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ये सदन एक पार्टी नहीं बल्कि पूरे देश की आवाज़ है - राहुल गांधी

46,579 次观看 • 5 个月前 •via X (Twitter)

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"संसद जनता का मंदिर या सत्ता की जागीर?" दुर्भाग्य की बात है कि देश की संसद, जो जनता की आवाज़ का मंच है, अब कुछ लोगों के लिए एक निजी जागीर बनकर रह गई है। जिस तरह राहुल गांधी के भाषण और 'राइट टू रिप्लाई' से ठीक पहले अचानक संसद स्थगित कर दी गई, और स्पीकर महोदय सदन छोड़कर चले गए, ये कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पूर्व-नियोजित राजनीतिक भागीदारी थी। क्या स्पीकर को सदन चलाना नहीं आता? क्या प्रधानमंत्री को विपक्ष के सवालों का जवाब देने की हिम्मत नहीं? या फिर डर ये था कि राहुल गांधी एक बार फिर सत्ता के खोखलेपन को उजागर कर देंगे? असल में डर "ऑपरेशन सिंदूर" का है। जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को उन्होंने व्यापार की धमकी देकर रोका, तो ये सीधा संदेश था कि भारत की विदेश नीति आज आत्मसम्मान से नहीं, सरेंडर से चल रही है। मोदी सरकार जानती है कि राहुल गांधी जैसे नेता इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे, अमेरिका के सामने जो झुकाव हुआ, उसका जवाब क्या है? लेकिन जब जवाब न हो, तब भागने की परंपरा शुरू होती है। और यही हुआ, सदन स्थगित कर दिया गया। संसद को चुप करा दिया गया। ये संसदीय परंपरा की अवहेलना नहीं, लोकतंत्र की हत्या है। एक सवाल हम सबको पूछना चाहिए, जो सरकार संसद से भागती है, वो देश के लिए क्या लड़ेगी?

Alok Sharma

20,293 次观看 • 1 年前