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राजस्थान भारत का ऐसा राज्य है जहां ब्राह्मणों की जनसंख्या 7% है, लेकिन 👇 मुख्यमंत्री - ब्राह्मण डीजीपी - ब्राह्मण मुख्य सचिव - ब्राह्मण लोकायुक्त - ब्राह्मण RHRC अध्यक्ष - ब्राह्मण मुख्यमंत्री के 4 OSD ब्राह्मण है। राजस्थान में 24 राज्य विश्वविद्यालय है,जिसमें लगभग 11 ब्राह्मण वाइस चांसलर है,50%... show more
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जब तक बहुजन समाज इन बातों को नहीं समझेगा तब तक नीली क्रांति होना मुश्किल है।

इसे कहते है राजनीति. 7% आबादी वाली ब्राह्मण समाज ने सत्ता संभाली और अहम पदों पर अपने समाज के लोगों को बिठाया। दुसरी तरफ़ देश भर कांशीराम के मिशन का ढिंढोरा पीटने वाले कुकरमुत्ते 100-200 वोट पाकर अपनी खुन्नस निकाला करते है #केकड़ा_प्रवृत्ति_समाज Congratulations to Brahmin family

"राजस्थान बना देश का पहला हिंदू राज्य" राजस्थान में ब्राह्मणों की जनसंख्या ७% होने के बावजूद उच्च पदों पर उनकी अच्छी खासी उपस्थिति है। यह एक दिलचस्प विषय है जिस पर चर्चा की जा सकती है। राजस्थान के इतिहास में क्षत्रिय वंशों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जैसे कि कछवाहा वंश [१]। लेकिन वर्तमान में ब्राह्मण समुदाय की उच्च पदों पर उपस्थिति को देखते हुए, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राजस्थान को ब्राह्मणस्थान कहना उचित होगा। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राजस्थान एक विविध और बहुसांस्कृतिक राज्य है, जहां विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। इसलिए, राजस्थान को किसी एक जाति या समुदाय के नाम पर रखना उचित नहीं होगा। इसके बजाय, हमें राजस्थान की विविधता और बहुसांस्कृतिक विरासत को स्वीकार करना चाहिए और इसे एक ऐसे राज्य के रूप में देखना चाहिए जो विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साथ लाने का प्रयास करता है।

राजस्थान हिंदुराष्ट्र की तरफ बढ़ रहा हैं इससे किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए ओर हिंदुराष्ट्र में ब्राह्मण ही सर्वमान्य है बाकी जातियां मंदिर में पूजा पाठ करो

वो क्यों आगे है क्योंकि OBC उनकी गुलामी करता है

फिर भी दूसरों पे आरोप लगा रहे हैं जमींदार हम भूमि हीन है

तुम पव्वा पीकर नाली में गिरना बंद करो और पढ़ाई करो, ब्राह्मणों को कोसकर तुम्हारा विकास नहीं होगा और न ही चंदू की रैली में 100 रु दिहाड़ी पर नारे लगाकर ।

पूरे भारत में यही खेला है, ओबीसी इनका विरोध कर नहीं सकता,ओबीसी ब्राम्हणों के आगे ढाल की तरह खड़े हैं।sc St अपनी सामाजिक, आर्थिक ,और छुआछूत, शोषण जैसी स्थिति से ही जुझ रहे है। बाकी का क्या कहे।

तुम्हें ब्राह्मणों से क्या तकलीफ है जो मेहनत करेगा वह आगे जाएगा तुम भी मेहनत करो प्रधानमंत्री बन जाओ ना । प्रधानमंत्री बनने के लिए त्याग बलिदान देश सर्वोपरि होता है सभी धर्म का सम्मान करना पड़ता है सभी जाति-पाति को छोड़कर एक राष्ट्र हित में काम करना पड़ता है
