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यह आक्रोश जो आज सोशल मीडिया पर दिख रहा है बस चुनाव खत्म होने का इंतजार है ये आक्रोश सड़कों पर भी दिखेगा! #TeachersLivesMatter

Комментарии: 10

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Dwija Mishra2 лет назад

शिक्षक के जान की कोई कीमत नहीं क्या ? जब स्कूल बंद ही कर दिया गया तो शिक्षक को बुलाया जा रहा है, उनपे heat wave का असर नहीं होता क्या ? @NitishKumar #TeachersLivesMatter @yadavtejashwi @narendramodi @RahulGandhi @ANI

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Śhubhãm2 лет назад

#TeachersLivesMatter

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Ravi Yadav2 лет назад

Yes bilkul dikhna chahiye sir

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Vivekanand2 лет назад

@varunsingh2802 सबसे लाचारयदि कोई है इस देश में तो गुरुजी लोगसरकार उनसे भिखारी बनाकर घर-घर घूमवती है गली-गली से चुनकर बच्चों को मंगवाती हैइत्यादि इत्यादि इतने ही क्रांतिकारी कार्यसरकार करनी चाहती हैतो क पाठक कोस्वास्थ्य विभाग में क्यों नहीं भेजतीडॉक्टर को लूट मचाने की खुली आजादी क्यों S 4

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Adv Nitin Parihar2 лет назад

भाई मेरे घर मैं 4 govt शिक्षक है मैं फिर भी इनकी छोटी के विरोध करता हो . और सरकारी कर्मचारी भी तो काम कर रहे है .फिर इनको क्यों फ्री के पैसे दे सरकार आप कम करो पैसा लो ना तो सैलरी मत लो .

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Vikramaditya Singh2 лет назад

27 तरह के शिक्षक संघ हैं... इसलिए सरकार का आदेश हमेशा मजबूत स्थिति में रहेगा।

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kumar OMPRAKASH2 лет назад

Aap log kisi kaam ke nhi h, bs x pe aakros dikhaiye

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Anand🇮🇳2 лет назад

#TeachersLivesMatter #nitishjago #RIPKKPATHAK

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Anand🇮🇳2 лет назад

#TeachersLivesMatter #nitishjago #RIPKKPATHAK

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ARVIND PRAKASH(अरविंद प्रकाश)2 лет назад

#TeachersLivesMatter

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शादियों का सीजन शुरू हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हर जगह बारातों की चहल-पहल और शोरगुल दिख रहा है। गांवों और पहाड़ों की बात करें तो वहां की शादियों का मज़ा ही अलग होता है, सादगी भी है और अपनी मिट्टी की खुशबू भी। लेकिन एक चीज़ आज तक नहीं बदली है। बारातियों का बस की छत पर बैठकर जाना। यह चलन कब शुरू हुआ, शायद किसी को ठीक से याद नहीं होगा। हो सकता है पहले बच्चों ने अपने बड़े या नौजवानों को ऐसा करते देखा हो और वही आदत आगे बढ़ गई हो। पर हैरानी की बात यह है कि आज के समय में भी यह ट्रेंड खत्म नहीं हो रहा, बल्कि कई जगहों पर और बढ़ रहा है। सुरक्षा की नजर से यह कितना खतरनाक है, यह सब जानते हैं। फिर भी बारात का जोश कई बार समझदारी पर भारी पड़ जाता है। शादी की खुशी ज़रूर मनाएं, लेकिन अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान भी रखें। खुशी वही अच्छी लगती है जो सुरक्षित घर वापस लेकर जाए।

Kumaon Jagran

25,394 просмотров • 10 месяцев назад