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राजेंद्र सिंह गुड्डा किसी के पीछे पड़ते नहीं है और पड़ जाते हैं तो पीछा छोड़ते नहीं है.. यदि पीछे पड़ गए तो समझो उसका कैरियर खत्म हो गया। शुभकरण चौधरी का राजस्थान में हार का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब ओला परिवार टारगेट पर है।

36,271 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Anop Choudharyvor 1 Jahr

मेरे को यह समझ नहीं रहा यह सामने वालो को टोपी पहना रहा है या सामने वाले इसको पहना रहे है

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OFFICIAL BHATI 👑vor 1 Jahr

इतने दिनों तक में इनको अच्छा मानता था पर आज के बाद मेरी नजर में इनकी कोई वेल्यू नहीं..😡😡. वोटो के लिए इतना गिर जाने से तो अच्छा हार जाए तो ही बढ़िया..☺️

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HR Beravor 1 Jahr

फिर खुद क्यूँ lad रहा है किसी मुसलमान को ladva de itna prem h to

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सुरा संदीप चौधरी 🥇vor 1 Jahr

गुढ़ा 20 हजार वोट ले ले गा क्या मुझे से मुस्किल लग रहा हैं

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kv bannaaa rathorevor 1 Jahr

इतने तो सामने बैठे हैं।

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Rajesh Kumarvor 1 Jahr

राजेन्द्र सिंह गुढा समर्थक भी नेताजी की तरह पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने के समर्थक है क्या?

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kv bannaaa rathorevor 1 Jahr

इनके बारे में क्या कहना

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Ramsa Choudharyvor 1 Jahr

राजेन्द्र सिंह गुड़ा ❌ रहमान शाह गन्नी ✔️ 😆

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sunita choudharyvor 1 Jahr

गुड़ा के रिश्तेदार को भगा दिया है‌ भारत देश से

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kv bannaaa rathorevor 1 Jahr

किसको

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अगर आज हम पीछे जा रहे हैं, तो इसके जिम्मेदार सिर्फ हमारे विरोधी नहीं… हमारे अपने नेता भी हैं। जब भाजपा NDA जैसा गठबंधन बना सकती है, कांग्रेस INDIA जैसा गठबंधन बना सकती है, तो फिर अम्बेडकरवादी नेता अम्बेडकरवादियों का महागठबंधन क्यों नहीं बना सकते? उत्तर प्रदेश में अगर अम्बेडकरवादी दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे, तो दलित वोटों का बिखराव होगा, और इसी बिखराव में भाजपा की जीत छिपी है। सवाल सत्ता का नहीं है। सवाल हमारे अस्तित्व, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी का है। नेताओं को अब तय करना होगा…. अपनी-अपनी पार्टियों की सीमाओं में रहना है या बहुजन समाज के भविष्य के लिए एक मंच पर आना है? अगर अम्बेडकरवादी नेता एकजुट हो गए, तो हमारी सरकार बने या न बने, लेकिन उत्तर प्रदेश में हमारे बिना भी किसी की सरकार नहीं बनेगी। अब वक्त इतिहास पढ़ने का नहीं, इतिहास बनाने का है।

Abhishek Kumar Jatav ( बहुजन शायर )

11,259 Aufrufe • vor 1 Monat