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यह खुशबू पांडे पहले भी एक बार मस्जिद गई थी👇😅👇

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UP: मुजफ्फरनगर की 106 साल पुरानी मस्जिद "शत्रु" संपत्ति घोषित! मस्जिद की शिकायत राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन की तरफ से की गई थी। वहीं मस्जिद कमिटी ने कहा 1930 में ही मस्जिद वक्फ के नाम की जा चुकी है जिसके सभी डॉक्यूमेंट उनके पास मौजूद हैं। मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन के सामने स्थित मस्जिद को "शत्रु" संपत्ति घोषित किए जाने के बाद, मस्जिद के मोहतमिम मोहम्मद मुजीबुल इस्लाम ने गृह मंत्रालय के इस आदेश को गलत और अनुचित बताते हुए कहा कि अब वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। मोहतमिम मोहम्मद मुजीबुल इस्लाम ने बताया कि यह मस्जिद नवाब रूस्तम अली खान द्वारा वर्ष 1912-13 में बनवाई गई थी। नवाब रूस्तम अली और उनके दो अन्य भाई थे, जिनके हिस्से में यह जमीन आई थी। आसपास कोई मस्जिद न होने की वजह से नवाब रूस्तम अली ने यह जमीन मस्जिद के लिए दान कर दी थी। उनकी मृत्यु 1918 में हो गई थी और मस्जिद उनकी मृत्यु से पहले ही बन गई थी। मोहतमिम ने बताया कि इस स्थान पर पहले एक मुसाफिरखाना भी था, जो 1994 तक चला और फिर उसे मस्जिद में शामिल कर लिया गया। वे कहते हैं कि इस निर्णय को शत्रु संपत्ति घोषित करना गलत है। शत्रु संपत्ति उस संपत्ति को कहा जाता है, जिसका मालिक पाकिस्तान चला गया हो और उसकी यहां पर जमीन हो। मोहतमिम ने कहा कि मस्जिद बनवाने वाले नवाब रूस्तम अली यहीं पर पैदा हुए थे और यहीं पर उनकी मृत्यु हो गई। उनके बेटे कहीं भी जाएं, उनसे कोई मतलब नहीं है। कानून कहता है कि जो संपत्ति वक्फ कर दी जाती है, उस पर उस व्यक्ति या उनके परिवार का कोई हक नहीं रहता। मोहतमिम मोहम्मद मुजीबुल इस्लाम ने यह भी दावा किया कि 1946 के गजट में भी यह मस्जिद दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह संपत्ति शत्रु संपत्ति कैसे घोषित कर दी गई, यह समझ से परे है। अब मोहतमिम मोहम्मद मुजीबुल इस्लाम ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे और न्याय की मांग करेंगे।

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