Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

रोटी कपड़ा और मकान के चक्कर में हम परिवार से दूर हैं

75,356 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

Фото профиля मुसाफिर🇮🇳
मुसाफिर🇮🇳2 лет назад

क्या कहने जी

Фото профиля Pinki
Pinki2 лет назад

So beautiful

Фото профиля रानी पुरोहित
रानी पुरोहित2 лет назад

रोटी कपड़ा मकान के चक्कर में लोग परिवार घर से दूर होते हैं

Фото профиля तृप्त ...🖤
तृप्त ...🖤2 лет назад

bhut behtrin bhai

Фото профиля मासूम लड़का 🖤
मासूम लड़का 🖤2 лет назад

सही कहा आपने भाई

Фото профиля Voice4Peace1889
Voice4Peace18892 лет назад

Sunday Vibes 🌻

Фото профиля jay
jay2 лет назад

मजबूरी है, होना पड़ता है

Фото профиля मृदुल눈
मृदुल눈2 лет назад

Aha kya jodi

Фото профиля Aman Yaduvanshi INC
Aman Yaduvanshi INC2 лет назад

बहुत खूब कहा

Фото профиля annie
annie2 лет назад

true

Похожие видео

क्यों Dunki हुए हरियाणा के युवा? भाजपा द्वारा फैलाई गई ‘बेरोज़गारी की बीमारी’ की कीमत लाखों परिवार अपनों से दूर हो कर चुका रहे हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान हरियाणा के उन युवाओं से मुलाकात हुई जो घर परिवार से दूर खुद को पराए मुल्क में खपा रहे हैं। भारत लौटने पर जब उनके परिवार से मिला तो उनकी आंखें दर्द से छलक उठी। अवसरों के अभाव ने बच्चों से उनके पिता और बुजुर्गों से उनके बुढ़ापे का सहारा दूर कर दिया है। 10 वर्षों में भाजपा ने हरियाणा समेत देशभर के युवाओं से रोज़गार के अवसर छीन कर उनके साथ घनघोर अन्याय किया है। टूटे भरोसे और हारे मन से मजबूर हो कर युवा ‘यातनाओं की यात्रा’ कर रहे हैं। डार से बिछड़े इन प्रवासी पंछियों को अगर अपने देश में, अपनों के बीच बस जीविका कमाने का मौक़ा भी मिले तो ये अपना वतन कभी नहीं छोड़ेंगे। हमारा संकल्प है कि कांग्रेस सरकार बनते ही हम हरियाणा में एक ऐसी व्यवस्था बनाएंगे जिसमें युवाओं को सपनों के लिये अपनों से दूर नहीं होना पड़ेगा।

Rahul Gandhi

555,856 просмотров • 1 год назад

प्रयागराज में शिक्षा चयन बोर्ड के सामने बेसिक शिक्षक के अभ्यर्थियों और लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर के शिक्षामित्रों के ‘2 जून को 2 जून की रोटी के संघर्ष’ का प्रदर्शन सच में चिंतनीय है क्योंकि एक तरफ 7 सालों से शिक्षा चयन बोर्ड की बेसिक शिक्षकों की वैकेंसी नहीं आई है और दूसरी तरफ़ शिक्षा मित्रों को मात्र 11 महीने ही वेतन मिलता है और वो भी केवल 10 हज़ार प्रति माह। शिक्षामित्र जानते हैं कि रोटी को थाली की तरह बजाने से आवाज़ नहीं आती है, इसीलिए वो ‘सोती सरकार’ को जगाने के लिए गुहार-पुकार का भी सहारा ले रहे हैं। केवल परिवारवाले ही ये जानते हैं कि चंद पैसों में परिवार चलाना कितना मुश्किल होता है। हम हर शिक्षामित्र और उनके परिवार के साथ हैं। शिक्षक कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

94,498 просмотров • 1 год назад