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लो चमचे देख लो तुम्हारा नेता खुद बोल रहा है चंद्रशेखर कि मैं AC से आया हूं जब अंजुल ने पूछा ठंडा हो रखे हो भाई। चमचों अब बताओ AC में कौन रहता है? अभी 2 दिन पहले निधि बोल रही थी कि स्पॉन्सर कराया मैं बसपा के लिए...

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नर्मदा किनारे बड़ा दृश्य था, मंत्री जी पसीना बहा रहे थे, फावड़ा चला रहे थे, जैसे सदियों की गंदगी अकेले ही साफ कर देंगे। उनके पीछे जेसीबी मशीन खड़ी थी शांत, सक्षम और थोड़ी संकोची क्योंकि असली काम करने वालों को अक्सर फोटो में जगह कम मिलती है। जेसीबी मशीन सोच रही होगी “मुझे बुलाया क्यों गया? अगर सफाई करनी है तो मैं आधे घंटे में कर दूं, अगर फोटो खिंचवानी है तो मैं क्या करूं?” लेकिन मशीनों को यह समझ नहीं आता कि असली काम कई बार मिट्टी हटाना नहीं, छवि बनाना होता है। मंत्री जी का पसीना सच्चा हो सकता है, नीयत भी अच्छी हो सकती है, पर सवाल यह है कि जब जेसीबी मशीन मौजूद है, तो फावड़े की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब शायद काम में नहीं, कैमरे में छिपा है। यह वही देश है जहां काम करने से ज्यादा जरूरी है, काम करते हुए दिखना। और नर्मदा किनारे आज यही सबसे साफ दिख रहा था।

Anurag Dwary

12,563 views • 6 months ago

मैं रात को ग्वालियर हाईकोर्ट के मेन गेट के बाहर खड़ा था, वीडियो शूट कर रहा था। तभी एक पुलिसवाले ने बड़े ही रूखे अंदाज़ में मुझे आवाज लगाई। मैंने उसे बताया कि मैं मीडिया से हूं और परमिशन लेकर शूट कर रहा हूं। ये सुनकर वो थोड़ा नरम पड़ा और मैं आगे बढ़ने लगा। लेकिन तभी पीछे खड़ा एक और पुलिसवाला पहले वाले से कुछ फुसफुसाया, और फिर उसी ने मुझे दोबारा आवाज लगाई — ‘वीडियो डिलीट करो।’ मैंने साफ मना कर दिया। फिर उसने पूछा — ‘नाम क्या है?’ मैंने कहा — ‘अंजुल।’ बोला — ‘पूरा नाम बताओ।’ मैंने कहा — ‘अंजुल बम्हरोलिया।’ इतना सुनते ही वो चुप हो गया और मुझे जाने दिया। असल में उसे ये जानना था कि कहीं मैं अंजुल जाटव या वाल्मीकि तो नहीं हूं। पत्रकार हूं, ये बात तो समझ आ गई थी… लेकिन उसकी असली चिंता मेरी जाति को लेकर थी। कहीं अंबेडकरवादी तो नहीं हूं, क्योंकि पोल खोलने वाले ज़्यादातर वही लोग हैं।

Anjul Bamhrolia

80,369 views • 1 year ago

अगर तुमने बंदरों को संभोग करते देखा हो तो देखा होगा कि संभोग के बाद वे तुरंत एक—दूसरे से अलग हो जाते हैं। उनके चेहरों को देखो, उनमें प्रसन्नता जरा भी नहीं है, जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं। जब ऊर्जा धक्के देती है, जब वह अतिशय होती है तो वे उसे बस फेंक देते हैं। साधारण काम—कृत्य ऐसा ही है। लेकिन नीतिवादी ठीक उलटी बात कहते आ रहे हैं। वे कहते हैं : भोग मत करो, सुख मत लो। वे कहते हैं. यह तो पशुओं जैसा कृत्य है। लेकिन यह बात गलत है। पशु कभी सुख नहीं लेते हैं, केवल मनुष्य सुख ले सकता है। और तुम जितना गहरा सुख लोगे उतनी ही श्रेष्ठु मनुष्यता का उदय होगा। और अगर तुम्हारा संभोग ध्यानपूर्ण हो जाए, समाधि पूर्ण हो जाए तो परम उपलब्ध हो जाए। लेकिन तंत्र की बात स्मरण रखो. यह घाटी— अनुभव है। यह शिखर—अनुभव नहीं है, घाटी— अनुभव है। पश्चिम में अब्राहम मैसलो ने शिखर—अनुभव की बहुत बात की है। तुम उत्तेजना के शिखर पर पहुंचकर नीचे गिरते हो। यही कारण है कि प्रत्येक संभोग के बाद तुम दीन—हीन अनुभव करते हो। और यह स्वाभाविक है, तुम शिखर से नीचे गिरते हो। लेकिन तांत्रिक संभोग के बाद तुम्हें यह गिरावट कभी अनुभव नहीं होगी। उसमें तुम और नीचे नहीं गिर सकते, क्योंकि तुम घाटी में ही हो। वरन तुम ऊपर उठते हुए अनुभव करोगे। तांत्रिक संभोग से लौटने पर तुम गिरते नहीं, ऊपर उठते हो। तुम ऊर्जा से आपूरित होकर ज्यादा शक्तिवान, ज्यादा जीवंत और तेजोमय हो जाते हो। और वह आनंद घंटों बना रह सकता है, दिनों बना रह सकता है। यह इस पर निर्भर है कि तुम कितनी गहराई से उसमें उतरे थे। तांत्रिक संभोग में उतरने पर देर— अबेर तुम्हें पता चलेगा कि स्खलन ऊर्जा का अपव्यय है, उसकी कोई जरूरत नहीं है। अगर बच्चा नहीं पैदा करना है तो स्खलन बिलकुल जरूरी नहीं है। और इस तांत्रिक काम—अनुभव के बाद तुम पूरे दिन विश्राम अनुभव करोगे। एक तांत्रिक काम—अनुभव के बाद तुम कई दिनों तक विश्रांत, शात, अहिंसक, अक्रोधी और सुखी रह सकते हो। और इस तरह का व्यक्ति कभी दूसरों के लिए उपद्रव नहीं खडा करेगा, मुसीबत नहीं पैदा करेगा। हो सकेगा तो वह दूसरों को सुखी बनाने में सहयोग देगा, अन्यथा वह दूसरों को दुख तो कभी नहीं देगा। केवल तंत्र नए मनुष्य का निर्माण कर सकता है। और यह नया मनुष्य—समयातीत और निरहंकार को, अस्तित्व के साथ गहन अद्वैत को जानने वाला मनुष्य—अवश्य विकासमान होगा। एक नया आयाम खुल गया है। वह बहुत दूर नहीं है, वह दिन बहुत दूर नहीं है, जब काम या सेक्स विलीन हो जाएगा। जब काम अनजाने विदा हो जाता है, जब एक दिन अचानक तुम्हें पता चलता है कि काम बिलकुल विदा हो गया, उसकी कोई वासना न रही, तो ब्रह्मचर्य का जन्म होता है। लेकिन यह कठिन है। यह कठिन मालूम पड़ता है, क्योंकि तुम्हें बहुत गलत शिक्षा दी गई है। और तुम इससे भयभीत हो, क्योंकि तुम्हारा मन संस्कारित है। हम दो चीजों से बहुत डरते हैं, हम कामवासना और मृत्यु से बहुत डरते हैं। और वे दोनों ही बुनियादी हैं। धर्म का सच्चा साधक दोनों में प्रवेश करेगा। वह काम को जानने के लिए काम का अनुभव लेगा। क्योंकि काम को जानना जीवन को जानना है। और वह मृत्यु को भी जानना चाहेगा। क्योंकि जब तक तुम मृत्यु को नहीं जानते हो तब तक तुम शाश्वत जीवन को भी नहीं जान सकते। अगर तुम काम में उसके मर्म तक प्रवेश कर सको तो तुम जीवन को जान लोगे। और वैसे ही अगर तुम स्वेच्छा से मृत्यु में उसके केंद्र तक प्रवेश कर जाओ तो तुम अमृत को उपलब्ध हो जाओगे। तब तुम अमर हो, क्योंकि मृत्यु तो केवल परिधि पर घटित होती है। काम और मृत्यु, दोनों एक सच्चे साधक के लिए बुनियादी हैं। लेकिन सामान्य मनुष्यता के लिए दोनों घबड़ाने वाले है। कोई उनकी चर्चा नहीं करता है। और दोनों बुनियादी हैं और दोनों गहन रूप से एक—दूसरे से संबंधित हैं। वे इतने जुड़े हुए हैं कि तुम कामवासना में प्रवेश करो और तुरंत तुम एक प्रकार की मृत्यु में प्रवेश करने लगते हो। क्योंकि काम—अनुभव में तुम मरते हो, तुम्हारा अहंकार विलीन होता है। काम— अनुभव में समय विलीन हो जाता है, तुम्हारा व्यक्तित्व विदा हो जाता है। तब तुम ही मरने लगते हो। संभोग सूक्ष्म मृत्यु है। और अगर तुम्हें बोध हो जाए कि काम सूक्ष्म मृत्यु है तो मृत्यु तुम्हारे लिए बड़ी काम—समाधि का अनुभव बन जाएगी। कोई सुकरात मृत्यु में निर्भय प्रवेश करता है। बल्कि वह मृत्यु को जानने के लिए उत्साह से भरा है, उल्लास और उत्तेजना से भरा है। उसके हृदय में मृत्यु के लिए गहन स्वागत का भाव है। क्यों? क्योंकि अगर तुम संभोग की छोटी मृत्यु को जानते हो, अगर तुमने उससे प्राप्त होने वाला आनंद जाना है, तो तुम बड़ी मृत्यु को भी जानना चाहोगे। तुम उसके पीछे छिपे आनंद को भी भोगना चाहोगे। #तृप्त

तृप्त ...🖤

813,018 views • 2 years ago

"देखिए! ये क्या हो रहा है देश में? एक तरफ़ बांग्लादेश में हमारे हिंदू भाइयों-बहनों पर अत्याचार हो रहे हैं, मंदिर तोड़े जा रहे हैं, महिलाओं के साथ ज़ुल्म हो रहा है... और दूसरी तरफ़ यहीं भारत में एक बहन रिद्धिमा शर्मा खुलकर बोल रही है, तो FIR? तो विवाद? अरे ये तो ग़लत है ना! रिद्धिमा ने क्या कहा? उसने कहा कि अगर वे हमारे एक-दो को छेड़ते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे! ये तो प्रतिरोध की बात है, ये तो अपनी बहनों की इज़्ज़त बचाने की बात है! मीडिया वाले इसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जैसे ये घृणा फैला रही हो... अरे भई, घृणा तो वो फैला रहे हैं जो बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार कर रहे हैं! SanataniRiddhi एक सनातनी बहन है, वो अपनी भावनाओं में बोल गई, लेकिन उसका इरादा साफ़ है हिंदू समाज को जागृत करना, अपनी बहनों की सुरक्षा की बात करना! क्या हम औरतों की इज़्ज़त के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते? क्या अब बोलना भी अपराध हो गया? कांग्रेस वाले चिल्ला रहे हैं, लेकिन असली मुद्दा देखिए बांग्लादेश में क्या हो रहा है, उस पर कोई बोलता क्यों नहीं? मैं कहती हूँ – #ISupportRiddhima ! क्योंकि ये बहन डरने वाली नहीं है, ये सच बोल रही है! और जो मीडिया इसे घृणा फैलाना बता रहा है, वो पहले बांग्लादेश के हिंदुओं की सुन ले! ये आवाज़ दबने नहीं देंगे! जय श्री राम!"

कल्पना श्रीवास्तव 🇮🇳

23,632 views • 8 months ago

यह वीडियो देखने के बाद मेरे एक जानने वाले का मैसेज आया है उन्होंने कहा कि "भैया अब आपको रिपोर्टिंग छोड़ देनी चाहिए" इस वीडियो में जो लोग दिखाई दे रहे हैं सबको मैं जानता हूं और सब मुझे जानते हैं सवाल इन रिपोर्टर्स पर नहीं है बल्कि व्यवस्था पर है क्या इन रिपोर्टर्स के संस्थान अगर इन पर दबाव बनाने की बजाय इनके विवेक से काम करने देंगे तो क्या ये ऐसे करेंगे? आज मीडिया के हालात क्या हो गए हैं ये सोचने की बात है मैं इस बात का शुक्र मना रहा हूं कि अच्छा हुआ मैं इस मौके पर नहीं था वरना क्या पता मुझे भी इस सर्कस का हिस्सा मजबूरन बन जाना पड़ता? लेकिन ऐसी परिस्थितियां कुछ-कुछ समय पर हर रिपोर्टर के सामने आती हैं सोच कर देखिए कि यह किस तरह का दबाव है जिसमें इतने सीरियस मुद्दे पर भी कॉमेडी हो गई संसद की सुरक्षा में चूक जैसे गंभीर मुद्दे पर रिपोर्टिंग हो रही है, लेकिन जिस तरह रिपोर्टिंग हो रही है उसको देखकर कपिल शर्मा का कॉमेडी शो भी फेल है यह सब देखकर कभी-कभी मन में आता है कि आखिर हम कर क्या रहे हैं? क्यों कर रहे हैं? किसके लिए कर रहे हैं?

Sharad Sharma

230,189 views • 2 years ago

एक है कांग्रेस पार्टी और उसके सफेद बालों वाला भौं-भौं इनको हर चीज में अडानी को घुसाना है और अपने हिसाब से सही और गलत साबित करना है। वैसे तो अडानी को कहीं भी कोई काम मिलता है, तो सबसे पहले ये विरोध करने और हंगामा करने लगते हैं, लेकिन अभी कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में अडानी को टेंडर मिला और गौतम अडानी ने वहां के सीएम डीके शिवकुमार से मुलाकात की, तो इस भौं-भौं ने इस पर कहा कि किसी को कॉम्पिटिशन से काम मिलता है, तो हम उसको गलत नहीं मानते हैं। लेकिन उसी अडानी को उत्तराखंड में पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से बिजली सप्लाई करने का 25 साल के लिए काम मिला, तो यही भौं-भौं अब कह रहा है कि गौतम शरणम् गच्छामि। आखिर ये दोगलापन नहीं है, तो क्या है?

Oc updates

66,396 views • 18 days ago

साहू समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कंचना यादव से लेकर जितेंद्र मीणा सड़कों पर हैं और नारे लगा रहे हैं कि:- “वोट हमारा राज तुम्हारा” नहीं चलेगा नहीं चलेगा। मतलब साहू (घांची) समाज के वोटर पूरे देश में कम संख्या में हैं तो उन्हें अब खुलेआम धमकाया जा रहा है? ऐसे में मेरा काम बनता है कि मैं इनकी पोल खोल दूँ:- - बिहार में यादव जी लोग RJD को वोट देते हैं। PM मोदी ने भले बिहार से नित्यानंद यादव जी को केंद्रीय मंत्री बना रखा है लेकिन यादव समाज का वोट BJP को बहुत नहीं मिलता। - साहू समाज से आने वाले PM मोदी को प्रधानमंत्री सामान्य वर्ग असली पिछड़े और ग़ैर मीणा आदिवासी और दलित समाज ने बनाया है - लेकिन PM बनने के बाद मोदी जी ने सबसे अधिक काम इन्हीं लोगों के लिए किया जो आज सड़कों पर हैं, जो BJP को वोट नहीं देते फिर भी धमका रहे हैं कि “वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा। - अभी भी BJP की आँख खुल जाए, कुछ काम अपने कोर वोटरों के लिए भी कर लो। इन लोगों ने 2014 से अभी तक आपको वोटिंग नहीं की है, ना ही करेंगे,

Shubham Shukla

27,973 views • 8 months ago

पिछले 1 साल से मेरी X पर एक लड़की से मैसेज के द्वारा बात हो रही थी, कोई दिन ऐसा नहीं गया जिस दिन हमने एक दूसरे से बात नहीं की हो... धीरे धीरे हमारी बातें फोन पर भी घंटों तक होने लगी, उसकी बातों से मुझे लगने लगा कि उसे भी मुझसे प्यार हो गया है... इसलिए मैं मैने कल शाम उसे फोन करके कहा कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूं... वो भी शायद मुझसे मिलने को बेताब थी, इसलिए उसने भी तुरंत हां बोलते हुए गाजियाबाद में एक जगह पर मिलने के लिए बोल दिया... आज सुबह 10 बजे जब मैं उसकी बताई हुई जगह पर पहुंचा तो मुझे वहां कोई नहीं मिला, मैंने उदास मन से उसे कॉल किया तो उसने बताया कि वो जाम में फंसी हुई हूं, 30 मिनट में वहीं पर पहुंच जाएगी... अब मैं वहीं अपनी गाड़ी में बैठा उसका इंतजार कर रहा था, कि मुझे एक ट्रक के पीछे काले कपड़े पहने खड़ी एक बहुत खूबसूरत लड़की दिखाई देती है, जिसको देखकर मैं समझ गया कि ये वहीं लड़की है जिसका मैं इंतजार कर रहा हूं... फिर भी मैने कन्फर्म करने के लिए उसे कॉल मिलाया तो उसने कॉल उठाया और बोली मैं उसी जगह पर एक ट्रक के पीछे खड़ी हुई हूं... अब मैंने उसे गाड़ी की तरफ आने के लिए बोला तो वो तुरंत मुझसे फोन पर बातें करती हुई मेरी तरफ आने लगती है... उसकी मुस्कान, और चाल ढाल देखकर कुछ देर के लिए तो मैं अपना होश खो बैठा... मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी किस्मत में इतनी सुंदर लड़की होगी... इसके लिए मै X को धन्यवाद देता हूं... और हां ये लड़की आपके साथ भी X पर जुड़ी हुई है, क्या आपने इसे पहचाना या नहीं...

Amit Tomar

78,538 views • 1 month ago

आपके पति द्वारा आपको महत्व न देने के संकेत: ✅ वह आपके साथ असम्मानजनक तरीके से बात करता है। यह आपके पति द्वारा आपको महत्व न देने का एक बड़ा संकेत है। अगर वह नाम call करता है, चिल्लाता है, या आपको असम्मानजनक तरीके से पेश आता है, तो वह आपको महत्व नहीं देता। किसी ऐसे व्यक्ति से इस तरह बात नहीं करते, जिसे आप पसंद करते हैं। ✅ वह अब आपको कोई स्नेह नहीं दिखाता। स्नेह देना रिश्ते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, और यह सबसे पहले गायब होता है। प्यारे नाम, मीम्स, और गिफ्स से अलविदा ले लें। यहां तक कि इमोजी भी रिश्ते से बाहर हो सकते हैं। स्नेह की सभी प्रकार की अभिव्यक्तियां कम हो जाती हैं, और आप सोचने लगते हैं कि सब कुछ कहां चला गया। ✅ वह माइक्रो-चीटिंग करता है। माइक्रो-चीटिंग तब होती है जब कोई व्यक्ति रिश्ते में होते हुए भी किसी और को फ्लर्टी या अनुपयुक्त संदेश भेजता है। अगर आपके पति के पास आकर्षक सोशल मीडिया दोस्त हैं, तो वह ठीक है। लेकिन अगर वह अपने मुद्दों पर बात करने के लिए उनसे संपर्क करता है, तो यह माइक्रो-चीटिंग है। स्पष्ट रूप से कहें तो, माइक्रो-चीटिंग में कोई 'माइक्रो' नहीं है। यह गलत है। ✅ वह आपके लिए समय नहीं निकालता। क्या वह सबके लिए समय निकालता है, लेकिन आपके लिए नहीं? यह तब आम होता है जब वह आपको अब महत्व नहीं देता। वह वही करता है जो उसे पसंद है, लेकिन आपके लिए समय नहीं निकालता। यदि वह आपके साथ समय बिताने या बात करने के लिए समय नहीं निकालता है, तो इसका मतलब है कि वह आपको महत्व नहीं दे रहा है। ✅ वह आपके बिना योजना बनाता है। वह ऐसी चीजों की योजना बनाता है जिनमें आपको शामिल नहीं किया जाता। बड़े मैच के लिए टिकटें जो उसने खरीदीं - उसने आपके लिए एक भी नहीं खरीदी। वह जिस संगीत कार्यक्रम में जाना चाहता है - उसके पास एक बहाना होता है कि आप क्यों नहीं जा सकते। ✅ वह अपने फोन पर अधिक ध्यान देता है, न कि आप पर। अगर वह अपने फोन पर आपसे ज्यादा ध्यान देता है, तो वह यह नहीं दिखा रहा कि वह आपके साथ बातचीत को महत्व देता है। यह अशिष्ट और असम्मानजनक है। अगर वह अपने फोन से शादी करना चाहता है, तो उसे पहले आपको तलाक देना होगा। अन्यथा, उसे अपनी तकनीकी दुनिया से बाहर आकर अपने रिश्ते पर ध्यान केंद्रित करना सीखना होगा। ✅ वह आपके जाने पर आपको मिस नहीं करता। जब आप काम के लिए या परिवार से मिलने जाते हैं, तो वह आपको मिस नहीं करता। न तो वह यह कहता है, न ही ऐसा महसूस होता है। ऐसा लगता है जैसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप वहां हैं या नहीं। कठोर सच्चाई यह है कि वह आपको महत्व नहीं देता। वह आपको मिस नहीं करता जब आप जाते हैं। आपको वह समय याद होगा जब वह करता था, लेकिन वह समय अब लम्बे समय से चला गया है। ✅ वह हमेशा आपके दोष निकालता है। आप कुछ भी सही नहीं कर पातीं। वह लगातार आपके हर शब्द और काम की आलोचना करता है। कोई भी कोशिश कभी पर्याप्त नहीं होती। आपको हमेशा ऐसा महसूस होता है कि आप उसे निराश कर रही हैं। ऐसा लगता है जैसे आप अब पर्याप्त नहीं हो, और आपको यह समझ नहीं आता कि कैसे बेहतर बनें। आप जो भी कर रही हैं, वह कभी उसकी उच्च मानकों पर नहीं उतर पाती। वह आपको महत्व नहीं देता, इसलिए वह आपको उन अवास्तविक मानकों पर खड़ा कर रहा है। ✅ वह अपने वादे तोड़ता है। जो आदमी आपको अब महत्व नहीं देता, वह अपने वादे तोड़ता है। प्यार करने, सम्मान करने और देखभाल करने के जो वादे किए थे, अब वे टूट चुके हैं। बीमारियों में और अच्छे समय में? वे भी टूट गए हैं। आप सोचने लगती हैं कि अगर वह उन वादों को निभाने वाला नहीं था, तो वह वादे क्यों किए गए थे। टूटे हुए वादे रिश्ते में विश्वास को तोड़ देते हैं। समय के साथ, रिश्ते का अस्तित्व खत्म हो जाता है - बस एक कानूनी समझौता बचता है, जिसे आप खत्म करने के बारे में सोच सकती हैं। आप इसके लायक हैं कि आपको प्यार किया जाए, सराहा जाए और महत्व दिया जाए 🤍। साभार 🙏

तृप्त ...🖤

159,877 views • 1 year ago

भाई ये क्या लिख रहे हो? ये आपसी भ्रम है? ये चिरकुट खुल्लमखुल्ला लिख रहा है कि मैं टूलकिट का हिस्सा हूँ और मोदी को बदनाम करने के लिए पैसे लेता हूँ। जब मैंने इसे और अन्य व्यक्तियों को लीगल नोटिस भेजा है, तब ये डिलीट कर के बचना चाह रहा है। ये बहरा है क्या कि इसने सुना नहीं क्या कहा जा रहा है। इसको मैं इतना पेलूँगा कि ये जीवन भर याद रखेगा। आर्काइव कर लिया है मैंने और वीडियो रिकॉर्डिंग भी है मेरे पास। डिलीट करने से कुछ नहीं होगा। ट्विटर पर कौन सा कॉपीराइट लगता है? हर दिन जो ये लोग साले अजेंडा चलाते हैं न कि मोदी का पैसा लिया और हिमंता से पैसा लिया, अब ये कोर्ट में जवाब दें, मेरा लीगल खर्चा देंगे पूरा और माफी भी इसी प्लेटफॉर्म पर माँगेंगे कि उन्होंने झूठ बोला। यदि जानते हो कि पेड ट्वीट किया है तो प्रूफ दिखाओ, वरना माफी माँगो, लीगल खर्चा वापस करो। भाँड़ में गया इन जैसे नेशनलिस्टों का राष्ट्रवाद! पक गया हूँ इन सबसे मैं। बहुत दिन तक इग्नोर करता रहा। अब दस-पाँच लगा कर इनसे कोर्ट में ही निबटूँगा।

Ajeet Bharti

131,012 views • 6 months ago

हुमा कुरैशी ने कुछ समय पहले कहा था कि वह अब कभी nude scenes नहीं करेंगी। उनका कहना था कि उनका भी परिवार है, पिता हैं, भाई हैं, और वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहतीं जिससे उन्हें अपने परिवार के सामने शर्मिंदगी महसूस हो। अब Toxic के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उनकी ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई तो लोगों ने उनके पुराने बयान को भी याद करना शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि किसी अभिनेत्री को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। सवाल सिर्फ इतना है कि जब कोई व्यक्ति अपने लिए कोई व्यक्तिगत सीमा तय करता है, तो क्या वह सीमा सिर्फ फिल्मों में निभाए जाने वाले किरदारों और intimate scenes तक सीमित मानी जाए, या उसके सार्वजनिक पहनावे और presentation पर भी लोग उसी कसौटी को लागू कर सकते हैं ? आखिर “मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो” जैसी बात का दायरा कितना व्यापक है ?
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हुमा कुरैशी ने कुछ समय पहले कहा था कि वह अब कभी nude scenes नहीं करेंगी। उनका कहना था कि उनका भी परिवार है, पिता हैं, भाई हैं, और वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहतीं जिससे उन्हें अपने परिवार के सामने शर्मिंदगी महसूस हो। अब Toxic के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उनकी ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई तो लोगों ने उनके पुराने बयान को भी याद करना शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि किसी अभिनेत्री को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। सवाल सिर्फ इतना है कि जब कोई व्यक्ति अपने लिए कोई व्यक्तिगत सीमा तय करता है, तो क्या वह सीमा सिर्फ फिल्मों में निभाए जाने वाले किरदारों और intimate scenes तक सीमित मानी जाए, या उसके सार्वजनिक पहनावे और presentation पर भी लोग उसी कसौटी को लागू कर सकते हैं ? आखिर “मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो” जैसी बात का दायरा कितना व्यापक है ?

पाठशाला गुरुजी ( Pathshala GuruG )

431,977 views • 1 month ago

ये चू-टीया Shreyas Iyer इसको किस बात का घमंड हो गया है, रुक नहीं रहा है ! "मैं आपको नहीं जानता, आपका न्यूज़ भी नहीं देखता, फॉलो भी नहीं करता।" Vaibhav Suryavanshi को लेकर सवाल पूछने वाले सीनियर रिपोर्टर Vimal Kumar की बेइज्जती कर दी Shreyas Iyer ने। Vimal Kumar वही हैं, 30 साल से स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हैं। इंडिया टीम दुनिया के किसी कोने में क्रिकेट खेलने जाती है, तो कवर करने जाते हैं। Rohit Sharma के सबसे प्यारे जर्नलिस्ट हैं। Vimal Kumar जिनको रोककर Virat Kohli बात करते हैं। Dhoni के साथ डिनर करते थे। Sachin Tendulkar के साथ रहते थे। बड़े-बड़े खिलाड़ियों का सम्मान हमेशा पाया है Vimal Kumar ने, लेकिन यह कल का आया हुआ लौंडा बोल रहा है, "मैं आपका न्यूज़ नहीं देखता।" Vimal Kumar ने अपना सवाल नहीं, सोशल मीडिया पर Vaibhav Suryavanshi को लेकर जो चल रहा है, उसको लेकर सवाल किया था। Vimal Kumar (Sports Journalist) – "Shreyas, Vaibhav Suryavanshi को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत आवाज़ उठाई जा रही है। टॉप ऑर्डर फ्लॉप होने के बाद लोग Vaibhav Suryavanshi को खिलाने के लिए बोल रहे हैं। Vaibhav Suryavanshi को मौका कब देंगे?" घमंडी Shreyas Iyer – "आप कौन हैं? मैं आपका न्यूज़ देखता भी नहीं, फॉलो भी नहीं करता। सोशल मीडिया पर उसके बारे में क्या चल रहा है, मुझे नहीं पता। मैं सोशल मीडिया चेक नहीं करता, फॉलो नहीं करता हूँ।" Suryakumar Yadav इससे लाख गुना बेहतर इंसान के साथ-साथ कप्तान भी थे। आज तक इंडिया के किसी कप्तान को मैंने अपने खिलाड़ियों के लिए इतना arrogant बोलते हुए नहीं देखा है। खासकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में। दूसरे देश के खिलाड़ियों के लिए बोलते सुना है, यह तो अपने देश के मासूम 15 साल के बच्चे खिलाड़ी, जिसको सपोर्ट करने की ज़रूरत है, उसके लिए ऐसा बोल रहा है! आपको क्या लग रहा है वैभव सूर्यवंशी बहुत गलत कप्तानी में राष्ट्रीय टीम में आ गया हैं सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में खेलना चाहिए था, अगर गलती से वैभव सूर्यवंशी को मौका मिल भी जाता है यह पक्का निकल देगा !

Ranjan Singh

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सिक्योरिटी चेक करवाना मिडिल क्लास के लिए इबादत है! 15 अगस्त और 26 जनवरी के सप्ताह भर पहले दिल्ली मेट्रो में दो बार सिक्योरिटी चेक होता है, पैंट के आगे, पीछे और कमीज़ की जेब सिक्योरिटी वाला शरीर के अंगों को दबा दबा कर चेक करता है. और दिल्ली का मिडिल क्लास खुशी खुशी बाहें फैला कर श्रद्धाभाव में आंखे बंद करके सब कुछ चेक करवाता है. दिल्ली के हवाई अड्डे में तो आजकल घंटों लगते हैं सिक्योरिटी क्लियरेंस में. मजाल है मिडिल क्लास चूं भी कर दे. सिक्योरिटी काउंटर पर पहुंचते ही जूते बेल्ट किसी रोबोट की तरह सब उतारने लगता है. करना तो मुझे भी पड़ता है ये सब, विकल्प ही क्या है लेकिन प्रोटेस्ट भी करता हूं. कभी कभी एयरपोर्ट में मैनुअल भी निकलवा लेता हूं – बहुत से समान उसमे अलाउड होते हैं लेकिन सिक्योरिटी वाले अपने कम आई क्यू दिमाग का इस्तेमाल करके रोक देते हैं. जो कुछ भी ठुल्ले ने अपने जीवन में नहीं देखा उसको वो बम मान लेता है. मेरे सिगरेट केस के साथ यही होता है. एक बार हवाई जहाज में बोर्डिंग के पहले एयरलाइंस स्टाफ ने एक महिला की अटैची खुलवा ली. लाइन में मैं उनके पीछे ही था और जम कर विरोध किया. जब समान एक्स रे और सिक्योरिटी स्टाफ से चेक होकर आया तब फिर इसका क्या मतलब है, उसको कहा कि आपके पास न अधिकार और न ही ट्रेनिंग है सिक्योरिटी की फिर अटैची क्यों खुलवाई? मेरे इर्द गिर्द जो मिडिल क्लास था उसे एयरलाइंस स्टाफ की बदतमीज़ी से नहीं मेरे प्रोटेस्ट से दिक्कत हो रही थी. कई आंखें मुझे ही घूर रही थीं कि जब महिला चुपाचाप अटैची खोल रही है तो मैं विरोध क्यों कर रहा हूं. मिडिल क्लास देश का सबसे बेगैरत नागरिक है जो आसानी से अपने अधिकार सरेंडर करता है. इस देश में किसान और मज़दूर को ही डेमोक्रेसी का मतलब पता है. मिडिल क्लास तो ठुल्ले को भगवान मानता है. सिक्योरिटी के नाम पर इसे मुर्गा भी बना दें तो ये बनेगा. - वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन कहिन Prashant Tandon

Ansar Imran SR

210,325 views • 2 years ago

कल रात मैं डॉक्टर के पास से लौट रही थी रात का करीब 9 बज रहा था सामने मुझसे रोड पर एक गाड़ी खड़ी दिखती है… जिसके किनारे एक लड़की खड़ी है और लोगों को आते जाते देख रही थी मुझे लगा कि इसको मदद की जरूरत है ज़रूर गाड़ी ख़राब हुई होगी… लेकिन मैं ग़लत थी जब मैं अपनी गाड़ी से उतरकर उसके क़रीब पहुँची तो देखा वो लड़की उगलियों में सिगरेट फँसाकर धुआँ निकाल रही थी…और उसकी गाड़ी में 3 लड़के और बैठे हुए थे… एक लड़का आगे वाली सीट पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था और दो लड़के पीछे बैठे इंतज़ार कर रहे थे… उसको क्या इतना stress था जिसकी वजह से वह गाड़ी को बीच रास्ते रोककर अपना स्ट्रेस कम कर रही थी या पारिवारिक माहौल इतना ख़राब हो चुका है खैर अब आप ही बताये क्या दशा हो सकती है…
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कल रात मैं डॉक्टर के पास से लौट रही थी रात का करीब 9 बज रहा था सामने मुझसे रोड पर एक गाड़ी खड़ी दिखती है… जिसके किनारे एक लड़की खड़ी है और लोगों को आते जाते देख रही थी मुझे लगा कि इसको मदद की जरूरत है ज़रूर गाड़ी ख़राब हुई होगी… लेकिन मैं ग़लत थी जब मैं अपनी गाड़ी से उतरकर उसके क़रीब पहुँची तो देखा वो लड़की उगलियों में सिगरेट फँसाकर धुआँ निकाल रही थी…और उसकी गाड़ी में 3 लड़के और बैठे हुए थे… एक लड़का आगे वाली सीट पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था और दो लड़के पीछे बैठे इंतज़ार कर रहे थे… उसको क्या इतना stress था जिसकी वजह से वह गाड़ी को बीच रास्ते रोककर अपना स्ट्रेस कम कर रही थी या पारिवारिक माहौल इतना ख़राब हो चुका है खैर अब आप ही बताये क्या दशा हो सकती है…

Indu

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ओवैसी की बातों से यूसुफ़ पठान क्यों न डरे?? कश्मीर के MP Aga Syed Ruhullah Mehdi रूहुल्लाह मेहंदी ने पोस्ट की है- "पिछले शीतकालीन संसद सत्र के दौरान पूरा विपक्ष SIR और अन्य मुद्दों को लेकर सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहा था। हमेशा की तरह, TMC के सांसद भी वेल में उतरकर अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर निडरता से विरोध कर रहे थे। मैं भी वहाँ मौजूद था। मैंने देखा कि एक प्रमुख मुस्लिम सांसद (जो TMC से नहीं थे) यूसुफ़ पठान पर चिल्ला रहे थे और उन्हें विरोध प्रदर्शन से हट जाने के लिए कह रहे थे। यूसुफ़ वास्तव में पीछे हट गए और अपनी सीट पर वापस आकर बैठ गए। मैंने उनके चेहरे पर अचानक बदलाव देखा। वे लगभग काँप रहे थे। जब वह सांसद वहाँ से चले गए, तो मैं यूसुफ़ के पास गया और पूछा, "क्या हुआ? आप इतने डरे हुए क्यों लग रहे हैं?" यूसुफ़ ने बताया कि उस व्यक्ति ने उनसे कहा था: "तुम्हें BJP के खिलाफ विरोध नहीं करना चाहिए। तुम्हें क्या हो गया है? BJP के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहे हो? खुद को दुश्मन क्यों बना रहे हो? वे गुजरात में तुम्हारा घर बुलडोज़ कर देंगे।" इसी दौरान महुआ मोइत्रा वहाँ आईं और उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ है। मैंने उन्हें बताया कि यूसुफ़ डर गए हैं क्योंकि किसी ने उन्हें धमकी दी है कि BJP गुजरात में उनका घर बुलडोज़ कर देगी। यह सुनकर महुआ मोइत्रा बेहद नाराज़ हो गईं। उन्होंने यूसुफ़ से कहा: "उस व्यक्ति की बात मत सुनो। हम तुम्हारे साथ हैं। हम एक हैं। कोई तुम्हें या तुम्हारे परिवार को छूने की भी हिम्मत नहीं करेगा।" आज जब हालात बदल गए हैं, तो महुआ मोइत्रा और TMC के लिए अफ़सोस होता है। जिस व्यक्ति के साथ वे उस समय मजबूती से खड़े थे, जिसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे, उसी ने और उसके जैसे लोगों ने बाद में उनकी पीठ में छुरा घोंपने का काम किया।" मेहदी की इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने लिखा है- "जी हाँ, सर। वह Asaduddin Owaisi ही थे जो Yusuf Pathan को चेतावनी दे रहे थे, याद रखिए। कितनी विडंबना है कि मैं ऐसे व्यक्ति के लिए लड़ता रहा जो निष्ठाहीन निकला, जिसमें न साहस था और न ही रीढ़ की हड्डी। वह राजनीति में आने के बजाय क्रिकेट की कमेंट्री ही करता तो बेहतर होता। कितना डरा हुआ और कायर व्यक्ति निकला! मेहंदी-मोइत्रा की क्रिया-प्रतिक्रिया का अलग से विश्लेषण करने की ज़रूरत नहीं है। सवाल यह है कि यूसुफ़ पठान क्यों न डरे? क्या यूसुफ़ ने आज़म खान का हाल नहीं देखा? क्या इरफ़ान सोलंकी नहीं देखा? नवाब मलिक का हाल नहीं देखा? अभी बंगाल के जहांगीर खान का हाल नहीं देख रहा है कि कैसे एक पूर्व विधायक को कमर में रस्सी बाँधकर परेड कराई जा रही है, कान पकड़कर माफ़ी मंगवाई जा रही है... ख़ुद यूसुफ़ पठान के मामले में, उनके घर के पास सटी थोड़ी-सी सरकारी ज़मीन, जिसे उन्होंने बगीचे के रूप में विकसित किया है, उस पर वडोदरा नगर निगम बुलडोज़र चलाना चाहती है और हाईकोर्ट तक यूसुफ़ पठान को ही नसीहत दे चुका है। तो फिर, अगर असदुद्दीन ओवैसी ने यूसुफ़ पठान को डराया है और यूसुफ़ डर गया है, तो फिर उसने क्या गलत किया है?? आज़म खान और इरफ़ान सोलंकी को Akhilesh Yadav - अखिलेश यादव-योगी की दोस्ती बचा न सकी। Nawab Malik -नवाब मलिक को शरद पवार बचा न सके, जबकि पवार साहब ने बुरे दिनों में अमित शाह को बचाया था! जहांगीर खान के लिए कोई TMC वाला आगे न आया, तो यूसुफ़ पठान के लिए Mahua Moitra - মহুয়া মৈত্র क्या कर लेतीं?? सच्चाई यही है कि इस देश में मुसलमान, मुसलमान हैं और उन्हें अलिखित तौर पर बहुसंख्यकों वाले अधिकार और सहूलियतें बिल्कुल भी हासिल नहीं हैं। ऐसे में, असदुद्दीन ओवैसी ने कथित तौर पर डराया भी था और यूसुफ़ पठान डर गए, तो इसमें क्या गलत किया??

Mr_cool77777

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राजस्थान के 'दुग्गल साहब' कल जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में 'किसान' बने थे...और फिर इन्होंने जो ज्ञान दिया, वह आप भी सुनिए... "यह दूसरा कोई नहीं कहेगा, मैं किसान हूं इसलिए जानता हूं कि किसान साल में केवल 25-30 दिन ही काम करता है" कुछ समय पहले 'दुग्गल साहब' विधानसभा में पशुपालक बने थे और परबतसर पशु मेले से स्वयं नागौरी बैल खरीदने की बात कही थी...इनके राज में पशु मेलों और पशुपालन का क्या हाल हुआ है वह किसी से छुपा नहीं है। अब कल ये किसान बने, इन्हें लगता है किसान भी 'पर्चियों' से ही बन जाते हैं...!! मुख्यमंत्री जी, खेती 'पर्चियों' से नहीं होती और खेती में केवल किसान नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार लगता है। छोटे-छोटे बच्चे भी खेतों में जाकर अपने माता-पिता की मदद करते हैं और महीनों की मेहनत के बाद एक फसल तैयार होती है। अगर मुख्यमंत्री जी वाकई 'किसान' होते, तो ऐसी बात कभी ना कहते। Congress Rajasthan PCC

Manish Mirdha

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