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Ana Sayfaya Dön

यूपी में बच्चों के खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही है, नाबालिग बच्चों का शोषण हो रहा है? अ से अनार रोज तुम खाओ, अखिलेश यादव को फिर से लाओ- आ से आम का पेड़ लगाओ ,, आजम खान को छुड़ाओ! शिक्षा की जगह यह क्या भरा जा रहा...

15,923 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

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राजस्थान के लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है।माननीय मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma जी।पिछले साल चार महिलाओं ये जहरीला केमिकल का पानी अराबा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पड़ा रहा बच्चों के स्वास्थ्य ओर भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है फिर भी अवैध फैक्ट्री धड़ल्ले से चलने दी जा रही है।ये केमिकल का पानी अब फिर से इन बच्चों को बीमार करने के साथ साथ पढाई में बाधा डाल रहा है यहां कक्षा में दिनभर मच्छरों का डेरा है तो बदबू से बच्चे बेहाल हैं Madan Dilawar जी को पिछले दिनों एक स्कूल लेकर टैग किया तो उन्होंने मुझे रिप्लाई दिया था कि कलेक्टर को निर्देशित किया गया है लेकिन थोड़ी देर बाद में वो रिप्लाई डिलीट कर दिया गया।क्या यही है शिक्षा मंत्री जी आपकी संवेदनशीलता।यहां चार पांच स्कूल में बच्चों को मौत दी जा रही हैं जोजरीनदी के प्रदूषित पानी से ओर आप कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हो।ये Arun Choudhary (modi ka parivar) की विधानसभा क्षेत्र है ओर यहा ये जहर Jogaram Patel ओर Gajendra Singh Shekhawat की मेहरबानी से आ रहा है जोधपुर शहर की स्टिल ओर टैक्सटाइल फैक्ट्री से।Ashok Gehlot Govind Singh Dotasra Tika Ram Jully Ravindra Singh Bhati RSPCB

Thar_Desert_Photography

21,041 görüntüleme • 1 yıl önce

गुजरात से आई एक खबर ने भरोसे का गिलास ही हिला दिया है...!!😲 रिपोर्ट्स के मुताबिक, साबरकांठा ज़िले में एक ऐसी नकली डेयरी यूनिट का भंडाफोड़ हुआ है जो कथित तौर पर वर्षों से यूरिया, डिटर्जेंट और अन्य रसायनों से दूध तैयार कर बाज़ार में सप्लाई कर रही थी। सोचिए… जिसे हम बच्चों के पोषण का आधार मानते हैं, वही अगर रसायनों का मिश्रण निकले तो ? कहा जा रहा है कि यह खेल करीब पिछले पाँच सालों से चल रहा था। तो सवाल उठना स्वाभाविक है निगरानी तंत्र कहाँ था ? नियमित जांच किस स्तर पर हो रही थी ? क्या खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था केवल कागज़ों में सख्त है ? कार्रवाई होना अच्छी बात है। लेकिन कार्रवाई से पहले की चुप्पी का हिसाब भी उतना ही जरूरी है। दूध सिर्फ एक उत्पाद नहीं है यह भरोसा है,यह घर की रसोई का विश्वास है,यह बच्चों और बुजुर्गों की सेहत से जुड़ा मामला है। अगर उसमें मिलावट होती है, तो यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं यह जनस्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। अब जरूरत है: ✔️ सख्त और पारदर्शी जांच की। ✔️ जिम्मेदारी तय करने की। ✔️ और ऐसे रैकेट्स पर स्थायी रोक लगाने की। क्योंकि जनता का भरोसा किसी प्रयोगशाला में नहीं बनता वह व्यवस्था की ईमानदारी से बनता है।

निर्मोही

19,611 görüntüleme • 7 ay önce