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ये मुल्ला खुल्लमखुल्ला मुसलमानों को यह कह रहा है कि जो महायुति के साथ है वो मुसलमान ही नहीं है! मुसलमान जहाँ भी है, जिस भी स्थिति में है, अपवादों को छोड़ कर, जिहाद में लगा हुआ है। आप सोचिए कि किसी का मजहब उसके राजनैतिक विचारों के कारण...

254,954 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Ujjaval Tiwarivor 1 Jahr

सब चिह्नित हो गया हैं , सब तख्त उखाड़े जायेंगे नाम रहेगा श्रीराम का ✊

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Ujjaval Tiwarivor 1 Jahr

बेशक माजबूरी में धर्म बदल लिए थे आईए सनातन में स्वागत हैं। पर रगों में दौड़ रहा पुरखों का खून भक्ति के उबाल मारने लगा। विश्वास नहीं मज़हब में परिवर्तन कर लो भाई 🚩

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राजस्थान वाले योगी बाबा🇮🇳vor 1 Jahr

इसराइली राजदूत अयोध्या आए थे प्रेरणा लेने..सुनना हैं उनके यहां भी शांतिदूतों की बड़ी समस्या हैं।

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Ujjaval Tiwarivor 1 Jahr

7 भाईजान को एक अकेले ने पेल दिया, घटना बनारस की हैं। नेपाली फरसाधारी 🚩 अगर ऐसे ही बहराइच में हो जाता सब धंडे हो जाते।

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सत्य सनातन 'मोदी का परिवार'vor 1 Jahr

इन जाहिलो की कितनी विकृत मानसिकता है।

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खुस्सनvor 1 Jahr

ये मुल्ला खुल्लमखुल्ला मुसलमानों को यह कह रहा है कि जो महायुति के साथ है वो मुसलमान ही नहीं है! मुसलमान जहाँ भी है, जिस भी स्थिति में है, अपवादों को छोड़ कर, जिहाद में लगा हुआ है। आप सोचिए कि किसी का मजहब उसके राजनैतिक विचारों के कारण उससे हटाया जा रहा है।

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डॉ रमाकान्त रायvor 1 Jahr

यही विचार उन्हें एकजुट करता है और भेड़ की तरह व्यवहार करने के लिए उकसाता है। वह वोट बैंक बन कर अब शक्ति की तरह इसका प्रयोग करने लगे हैं। जो बात किसी समाज के लिए त्याज्य है, उसी जाहिलियत को शक्ति बना ली है इन्होंने।

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Shri Radha Ranivor 1 Jahr

रिपोस्ट करते रहो 😡 जब तक वह गिरफ्तार न हो जाए रणधीरगढ़, भरतपुर के अदनान सैय्यद सोशल मीडिया पर प्रभु श्री राम जी को गाली दे रहे हैं और सांप्रदायिक अशांति भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। दोषी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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Virat Chaudharyvor 1 Jahr

मुस्लिम “देशभक्त” होते तो "पाकिस्तान" नहीं बनता? “सेक्युलर” होते तो कश्मीर से हिंदू नहीं “भगाये” जाते। इसलिए भाई+चारे का 'झुनझुना' बजाना छोड़ दो। चंदन गुप्ता, कन्हैया लाल, रामगोपाल, देख लो?

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Deepak Kainthalvor 1 Jahr

ये कुत्ते की वो पूछ है जो लाभ सीधी नही होगी। बस इन्हें जिहाद-जिहाद खेलना है हर बात में

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आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए : देखिए, एक तो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। एक तरफ तेल और गैस को लेकर जो स्थिति बनती जा रही है, तो राहुल गांधी ने पहले ही वॉर्न किया था कि ये स्थिति बनेगी। हमेशा सरकार लेट कर देती है। तैयारी समय पर करनी चाहिए, क्योंकि वॉर हो गया है, तो वॉर के कारण ही ये स्थिति बनी है। तो आपके पास जस्टिफाई करने का कारण है, खाली इतना ही कि आप जनता को विश्वास में लो कि भाई देखिए, वॉर हो गया, हमारी मजबूरी है, और यहाँ ये कमियाँ रह गईं या नहीं रही हैं, हम प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कोई तकलीफ नहीं आए, कम से कम तकलीफ आए। अब जो प्रधानमंत्री ने हाउस में बोला, वो तैयारी उस ढंग से नहीं की। आलोचना के शिकार भी हुए। ये पूरा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की जो स्थिति बनी है, अब किस दिशा में जाएगा, कोई नहीं जानता। और दूसरा, हमारे ट्रंप जो हैं, मिस्टर ट्रंप, पता नहीं जिस प्रकार उनका व्यवहार है मोदी जी के प्रति,कभी कहते हैं मेरे वो दोस्त हैं, कभी कहते हैं कि वो मुझे खुश करने में लगे हुए हैं, कभी कहते हैं कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूँ। आज तक मैंने किसी भी राष्ट्रपति को दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसे कमेंट करते नहीं सुना। वो वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को किडनैप कर सकता है एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के प्रेसिडेंट को किडनैप कर ले और दुख इस बात का रहा कि दुनिया के किसी मुल्क ने निंदा नहीं की, कंडेम नहीं किया, दुख प्रकट नहीं किया। ये दुनिया के लिए बहुत-बहुत बुरा संकेत है। जो हुआ है, सब जानते हैं। अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। मतलब आप बताइए, पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमारे देखते हुए भी हमने देखा—65 के वॉर में क्या थी, 71 में क्या थी, कारगिल में क्या थी हमेशा मुँह की खानी पड़ी। वो आज जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के अंदर भी, तुर्की उनका साथ दे रहा था, हमारे साथ कोई नहीं था। इस प्रकार के हालात में देश चल रहा है। समझना चाहिए, कहाँ पाकिस्तान और कहाँ हिंदुस्तान है। उसके बावजूद भी वो समझौते की बात कर रहा है, डायलॉग वो करवाएंगे। और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका ये कहना कि वो दलाली का काम कर रहा है, ये बहुत ही गलत है। मैं समझता हूँ कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा काम में नहीं ले सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। मैं तो मानता हूँ कि हो सकता है उनके मुँह से स्लिप ऑफ टंग हुआ हो। अगर ऐसा हुआ है तो अलग बात है, उनको सॉरी फील करना चाहिए, नहीं तो मैं समझता हूँ कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए। आप कैसे कह सकते हो कि दलाली कर रहा है? दलाली होता क्या है? अगर दुनिया के मुल्कों में शांति स्थापित होती है हिंसा तो हिंसा ही होती है तो मुल्क कहाँ जाएगा? तीसरे विश्व युद्ध के रूप में जाएगा? थर्ड वर्ल्ड वॉर के रूप में जाएगा? कहाँ जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरनाक हालात में, जब दुनिया में आग लगी हुई है, वहाँ शांति स्थापित करने के लिए हर वर्ग को, हर मुल्क को प्रयास करना चाहिए। और उसके अंदर आप कह रहे हो कि दलाली कर रहा है ये बात मुझे समझ में नहीं आई। ऐसे हालात में देश चल रहा है। और लोग सब चिंतित हैं कि हमारी स्थिति कहाँ थी और कहाँ पहुँच गई। कहाँ इंदिरा गांधी का जमाना था—90 हजार से अधिक सैनिकों को, जनरल, कर्नल, मेजर को यहाँ अरेस्ट करके इंडिया में ले आए थे। 90 हजार से अधिक लोगों को, लगभग एक लाख लोगों को। और आज देश की हमारी स्थिति क्या है, आपके सामने है। ये जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति हुई है।

Ashok Gehlot

13,708 Aufrufe • vor 6 Monaten

"संजौली में मस्जिद बंद करो, मुल्ले मौलवी नहीं चलेंगे" संजौली, शिमला में इस मुस्लिम विरोधी नफरत के लिए केवल आप बीजेपी को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं! समाज में रहने वाली एक बड़ी गिनती मुसलमान के वजूद से ही नफरत की प्रकाष्ठा पर पहुंच चुकी है। उनको मुसलमानों के अपने बगल में होने से ही तकलीफ है। उनको मुसलमान के नमाज पढ़ने से तकलीफ है, उनको मुसलमान के धार्मिक स्थलों से तकलीफ है, उनको मुसलमान के जिंदा होने से तकलीफ है, उनको मुसलमान के केवल होने भर से भी तकलीफ है! भाजपा ने तो केवल इन नफरती लोगों की इस नफरत का फायदा उठाया है, उसके सहारे अपनी राजनीति को चमकाया है और सत्ता के मजे उठा रही है। वरना तो इन लोगों के दिलों में नफरत तो कई सालों से है जो मुसलमान के केवल होने भर से ही घबराने लगते हैं, कुंठित हो जाते हैं, मुसलमान के वजूद को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। यह वही लोग हैं जो दुबई और इस्तांबुल में जाकर तो दुनिया भर की अय्याशी करने में रत्ती भर भी गुरेज नहीं करते है मगर जैसे ही भारत में पहुंचेंगे तो उनके लिए मुसलमान "मुल्ला"हो जाएगा। जिसके दिल में इतनी नफरत भरी हो उसके सुधरने की उम्मीद अपने आप में ही बेमानी है! फिर कह रहा हूं कि सिर्फ भाजपा दोषी नहीं है! दर्द पेट में है और सर दर्द की दवा खाकर इलाज नहीं होगा। एक 40 फ़ीसदी आबादी मुसलमानों की चूड़ी टाइट होने के नाम पर ही एक पार्टी विशेष भाजपा को वोट देता है। जिसके मन को मुसलमानों के खून को देखकर ही तृप्ति होती है। मुसलमान के वजूद से घबराने वाली ये आबादी समाज में जाकर ढोंग करती है कि हम तो बहुत बड़े लिबरल और सामाजिक सोहार्द के अलमबरदार हैं जबकि हकीकत तो यही है कि ये जोम्बिज कल भी मुसलमान से बेइंतहा नफरत करते थे, आज भी करते हैं और आगे भी करते रहेंगे! अब ढोंग का पर्दा हट चुका है!

Ansar Imran SR

145,003 Aufrufe • vor 2 Jahren

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने परीक्षा में होने वाली नकल को “नकल जिहाद” करार दिया है। कोई अपराध होगा तो उस अपराध के नाम के साथ जिहाद जोड़ दिया जाएगा! क्या यह मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं है? जिहाद मुसलमानों मुकद्दस लफ़्ज़ है। अगर उसे किसी अपराध से जोड़ा जा रहा है तो इसका मतलब साफ है कि ऐसा करने वाला शख्स जान-बूझकर मुसलमानों की धार्मिक भावना को कुचल रहा है। मुस्लिम संगठनों को चाहिए कि किसी भी अपराध को “जिहाद” कहकर संबोधित करने वालो के खिलाफ अदालत के दरवाज़े पर जाए। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह हरियाणा सरकार ने राज्य में गोरखधंधा शब्द को प्रतिबंधित किया हुआ है, वैसे ही जिहाद लफ्ज़ को अपराध से जोड़ने वालो के खिलाफ कार्रावाई हो!

Wasim Akram Tyagi

39,933 Aufrufe • vor 1 Jahr

भारत एकमात्र ऐसा सेक्युलर देश है जहां अल्पसंख्यक आयोग भी है और अल्पसंख्यक मंत्रालय भी। वक्फ बोर्ड जैसा अधिकार अल्पसंख्यकों में सिर्फ मुसलमानों के पास है। ऐसा अधिकार न ईसाइयों के पास है, न सिखों के पास है और न जैनों के पास है। यानी अगर मैंने कह दिया कि यह जमीन हमारी थी, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है। यह अधिकार किसी और अल्पसंख्यक के पास नहीं है, हिंदुओं को तो छोड़ ही दीजिए। दूसरा अधिकार है 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' जिसमें अगर आपके धार्मिक स्थल को मुगल काल में तोड़कर दूसरे धर्म के लोगों ने बना लिया था, तो आप कोर्ट भी नहीं जा सकते। तीसरा है कि आप 9 साल की बच्ची से शादी कर सकते हैं, 4 बीवियां रख सकते हैं। ये अधिकार न सिखों के पास हैं, न ईसाइयों के पास, न जैनों के पास। अधिकारों की फेहरिस्त काफी लंबी है, ये तो सिर्फ तीन उदाहरण हैं। इनके पास कुछ ऐसे अधिकार हैं जो कट्टर मुस्लिम देशों में भी नहीं हैं। इसलिए यहां दो प्रकार के मुसलमान हैं। एक मुसलमान वो जो शराफत अली है और दूसरा वो जो शरारत खान है। एक मुसलमान वो जिसके दिल में भारत माता की जय है और एक मुसलमान वो है जो फिलिस्तीन की जय बोलता है। एक मुसलमान वो है जो 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा निकालता है एक मुसलमान वो है जो हमास और हिजबुल्लाह के लिए श्रीनगर से लेकर लखनऊ-हैदराबाद तक यात्राएं निकालता है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

21,549 Aufrufe • vor 1 Jahr