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लखनऊ में में एक खाला बीबी चीख चीख कर कह रही है कि एक खामनेई मारा गया तो क्या हज़ार खामनेई खड़े हो जाएँगे। मतलब 1000 खड़े जो जाएँगे तो ख़ामेनेई की कोई धार्मिक महत्ता नहीं थी?? वो सबसे बड़े नहीं थे ?? ईरान की महिलायें अपनी स्वतंत्रता के...

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धीरे-धीरे सबका नंबर लगने लगा है. जब सेनाओं के लिए ‘अग्निपथ स्कीम’ आई थी, तो आवाज़ भी आई थी कि हमने तो ऐसी कोई स्कीम मांगी नहीं थी, हमसे किसी ने इस पर चर्चा ही नहीं की थी. और जनरल एमएम नरावने की बातें भी याद आती हैं, लेकिन उस समय कोई सेनाओं के पक्ष में नहीं बोल पाया था. सेनाओं की पुकार अनसुनी कर दी गयी और इस वर्ष अग्निवीरों के 4 वर्ष पूरे हो रहे हैं. अब CAPF के इस बिल के समय आप चमत्कारों की कामना ज़रूर कर सकते हैं, कि ये पास नहीं होगा, लेकिन BJP सरकार इस बिल को कल एकतरफ़ा पास करा देगी. मैं तो समझ ही नहीं पाती कि क्या किसी देश की सरकार समाज में कर दिये ध्रुवीकरण के बाद अब अपनी सेनाओं में भी दो खेमे खड़े कर रही है, CAPF में भी दो खेमे खड़े कर रही है!! क्या यह सरकार भारतीयों द्वारा, भारतीयों के हित में चलाई जा रही है, या इसमें कोई विदेशी प्रभाव शामिल हो गया है ? यह सवाल उठता है कि क्या यह सरकार अमेरिका या किसी बाहरी एजेंसी के प्रभाव में चल रही है !! बहुत संदेह होता है कि क्या कोई भारतीय नेतृत्व स्वयं अपने ही देश की सेनाओं को कमजोर करने का काम कर सकता है ? #CAPFBill_काला_कानून

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

33,330 Aufrufe • vor 5 Monaten

प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

43,688 Aufrufe • vor 27 Tagen

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

32,660 Aufrufe • vor 23 Tagen

अपने मुल्क के लिए दुनिया को शहादत की परंपरा सीखनी है, तो ईरान से सीखिए। ईरान अपने लोगों की शहादत के दम पर अमेरिका को झुकाने में कामयाब रहा। 48 साल के प्रतिबंधों को झेलकर भी ईरान नहीं टूटा। एक आदमी जिस उम्र में शहीद होता है, सदा के लिए उसकी वही उम्र रहती है; वह कभी बूढ़ा नहीं होता। यह जज्बा ईरान के लोगों में कूट-कूटकर भरा है। तीसरी दुनिया के देशों की इज्जत को ईरान ने कायम रखा। ईरान दुनिया में एक मिसाल बन गया। जितनी पुरानी सभ्यता, उतना शानदार शाहकार। अमेरिका और इजराइल का 48 घंटे में ईरान को मिटाने का हैवानियत भरा ख्वाब ईरान ने जमींदोज कर दिया। एक मुल्क क्या होता है, ईरान आदर्श बनकर उभरा है। #Iran #Martyrdom #Geopolitics

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

18,809 Aufrufe • vor 2 Monaten