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यह देखर सच में मन खुश हो जावे! आज रै दौर में भले ही विदेशी पहनावा आ गयो होवे, पण जकी मिठास म्हारी #राजस्थानी बोली में है, वा दुनिया री कोई और भाषा में कोनी। ❤️🙌 राजस्थानी भाषा री मिठास ही ओळखाण है कि म्हे किण माटी रा हां।...

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आज इस आवाज में दर्द है... राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों? क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही। राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं? वीडियो साभार Republic

Arvind Chotia

112,198 Aufrufe • vor 2 Monaten

सगळा जैसाण वासियां ने होली री घणै मान सुभकामनावां। होली फकत रंगा रो त्योहार कोनी, होली यादां में रंग भरण रो अर अपणायत ने जीवंत राखण रो पावन अवसर है। दाता महारावल बृजराज सिंह जी ने होली रो घणों'ही कोड हो। वे हर बरस जैसळमेर वासियां सागै हियों खोल'र होली रमता अर सगळा रै हियै अपणायत रो रंग भरता। आज जद होली मनावां, तो उंवां रो मुळकतों मुखड़ो अर अपणायत री सावठी रीत री घणी याद आवे है। आप सगळां सूं मिळती आ घणमुंगी सुभकामनावां, जैसाण वासियां रो हेत अर विसवास ही म्हारे सारूं साचो आसीस है। भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी सूं आ'हीज अरदास है कि सगळा जैसाण वासी हेत, समरसता अर भाईचारे रा रंगां में सदा रंगीज्या रैवे, अर म्हारो जैसळमेर यूं ही प्रेम, संस्कृति अर परम्परा री जोत सूं जगमगातो रह्वे।

Chaitanya Raj Singh

10,290 Aufrufe • vor 6 Monaten

मोर बोलै रे.... कभी-कभी संदेह होता है कि मैथिली ठाकुर का राजस्थान से कोई सीधा कनेक्शन है। लेकिन ऐसा है नहीं। वे विशुद्ध बिहारी हैं लेकिन अन्य भाषा के गीत गाते हुए उच्चारण में ऐसी शुद्धता बहुत कठिन काम होता है और वो भी इतनी कम उम्र में। निश्चित ही मैथिली पर मां सरस्वती की विशेष कृपा है। राजस्थान के ही एक हिस्से का व्यक्ति राजस्थान के दूसरे हिस्से की बोली बोलने में जोर खा जाता है। पिछले दिनों मैथिली ने राजस्थानी गीत "कंठी पर मोर बोलै, पण आ बनड़ी ना बोलै" गीत भी इसी शुद्धता के साथ पेश किया था। शायद वे हर भाषा के गीत समान शुद्धता के साथ गाती होंगी। ढेर सारी शुभकामनाएं। आप आनंद लीजिए Maithili Thakur

Arvind Chotia

52,221 Aufrufe • vor 1 Jahr

साथियों, राज्यपाल महोदय स्वयं महाराष्ट्र से आते हैं, हमें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है। अपनी मातृभाषा से प्रेम करना अच्छी बात है, लेकिन महामहिम को यह समझना होगा कि वे महाराष्ट्र के नहीं, बल्कि राजस्थान के राज्यपाल हैं! ऐसा लगता है कि महामहिम को राजस्थान की भाषा और यहाँ की संस्कृति समझ नहीं आ रही, इसीलिए उन्होंने सोचा कि चलो राजस्थान पर मेरी खुद की भाषा ही लागू कर देता हूँ! राजस्थानी भाषा को दरकिनार करके, उसे नीचे रखकर, मराठी भाषा को प्राथमिकता देना राजस्थान के करोड़ों युवाओं और छात्र शक्ति के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है!हम इस मंच से साफ कर देना चाहते हैं कि हम किसी भी भाषा का अपमान या अनादर नहीं करते। भारत की सभी भाषाएं हमारे लिए पूजनीय हैं, और राजस्थान का दिल इतना बड़ा है कि यहाँ हर भाषा के लिए हमेशा द्वार खुले हैं। लेकिन हमारा विरोध इस पक्षपातपूर्ण रवैये से है!एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि स्कूलों में राजस्थानी भाषा अनिवार्य करो, प्रदेश का युवा सालों से मांग कर रहा है कि हर यूनिवर्सिटी में राजस्थानी विभाग खोलो—तब तो सरकार और राजभवन की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं! और जैसे ही महाराष्ट्र सरकार से प्रस्ताव आता है, राज्यपाल जी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और उसे सब जगह लागू करने का आदेश दे देते हैं! क्या राजस्थान की यूनिवर्सिटीज राजस्थान के युवाओं के लिए हैं या अपनी पसंद की भाषाएं थोपने के लिए?आज इस पुतला दहन के माध्यम से हम राजभवन तक यह साफ संदेश पहुँचाना चाहते हैं: 'पहले मायड़ भाषा का सम्मान करो, फिर किसी और भाषा की बात करो!' हमारी मांग सीधी है—अगर मराठी के केंद्र खुलेंगे, तो उससे पहले राजस्थान की हर एक यूनिवर्सिटी में राजस्थानी भाषा का पूर्ण विभाग अनिवार्य रूप से खुलना चाहिए! अगर हमारी भाषा को उसका हक नहीं मिला, तो यह छात्र आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि और उग्र होगा!राजस्थानी भाषा को उसका हक दो!छात्र शक्ति ज़िंदाबाद! इंकलाब ज़िंदाबाद!" #RajasthanUniversity #ShubhamRewarRU

SHUBHAM REWAR

10,206 Aufrufe • vor 2 Monaten

तेज़बीर सिंह अर वाल्मीकि थापर री अगुवाई में 1974 में बनायी एक डॉक्यूमेंट्री “द सिटी देट जैसल बिल्ट” जिण में कैद है पाँच दशक पेल रौ जैसलमेर… वो शांत रेत, सोने रे ज्यों चमकतो किलो, हवेलियां री बेजोड़ नक्कासी अर सादगी भरो जनजीवन। लारले 50 बरसां में जैसलमेर विकास री नवीं ऊँचाइयाँ छुई है, पण आज भी पुरानी परम्परावां, संगीत री राग, शहर री गलियां, अर शहरवासीयां री जदोजहद रा नजारा मन ने छू जावै। आपणा पूर्वजां रो त्याग, बलिदान अर कठोर परिश्रम जैसलमेर ने दुनिया रे नक्शा माथे अमिट पहचान दीधी है। आज जद शहर बदल रियो है, आगै बध रियो है, ऐड़ी टेम में जरूरत है कि आपा अपनी कला, संगीत, स्थापत्य अर रीति-रिवाज ने सम्हाळकै राखां, अर पूर्वजां रे प्रति कृतज्ञ रेवां। कोशिश ऐड़ी होवणी चाइजे जिण में कृतज्ञता रे भाव साथे अतीत ने नमन करै अर भविष्य री दिशा में जिम्मेदारी सूं आगै बधै। Hindi Version तेज़बीर सिंह और वाल्मीकि थापर के निर्देशन में 1974 में बनी एक डॉक्यूमेंट्री "The City That Jaisal Built" जिसमें कैद है पांच दशक पहले के जैसलमेर की..... वो शांत रेत, सोने सा चमकता किला, हवेलियों की अद्वितीय नक्काशी और सादगी भरा जनजीवन…हर दृश्य आज भी मन को गहराई तक छू जाता है। पिछले 50 वर्षों में जैसलमेर ने विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है, मगर आज भी पुरातन परंपराएं, संगीत की राग, शहर की गलियां, शहरवासियों का जुझारू जीवन हमारी आत्मा से जुड़ा है। हमारे पूर्वजों के त्याग, बलिदान और परिश्रम ने जैसलमेर को विश्व मानचित्र पर अमिट पहचान दी है। आज जब शहर आधुनिकता की ओर अग्रसर है, आगे बढ़ रहा है, ऐसे में आवश्यकता है कि हम अपनी कला, स्थापत्य, संगीत और परंपराओं को संजोए रखें। कृतज्ञता के साथ अतीत को नमन करते हुए, विवेक के साथ भविष्य की ओर प्रस्थान ही हमारे पूर्वजों और हमारी गौरवशाली विरासत का सम्मान है।

Chaitanya Raj Singh

18,222 Aufrufe • vor 1 Jahr

मुंबई के राजस्थानी गुस्से में हैं राजस्थान में सरकार-विपक्ष नींद में हैं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सिरफिरों द्वारा मराठी बोलने की बात पर आए दिन हो रही मारपीट की घटनाएं जब हद से ज्यादा बढ़ गई तो राजस्थानी समाज सड़कों पर उतर आया। आप इस जुलूस में शामिल लोगों के नारे सुनिए। यही नर राजस्थानियों के हैं और यही नारे महाराष्ट्र वालों के भी हैं लेकिन उन्हें अपना प्रभुत्व साबित करने के लिए जोर इन पर ही चलना है। खैर! जिसमें जितना जोर होगा वह चला लेगा क्योंकि हालात जंगल राज जैसे ही हैं और कोई ना कोई एक भारी भी पड़ जाएगा जिसमें जोर होगा। सवाल राजस्थान की सरकार और राजस्थान के विपक्ष से है। एक भाषा के नाम पर राजस्थान के लोगों से लगातार बदतमीजी हो रही है लेकिन राजस्थान सरकार का कोई कड़ा वक्तव्य अभी तक नहीं सुनने में आया। राजस्थान के विपक्ष ने भी राजस्थान की भाजपा सरकार या महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को घेरने जैसा अभी तक कोई उपक्रम नहीं किया है। मुंबई में रह रहे राजस्थानियों या कर्नाटक में रह रहे राजस्थानियों या तमिलनाडु में रह रहे राजस्थानियों से हर चुनाव में वोट मांगने राजस्थान के नेता जाते हैं। साफे पहनकर आते हैं। अच्छी आवभगत करवाकर आते हैं और अच्छे उपहार भी लेकर आते हैं। बदले में देते क्या है? सिर्फ भरोसा और वह भी झूठा। आज मुंबई में रहने वाला राजस्थानी समाज अपने खुद के दम पर अपनी लड़ाई लड़ रहा है। उनके साथ कोई नहीं आया है। आप सिर्फ एक साल पहले हुए लोकसभा चुनाव के वक्त के राजस्थान के नेताओं के ट्वीट खंगाल लीजिए। आपको यह सभी नेता महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में वोट मांगते हुए मिल जाएंगे लेकिन आज जब मुंबई के लोग संकट खेल रहे हैं तब कोई भी उनके बीच जाकर दखल देने की सहमत उठाने के लिए तैयार नहीं है। मुंबई या कहीं भी और जगह पर रहने वाले राजस्थानी समाज के लोगों को खुद को ही मजबूत करना होगा और अपनी लड़ाई लड़नी होगी। हां, अगली बार यह वोट मांगने आएं तो उनको द्वार से ही लौटा दीजिए। उनकी सभाओं में मत जाइए। उनको यह अहसास करवाइए कि आप सिर्फ वोट देने के लिए नहीं है।

Arvind Chotia

46,384 Aufrufe • vor 1 Jahr

27 अक्टूबर, 1999 — मैंने लोकसभा में पब्लिक सेक्टर के निजीकरण और प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की आवश्यकता का मुद्दा उठाया था। इसके साथ ही, मैंने चेतावनी दी थी कि यदि पब्लिक सेक्टर का निजीकरण चलता रहा तो प्राइवेट कंपनियाँ देश पर अपनी शर्तें थोपेगा, जो आज सच में हो रहा हैं। मैं पब्लिक सेक्टर में हो रहे निजीकरण के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त करना चाहता हूँ, जिसे कांग्रेस और भाजपा—दोनों का समर्थन प्राप्त है। आने वाले समय में पूरा पब्लिक सेक्टर क्षेत्र प्राइवेट सेक्टर में परिवर्तित होता दिखाई दे रहा है। मैं इसमें दो बातों को अलग-अलग रूप से देखता हूँ, पहला, प्राइवेट सेक्टर में किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं है, और दूसरा, यदि एक दिन पूरा पब्लिक सेक्टर प्राइवेट सेक्टर बन जाता है, तो परोक्ष रूप से हम आरक्षण के लाभों को समाप्त कर देंगे। संसद के भीतर ही एक सामाजिक परिवर्तन घटित हो रहा है, भले ही उसकी गति धीमी है - वंचित वर्गों का रिप्रजेंटेशन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। हम लिबरलाइजेशन की नीति का अनुसरण कर रहे हैं। लिबरलाइजेशन नीति का प्रभाव क्या है? इसका प्रभाव यह है कि संसद की आर्थिक शक्ति धीरे-धीरे कम होती जा रही है। आने वाले समय में हम एक नई परिस्थिति का सामना करने जा रहे हैं। यदि आर्थिक शक्ति और राजनीतिक शक्ति के बीच पूर्ण विभाजन हो जाता है और इस सदन के चरित्र तथा सामाजिक संरचना में परिवर्तन होता है, तो यह सदन आर्थिक शक्ति से वंचित हो जाएगा। तब इसके पास केवल राजनीतिक शक्ति रह जाएगी, जिसका वास्तविक अर्थों में कोई विशेष महत्व नहीं होगा। अब समय आ गया है कि हम इस विषय पर गंभीरता से बैठकर चर्चा करें, इससे पहले कि स्थिति इतनी बिगड़ जाए कि वह हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाए। 27 अक्टूबर, 1999, को लोकसभा में मेरे भाषण को सुनिए। जय भीम. जय संविधान.

Prakash Ambedkar

34,592 Aufrufe • vor 7 Monaten

राजस्थान में पहली बार ऐसी संवेदनहीन सरकार देखी है, जिसे एक अनशनरत युवा की बिगड़ती सेहत भी दिखाई नहीं दी। जिस राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की मांग भाजपा वर्षों तक उठाती रही, आज उसी मांग को लेकर एक नौजवान शुभम रेवाड़ 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठा रहा लेकिन सरकार ने कोई परवाह नहीं की। छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग भी भाजपा नेताओं की रही है, लेकिन आज सत्ता में आते ही वही मांगें सरकार को दिखाई नहीं दे रहीं। एक युवा राजस्थानी भाषा, छात्रहित और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। उसकी जान पर बन आई है, फिर भी सरकार का नजरअंदाज करती रही, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। ये दुःखद है कि सरकार अपने विवेक से नहीं, पर्चियों से चल रही है। उसे युवाओं की चिंता नहीं है। लेकिन हमें राजस्थान के भविष्य की चिंता है। 36 कौम को अपने युवाओं की चिंता है, उनके सपनों को यूं दम तोड़ने नहीं देंगे।

Govind Singh Dotasra

35,269 Aufrufe • vor 1 Monat

तेल का गेम — और मोदी का खेल समझिए पूरा पढ़ना — देशभक़्त हो तो शेयर करना न भूले आज अचानक दुनिया में शोर मचा है कि अमेरिका भारत को धमका रहा है ...“रूस से तेल मत खरीदो, वरना टैक्स बढ़ा देंगे।” लेकिन कोई यह नहीं देख रहा कि इसी दबाव के बीच भारत ने तेल के खेल में एक ऐसी चाल चल दी है जिससे अमेरिका, वेनेज़ुएला और पूरा वेस्टर्न ब्लॉक हिल गया। गायाना… दक्षिण अमेरिका का छोटा सा देश,लेकिन उसके नीचे दबा पड़ा है 11 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल। और इसी गायाना ने भारत की कंपनियों ... ONGC और रिलायंस को 2026 की ऑफशोर ब्लॉक नीलामी में बुला लिया है। यानी अब भारत सिर्फ तेल खरीदेगा नहीं,खुद खोजेगा, खुद निकालेगा,और खुद अपने भविष्य की ऊर्जा तय करेगा। यही वह चीज़ है जिससे वॉशिंगटन को चुभन हो रही है। क्योंकि जब कोई देश अपनी ऊर्जा पर खुद कंट्रोल पा लेता है,तो उसे धमकाना आसान नहीं रहता। उधर वेनेज़ुएला गायाना के तेल पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा था।सीमा पर तनाव,कंपनियों को डराना,और तेल की राजनीति। लेकिन जैसे ही वह खेल बिगड़ा,भारत पहले से ही गायाना में अपनी जगह बना चुका था। तेल के बाजार में पहले एंट्री करने वाला ही असली फायदा उठाता है। आज जब अमेरिका बोल रहा है,तब भारत पहले से खेल में बैठा हुआ है। यह सिर्फ व्यापार नहीं है।यह ऊर्जा सुरक्षा है।यह रणनीतिक आज़ादी है।यह भविष्य की तैयारी है। और यही बात कांग्रेसी- लिब्रांडुओ को सबसे ज्यादा खल रही है। भारत अब उस दौर में नहीं है जहाँ कोई बाहर से फोन करके हमारी अर्थव्यवस्था चला दे। अब फैसले दिल्ली में होते हैं,और असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। नमो नमः - जय मोदीराज

Hardik Bhavsar

44,725 Aufrufe • vor 8 Monaten

मैं एक दक्षिण भारतीय हूँ। तेलुगु मेरी मातृभाषा है। मैंने अपना पूरा जीवन तेलुगु भाषा और तेलुगु टेलीविजन के लिए काम करते हुए बिताया है। लेकिन आज जीवन में पहली बार मैंने हिंदी में एक वीडियो बनाया। क्यों? क्योंकि मैं अपने उत्तर भारतीय भाइयों और बहनों से दिल से बात करना चाहता था। आज जिस परिसीमन की बात हो रही है, उससे दक्षिण भारत के राज्यों को कितना नुकसान हो सकता है, यह समझाना जरूरी लगा। यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं है, यह हमारे देश के संतुलन और न्याय का सवाल है। मैं आपसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि यह महान भारतवर्ष हम सबका है। जितना अधिकार उत्तर भारत का है, उतना ही अधिकार दक्षिण भारत का भी है। और अगर दक्षिण भारत के साथ कोई नाइंसाफी होती है, तो यह सिर्फ दक्षिण की नहीं, पूरे भारत की चिंता होनी चाहिए। इसलिए मैंने आज पहली बार हिंदी में बात करने की कोशिश की, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर समझ सकें और एक-दूसरे के साथ खड़े हो सकें। उम्मीद है आपको मेरी हिंदी समझ आई होगी, और अगर कहीं कोई त्रुटि रह गई हो तो दिल से क्षमा चाहता हूँ। आइए, भाषा से नहीं, भावना से जुड़ें। क्योंकि हम सब मिलकर ही भारत हैं। 🇮🇳❤️

Ravi Prakash Official

305,071 Aufrufe • vor 5 Monaten

दलितों पर अत्याचार के मामले में भाजपा सरकार के समय में यूपी नंबर 1 बन गया है। सवाल ये है कि दलितों पर हमलों और दलितों के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा अपराधों में, वो भी ख़ासतौर से दलित महिलाओं के उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की वारदातों में उप्र, राजस्थान, मप्र, बिहार, ओड़िशा, महाराष्ट्र जैसे वो ही राज्य क्यों है, जो भाजपा शासित हैं। भाजपा मूलतः परम्परागत प्रभुत्ववादियों की पार्टी है और वर्चस्ववादी भाजपाइयों की बुनियादी सोच सामंतवादी है, जिसमें ग़रीब, वंचित, दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, आधी आबादी (महिलाओं) और आदिवासियों के लिए सिर्फ़ अपमान और ज़लालत के अलावा और कुछ नहीं है। मन, मानस और आचरण में भाजपाई आज़ादी से पहले की ही सोच में जी रहे हैं। इसीलिए भाजपाई संविधान के भी विरोधी हैं क्योंकि भाजपा में संगठन और सरकार के प्रमुख पदों पर हमेशा ही केवल कुछ ख़ास लोग ही विराजमान रहते हैं और बाक़ी दौड़-भाग, डंडा-झंडा, बैनर-दरी के काम औरों को दे दिये जाते हैं। भाजपा के अंदर पदनाम भले किसी दलित, पिछड़े को मिल जाए पर ‘पदमान’ कभी नहीं मिलता। उनके नाम से चुनाव लड़े जाते हैं लेकिन मुख्यमंत्री की तो छोड़ो उन्हें और भी कोई कुर्सी नहीं दी जाती है। अगर सच में कोई अपने ज़मीर की आवाज़ सुने तो वो ऐसे लोगों के हाथ न तो उत्पीड़ित हो और न ही अपमानित, ये बात अलग है कि वो अपने स्वार्थ और लालच की वजह से समझौता कर रहा है। दलित कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

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आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

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भगवा आतंकवाद का दुष्प्रचार एक व्यापक षड्यंत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद से ही हमारे दिमागों में यह बात भर दी गई थी, जिसे सुषमा स्वराज जी ने 1996 में 13 दिन की सरकार के विश्वास मत पर चर्चा के दौरान संसद में कहा था कि दिल्ली की लुटियंस जोन में तब तक आपको प्रबुद्ध 'इंटेलेक्चुअल' नहीं माना जाता, जब तक आप अपने भारतीय होने पर ग्लानि और हिंदू होने पर शर्म का अनुभव न करें। लेकिन जब 1990 के दशक में हिंदुत्व का उभार दिखा और अटल जी की सरकार के दौरान 2003–2004 आते आते भारत की इकोनॉमी ग्रोथ की भी सक्सेस स्टोरी दिखने लगी, उसके बाद दुनिया की तमाम वो शक्तियां सक्रिय हो गईं जो आज मोदी जी की सरकार को अस्थिर करने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हैं, उनका एक ही उद्देश्य है कि भारत की मूल शक्ति हिंदू धर्म को जागृत नहीं होने देना चाहिए। इसलिए 2004 के बाद जो कांग्रेस की सरकार आई, उसमें ऐसे अवांछित तत्व मौजूद थे जो जाने में या अनजाने में इनफ्लुएंस हो रहे थे उन भारत विरोधी तत्वों का मोहरा बनते गए । अब आज सारी की सारी बातें अब बहुत ही स्पष्ट नजर आ रही हैं। आज आप देख लीजिए हिंदुओं को उत्तर-दक्षिण में लड़ाना है। हिंदी-माराठी, हिंदी-कन्नड़ और हिंदी-बांग्ला, हिंदुओं को भाषा में लड़ाना है। प्रांत में लड़ाना है, और जम कर जातियों में लड़ाना है। भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह का ख्वाब ऐसे ही सच थोड़े न होने वाला है। हिंदुओं को आपस में लड़ा कर कमजोर करना ओर हिंदू आस्था के हर प्रतीक जिसमें सबसे मुख्य भगवा है उसको आरोपित कलंकित करना। लेकिन भारत के राष्ट्रीय ध्वज में भगवा ही एकमात्र रंग है जो त्याग और बलिदान का प्रतीक है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

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आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए : देखिए, एक तो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। एक तरफ तेल और गैस को लेकर जो स्थिति बनती जा रही है, तो राहुल गांधी ने पहले ही वॉर्न किया था कि ये स्थिति बनेगी। हमेशा सरकार लेट कर देती है। तैयारी समय पर करनी चाहिए, क्योंकि वॉर हो गया है, तो वॉर के कारण ही ये स्थिति बनी है। तो आपके पास जस्टिफाई करने का कारण है, खाली इतना ही कि आप जनता को विश्वास में लो कि भाई देखिए, वॉर हो गया, हमारी मजबूरी है, और यहाँ ये कमियाँ रह गईं या नहीं रही हैं, हम प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कोई तकलीफ नहीं आए, कम से कम तकलीफ आए। अब जो प्रधानमंत्री ने हाउस में बोला, वो तैयारी उस ढंग से नहीं की। आलोचना के शिकार भी हुए। ये पूरा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की जो स्थिति बनी है, अब किस दिशा में जाएगा, कोई नहीं जानता। और दूसरा, हमारे ट्रंप जो हैं, मिस्टर ट्रंप, पता नहीं जिस प्रकार उनका व्यवहार है मोदी जी के प्रति,कभी कहते हैं मेरे वो दोस्त हैं, कभी कहते हैं कि वो मुझे खुश करने में लगे हुए हैं, कभी कहते हैं कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूँ। आज तक मैंने किसी भी राष्ट्रपति को दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसे कमेंट करते नहीं सुना। वो वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को किडनैप कर सकता है एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के प्रेसिडेंट को किडनैप कर ले और दुख इस बात का रहा कि दुनिया के किसी मुल्क ने निंदा नहीं की, कंडेम नहीं किया, दुख प्रकट नहीं किया। ये दुनिया के लिए बहुत-बहुत बुरा संकेत है। जो हुआ है, सब जानते हैं। अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। मतलब आप बताइए, पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमारे देखते हुए भी हमने देखा—65 के वॉर में क्या थी, 71 में क्या थी, कारगिल में क्या थी हमेशा मुँह की खानी पड़ी। वो आज जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के अंदर भी, तुर्की उनका साथ दे रहा था, हमारे साथ कोई नहीं था। इस प्रकार के हालात में देश चल रहा है। समझना चाहिए, कहाँ पाकिस्तान और कहाँ हिंदुस्तान है। उसके बावजूद भी वो समझौते की बात कर रहा है, डायलॉग वो करवाएंगे। और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका ये कहना कि वो दलाली का काम कर रहा है, ये बहुत ही गलत है। मैं समझता हूँ कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा काम में नहीं ले सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। मैं तो मानता हूँ कि हो सकता है उनके मुँह से स्लिप ऑफ टंग हुआ हो। अगर ऐसा हुआ है तो अलग बात है, उनको सॉरी फील करना चाहिए, नहीं तो मैं समझता हूँ कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए। आप कैसे कह सकते हो कि दलाली कर रहा है? दलाली होता क्या है? अगर दुनिया के मुल्कों में शांति स्थापित होती है हिंसा तो हिंसा ही होती है तो मुल्क कहाँ जाएगा? तीसरे विश्व युद्ध के रूप में जाएगा? थर्ड वर्ल्ड वॉर के रूप में जाएगा? कहाँ जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरनाक हालात में, जब दुनिया में आग लगी हुई है, वहाँ शांति स्थापित करने के लिए हर वर्ग को, हर मुल्क को प्रयास करना चाहिए। और उसके अंदर आप कह रहे हो कि दलाली कर रहा है ये बात मुझे समझ में नहीं आई। ऐसे हालात में देश चल रहा है। और लोग सब चिंतित हैं कि हमारी स्थिति कहाँ थी और कहाँ पहुँच गई। कहाँ इंदिरा गांधी का जमाना था—90 हजार से अधिक सैनिकों को, जनरल, कर्नल, मेजर को यहाँ अरेस्ट करके इंडिया में ले आए थे। 90 हजार से अधिक लोगों को, लगभग एक लाख लोगों को। और आज देश की हमारी स्थिति क्या है, आपके सामने है। ये जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति हुई है।

Ashok Gehlot

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जो लोग कल तक यह कहते थे कि कुंभ में अधिक लोग नहीं आ रहे हैं, आंकड़े बढ़ा चढ़ाकर दिखाए जा रहे हैं वही लोग आज आरोप लगा रहे हैं कि इतने ज़्यादा लोग आ रहे हैं जिस कारण से जाम हो रहा है। अब या तो पहले की बात सच थी या दूसरी बात सच। वास्तविकता ये है की वो लोग हैं जो हिन्दू धर्म से जुड़े किसी भी मुद्दे के ऊपर केवल नुक्ताचीनी और लांछित करने का ही आधार ढूंढते है। आज इनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कुंभ इस विराट जन समागम में तमिलनाडु में 2023 में eradication of Sanatan Dharm और दुनिया के कई विश्वविद्यालयों और थिंक टैंक में संदिग्ध स्रोतों से धन प्राप्त कर के 2021 में हुई कॉन्फ़्रेन्स dismantling global Hindutva का समर्थन करके हिन्दू समाज को जात-पात के टुकड़ों में बांटकर एक आध टुकड़े का कट्टरपंथी वोटों के साथ साझेदारी करके सत्ता के एक टुकड़े को पाने का ख़्वाब जिसे गंगा जमुनी तहज़ीब जैसे शब्दों की चाशनी में परोसा जा रहा था वो बाँटने का ख़्वाब अब गंगा जमुना के संगम में बहता नज़र आ रहा है। समाजवादी पार्टी का तथाकथित PDA जो वास्तविकता में सत्ता के केंद्रों में किसी भी वर्ग को स्थान न देकर मैं केवल एक परिवार की सत्ता को बचाने का उपकरण मात्र है जो पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनावों और अब मिल्कीपुर उपचुनाव के बाद बहुत धुंधला होता नज़र आ रहा था अब कुंभ की इस भारी भीड़ और जन समागम में अपना अस्तित्व खोता हुआ नज़र आ रहा है। इन दलो को हिन्दू धर्म और श्रद्धालुओं की सुविधा से कोई लेना देना नहीं है इन है अपनी बाँटने वाली राजनीति की सुविधा ख़तरे में पढ़ने की चिंता है

Dr. Sudhanshu Trivedi

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बहुत मुश्किल से ये क्लिप मिली है जो शरजील इमाम का पूरा भाषण है आप पूरा भाषण सुनिए और सोचिए कि यह व्यक्ति कितना खतरनाक भाषण दे रहा था और किस तरह से पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की पूरी प्लानिंग बना रहा था “हमें सभी मुसलमानों को इकट्ठा करना है सबसे पहले हमें पूर्वोत्तर को भारत से काट देना है आपने देखा होगा यह जो मैप है उसमें चिकन नेक आता है वह पूरा इलाका मुसलमानों का है उसे पूरी तरह से ब्लॉक कर दो रेल की पटरियां उखाड़ दो सब तो डालो भारत की फौज नार्थ ईस्ट ना जा सके और आज शाम को नागालैंड को भारत से अलग कर दो जब तक हम भारत को अलग-अलग हिस्से में नहीं तोड़ेंगे तब तक हमारा मकसद नहीं पूरा होगा शाहीन बाग धरने के मुख्य आयोजन करता शरसुल इमाम का भाषण सुनिए और इसी शरसुल इमाम के साथ मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मैं खड़ा हूं यह अपने भाषण में एक और बात कहता है कि कन्हैया कुमार हो या दूसरे हिन्दू वामपंथी हो यह सभी हिंदू है और कहीं न कहीं इनके मन में भारत के प्रति प्रेम है यह हमारे प्रोटेस्ट में आते हैं फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं । कन्हैया कुमार ने बंगाल बिहार में रैली किया 5 लाख लोग थे लेकिन उसका क्या नतीजा निकला कुछ नहीं अगर वही 5 लाख लोग हमारी रैली में आ जाए तो हम भारत को जला देंगे तोड़ डालेंगे बर्बाद कर देंगे और हां यदि आप सोचते हैं कि शिक्षा से मुसलमानों के विचार को आप बदल सकते हैं तब आप दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख है। भाषण दे रहा है यह व्यक्ति शरसूल इमाम उच्च शिक्षित है आईआईटी मुंबई से आईटी इंजीनियर है और भारत की दो बड़ी आईटी कंपनियों में जॉब किया है उसके बाद यह जेएनयू से आईटी में पीएचडी कर रहा है इतना ही नहीं यह आईआईटी मुंबई में विजिटिंग फैकेल्टी भी रहा है और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी विजिटिंग फैकेल्टी है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

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