक बड़ा इंजन दिल्ली के अंदर है और वही बर्खास्त कर सकता है। ये उनके चहेते हैं तो इन लोगों को क्या बर्खास्त करेंगे। बर्खास्त करने लायक केस है ये। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है, हाई कोर्ट कह चुका है, जब उनकी बात नहीं मानी गई है, इससे बड़ा कांस्टीट्यूशनल ब्रेकडाउन क्या होगा? मेरा ये मानना है। दुर्भाग्य से न गवर्नर साहब कुछ बोल पा रहे हैं, ना केन्द्र सरकार कुछ बोल पा रही है। इसलिए मैंने कल कहा था कि राष्ट्रपति महोदय को आगे आना चाहिए, गवर्नर साहब को बात करनी चाहिए कि चुनाव टाइम पर हो, किसी ढंग से हो। हमने भी एक बार प्रयास किया था कि पोस्टपोन कर देंगे चुनाव को, कर्मचारियों की स्ट्राइक चल रही थी, हमें मना कर दिया गया और उस स्ट्राइक में हमने चुनाव करवाए थे। कोई न कोई रास्ता निकल सकता है। इतने घबराए हुए हैं ये लोग चुनाव से, पता नहीं साफ हो जाएंगे, इसलिए चुनाव नहीं करवा रहे हैं।

Ashok Gehlot

19,488 Aufrufe • vor 4 Monaten

यूपी की राजधानी लखनऊ !! चिराग तले अंधेरा !! योगीजी का राज !! ये कौन अज्ञात लोग हैं जो खुद को बारपेटा का बताते हैं,मगर बंगला और रोहिंज्ञाओं वाली भाषा बोलते हैं, आम जनता से घुलते मिलते नहीं हैं,कोई खोजी पत्रकार पूछताछ करने पहुंच जाता है तो दौड़कर झुग्गी में छुप जाते हैं,अपनी स्त्रियों और ढेरों बच्चों को मीडिया से बात नहीं करने देते !! प्रतिमाह सैकड़ों बच्चे पैदा हो रहे हैं, वाकायदा इन बस्तियों में 'बारपेटा' से खतना करने वाले आते हैं,खतना करते हैं,वाकायदा अपने नाम ,पता और फ़ोन नम्बर वाले बैनर लगाते हैं... इन्ही विषयों को लेकर जब अभिषेक शांडिल्य ,रिपोर्टर ,ग्लोबल भारत ,लखनऊ की महापौर से मिलते हैं तो वह बातचीत से इनकार कर देती हैं... सामान्य प्रश्न यह है कि लखनऊ में झोपड़ियां डाल कर रह रहे ये लाखों लोग कौन है ? यूपी... की आबादी 25 करोड़ यूँही नहीं पहुंची है !! इन लोगों की जांच होनी चाहिए, हमारी सतर्कता एजेंसीज क्या कर रही हैं ?

ocean jain

26,935 Aufrufe • vor 7 Monaten

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,795 Aufrufe • vor 2 Monaten