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योगी जी आपको मोदी जी की तरह मुंह छुपा कर नहीं भगाना चाहिए था।

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28 Kommentare

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Arun Singh Deoria(बुलडोजर बाबा 2)🚩🚩vor 15 Tagen

सवालों से भागने का आरोप योगी आदित्यनाथ पर लगाना वैसा ही है जैसे सूरज पर अंधेरे का आरोप लगाना। जो मुख्यमंत्री हर सप्ताह जनता के बीच बैठकर सीधे फरियाद सुनते हैं और विधानसभा में विपक्ष को करारा जवाब देते हैं, उनके 10 मिनट की संगठनात्मक घोषणा को “भागना” बताना सिर्फ राजनीतिक कुंठा है। Q&A तय नहीं था तो कैमरे के सामने हंगामा किस बात का? सवाल पूछने की आड़ में वायरल क्लिप की भूख को पत्रकारिता का नाम देना बंद कीजिए।

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Abhishek Tiwarivor 15 Tagen

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो लगभग हर सप्ताह जनता दर्शन में बिना किसी मध्यस्थ के सीधे आमजन और फरियादियों से आमने-सामने संवाद करते हैं और विधानसभा में विपक्ष के हर आरोप का जवाब देते हैं। जो नेता सदन और खुले मंचों पर तीखे सवालों का सामना करने के लिए जाना जाता हो, उस पर 10 मिनट की एक संगठनात्मक घोषणा से भागने का आरोप लगाना तर्कहीन और हास्यास्पद है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रेस वार्ता के शुरू होने से पहले तय किया जाता है कि उसमें प्रश्न-उत्तर होगा या केवल ब्रीफिंग। जब आयोजकों द्वारा पहले ही केवल अभियान घोषणा तय थी, तब कार्यक्रम समाप्त होने पर आक्रामकता दिखाना पत्रकारिता की मर्यादा के बजाय सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज और सनसनी हासिल करने की रणनीति अधिक प्रतीत होती है।

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rajnish Tiwarivor 15 Tagen

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो लगभग हर सप्ताह जनता दर्शन में बिना किसी मध्यस्थ के सीधे आमजन और फरियादियों से आमने-सामने संवाद करते हैं और विधानसभा में विपक्ष के हर आरोप का जवाब देते हैं। जो नेता सदन और खुले मंचों पर तीखे सवालों का सामना करने के लिए जाना जाता हो, उस पर 10 मिनट की एक संगठनात्मक घोषणा से भागने का आरोप लगाना तर्कहीन और हास्यास्पद है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रेस वार्ता के शुरू होने से पहले तय किया जाता है कि उसमें प्रश्न-उत्तर होगा या केवल ब्रीफिंग। जब आयोजकों द्वारा पहले ही केवल अभियान घोषणा तय थी, तब कार्यक्रम समाप्त होने पर आक्रामकता दिखाना पत्रकारिता की मर्यादा के बजाय सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज और सनसनी हासिल करने की रणनीति अधिक प्रतीत होती है।

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Pooja Singhvor 15 Tagen

जब मुख्यमंत्री जी मंच की सीढ़ियों से नीचे उतरने लगते हैं तब वायरल होने के किए सवाल पूछे जाते हैं. कुछ बात तो है योगी आदित्यनाथ में जो अखिलेश से लेकर उनके साधारण चमचे तक योगी आदित्यनाथ के नाम पर अपनी दुकान चलाना चाहते हैं

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Pooja Goswami 🇮🇳vor 15 Tagen

जो मुख्यमंत्री हर सप्ताह जनता दर्शन में बिना किसी मध्यस्थ के सीधे फरियादियों से संवाद करते हों और विधानसभा में विपक्ष के तीखे से तीखे सवालों का जवाब देते हों, उन पर 10 मिनट की संगठनात्मक घोषणा से “भागने” का आरोप हास्यास्पद है। प्रेस वार्ता भी पहले से तय प्रारूप के अनुसार होती है ब्रीफिंग है तो ब्रीफिंग, सवाल-जवाब है तो सवाल-जवाब। जब कार्यक्रम केवल अभियान की घोषणा के लिए निर्धारित था, तब उसके बाद कैमरे के सामने आक्रामकता दिखाकर वायरल फुटेज तलाशना पत्रकारिता नहीं, सनसनी की सियासत है।

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रेखा चौबेvor 15 Tagen

2 रुपये में 2 कौड़ी के लोग ऐसे ही पीछे से सवाल करते हैं योगी जी भागते नहीं, भागते हैं

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Jitendra solankivor 15 Tagen

मैंने ऐसा कोई काम ही नहीं किया कि मैं मीडिया का जवाब दे सकूँ

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Prakash Raivor 15 Tagen

सूप त सूप चलनी भी बोलले

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𝐇𝐚𝐫𝐢𝐨𝐦 𝐃𝐮𝐛𝐞𝐲vor 15 Tagen

इसे पत्रकारिता नहीं इसे बदतमीज़ी कहते हैं, जब तक प्रेस वार्ता चली तब ये सवाल नहीं पूछ सकी? जब मुख्यमंत्री उठकर जाने लगे तो सवाल पूछ लो

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DOPEvor 15 Tagen

PM Abhijeet Dipke should resign.

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How Far How Nearvor 15 Tagen

दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा गाना याद आ गया बेलचटटा को भागते देखकर

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Sangeetavor 15 Tagen

जो नेता हर सप्ताह जनता और सदन में सवालों का सामना करता हो, उस पर 10 मिनट की तय घोषणा से भागने का आरोप हास्यास्पद है। जब कार्यक्रम पहले से ब्रीफिंग के लिए तय था, तो उसे विवाद बनाना पत्रकारिता नहीं, सिर्फ सनसनी की कोशिश है।

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sazanvor 15 Tagen

Nawtanki Pappu media

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Vijay Kumarvor 15 Tagen

योगी जी जनता दर्शन में सीधे फरियादियों से मिलते हैं और सदन में विपक्ष को जवाब देते हैं। ऐसे मुख्यमंत्री पर सवालों से भागने का आरोप सिर्फ सनसनी फैलाने की कोशिश है।

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Anand Palvor 15 Tagen

मोदी जी कि तरह प्रेस वार्ता करनी ही नहीं चाहिए थी

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[email protected]vor 15 Tagen

Shameon BJP Ministers and government #shameon

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नया भारतvor 15 Tagen

Bhagne ki aadat h inki

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#हिंदू गौरी राजपूत 🇮🇳🔱🏹⚔️⚜️🚩vor 15 Tagen

Haathi apni chal chalta rahta hai aur kutte - kuttiyan bhonkte rahte hai wahi haal hai tum jaise bikaau logo ka ...

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सन्तोष रा. पाण्डेय🇮🇳(सनातनी)vor 15 Tagen

सपा पालित पत्तलकार और सपा के कारनामे में अंतर है

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Prabhat singhvor 15 Tagen

Akhir ab yogi ji ko bhagna pad raha hai meeting me.

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Jaswantvor 15 Tagen

हजारों यूट्यूबर माइक और यह देखिए बोलकर पूरे देश में उत्पात मचाए रहते हैं। ब्राह्मण शिरोमणि पंडित अभिषेक उपाध्याय रोज सरकार गिरवाते हैं। यहां तक कि पत्रकारिता के नाम पर गाली गलौज और खुलेआम बेशर्मी से झूठ बोला जाता है। फिर भी प्रेस की आजादी नहीं है। अब आजादी का मतलब क्या चाहिए?

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Sheevum Goel AI (Proud हिंदू )🚩vor 15 Tagen

तो औरत पर घुमाके कंटाप मारना भी तो सही नहीं है

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ajit singhvor 15 Tagen

Vanaspati ka h ye khela

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Dmaslamkhanvor 15 Tagen

Thakur to gyooo

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vipin jainvor 15 Tagen

Superb

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Shivam Karmayogivor 15 Tagen

जब मुख्यमंत्री जी मंच की सीढ़ियों से नीचे उतरने लगते हैं तब वायरल होने के किए सवाल पूछे जाते हैं. कुछ बात तो है योगी आदित्यनाथ में जो अखिलेश से लेकर उनके साधारण कार्यकर्ता तक योगी आदित्यनाथ के नाम पर अपनी दुकान चलाना चाहते हैं गाइज.

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Sweta Srivastavavor 15 Tagen

योगी आदित्यनाथ ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो हर हफ्ते जनता दर्शन में बिना किसी बिचौलिए के सीधे लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं। विधानसभा में भी विपक्ष के हर सवाल और आरोप का जवाब देते हैं। जो नेता सदन और खुले मंच पर तीखे सवालों का सामना करता है, उस पर सिर्फ 10 मिनट की संगठनात्मक घोषणा के बाद सवालों से भागने का आरोप लगाना हास्यास्पद है। किसी प्रेस कार्यक्रम में पहले से तय होता है कि सवाल-जवाब होंगे या सिर्फ ब्रीफिंग। जब पहले ही साफ था कि कार्यक्रम सिर्फ अभियान की घोषणा के लिए है, तो कार्यक्रम खत्म होने के बाद हंगामा खड़ा करना पत्रकारिता कम और वायरल वीडियो बनाने की कोशिश ज्यादा लगती है। सवाल पूछना पत्रकारिता है, लेकिन हर कार्यक्रम को अपनी मर्जी से प्रेस कॉन्फ्रेंस समझ लेना पत्रकारिता नहीं है।

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Kavindra Shakya 🇮🇳vor 15 Tagen

कुर्सी से सबसे पहले उठे।😁😁

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