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यूपी का 'जंगलराज'
8 条评论

বাংলায়ও দুটি শব্দ

‘मुस्लिमों के लिए संविधान से पहले शरीयत’: आंबेडकर जयंती पर झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन अंसारी का ऐलान, कहा – हमारे सीने में है क़ुरान

Sarey congress vote bank members hi they

यूपी में बनारस, अयोध्या और अब प्रयागराज को विकसित करने के बाद योगी जी का ध्यान पश्चिम उत्तर प्रदेश की और है। उत्तर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में नक्सलवाद की समस्या नहीं है। जेवर हवाई अड्डे को विकसित किया जा रहा है । लेकिन फिल्म सिटी की चर्चा जिस प्रकार पहले होती थी, वह उत्तर प्रदेश में अब नहीं के बराबर है । इसका क्या कारण है नहीं कह सकते हैं। हो सकता है अब फिल्म उद्योग का वह स्थान रहा भी नहीं जो पहले था। बनारस में तमिल समागम को और विकसित करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि साथ में कुछ विदेशी भाषाओं की शिक्षा पर भी उत्तर प्रदेश की सरकार को जोर देनी चाहिए। विश्व स्तर का कोई भी शैक्षणिक संस्थान उत्तर प्रदेश में शुरू से नहीं रहा है। स्मार्ट सिटी की पहले चर्चा थी, वह भी अभी नहीं के बराबर है । इसका क्या कारण है, नहीं कह सकते हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत दिनों से क्षेत्रीय पार्टी शासन कर रही थी जिसका प्रयोग लगता है, फेल कर गया। क्योंकि कोई भी क्षेत्रीय पार्टी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक शासन नहीं कर सकती। जैसे कि आपने बंगाल में, बिहार में देखा। अब नया परिसीमन होने वाला है। परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश का क्या स्वरूप होगा, राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा,यह तो अभी कहना संभव नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि एक पिछड़ा राज्य के रूप में जो उत्तर प्रदेश को देखा जा रहा था, वह अब नहीं रह गया है। क्रिएटिविटी उत्तर प्रदेश में बहुत बढ़ चुका है। सही मायने में पूछिए तो मुझे यह जानकारी नहीं है कि उत्तर प्रदेश में कृषि की क्या स्थिति है। यानी खेती की क्या स्थिति है। यह पता नहीं चलता है। किसान आंदोलन का प्रभाव उत्तर प्रदेश में नहीं देखा गया। पंजाब से हरियाणा से दिल्ली के बीच में किसान आंदोलन का प्रभाव था और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ क्षेत्रों में किसान आंदोलन का प्रभाव शुरू से रहा है, महेंद्र सिंह टिकैत के समय से ही । उसको यदि छोड़ दिया जाए तो कुल मिलाकर के उत्तर प्रदेश में कृषि का प्रभाव की चर्चा ना सरकार करती है ना विपक्षी पार्टी करती है। उत्तर प्रदेश में सरकार की प्राथमिकता में विधि व्यवस्था और विपक्ष भी बराबर विधि व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। जिसके कारण कृषि ऐसे मुद्दा गौण हो चुके हैं। मुझे ऐसा लगता है कि कृषि का चर्चा उत्तर प्रदेश में इसलिए नहीं है क्योंकि उत्तर प्रदेश का कुछ प्रमुख जाति और समुदाय का लगाव कृषि से नहीं है जिस प्रकार का लगाव आप पंजाब में देखते हैं। आप बिहार में देखते हैं । बिहार में तो किसी से जुड़ा हुआ कुछ जातियां ऐसी है जिसके पहचान ही कृषि से जुड़ने के कारण हुई है। इसमें प्राचीन काल से आप कोईरी और कुशवाहा का नाम ले सकता है और फिर मध्य काल से भूमिहार जाति का संबंध कृषि से रहा है। भूमिहार जाति उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में यानी बलिया , आजमगढ़, बनारस, जौनपुर गोरखपुर आदि क्षेत्र में ही ज्यादातर है। लेकिन पूरे उत्तर प्रदेश में सामान रूप से यह जाति नहीं पाई जाती है जैसे कि उत्तर प्रदेश की अन्य जाति यादव, जाटव, ठाकुर,वैश्य समाज, ब्राह्मण और इसी प्रकार के अन्य अनेक जातियां हैं। समुदाय में मुस्लिम समुदाय का प्रभाव उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से है। यानी उनकी उपस्थित सभी क्षेत्रों में है। लेकिन चुंकि यह कृषि के कार्य से शुरू से ही नहीं जुड़े हुए हैं, इसलिए उत्तर प्रदेश में मुझे लगता है कि किसानों की बात नहीं के बराबर होती है । मुस्लिम और सनातन धर्म दो उत्तर प्रदेश में ऐसे हैं जिनका लगाओ धार्मिक कार्यों से ज्यादा है। जिसके कारण एक तो धर्म की चर्चा ज्यादा है और धार्मिक आधार पर इनका टकराव भी होता है। फिर जाति आधार पर भी टकराव उत्तर प्रदेश में देखे जाते रहे हैं। कुल मिलाकर आप कर सकते हैं कि उत्तर प्रदेश का संपूर्ण विकास अभी भी अपेक्षित है। लेकिन जो कहा जाता था कि विधि व्यवस्था की स्थिति ठीक रहेगी तो औद्योगिक विकास होगा, वैसा नहीं हो सका है! कम से कम निजी क्षेत्र में तो नहीं के बराबर ही औद्योगिक विकास हुआ है। भारत सरकार के मदद से कुछ केंद्रीय उपक्रमों की स्थापना उत्तर प्रदेश में हुई है जिसके साथ रेलवे और वायु संचार वायु का विस्तार हुआ है। @AHindinews

Jara bengal pe gobar kar do congress mutto

Bengal???😇

निंदनीय कृत्य है 🥲🥲

जंगली जानवर वियतनाम नहीं गया? जंगल जलेबी तो विदेश घूम रही है और उसका बाड़ा सवालों के जवाब दे रहा है।
