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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां उजाड़ने में...💔 #MiraRoad

131,670 views • 2 years ago •via X (Twitter)

10 Comments

Sunil Shukla's profile picture
Sunil Shukla2 years ago

कानून का पालन नही करोगे, रोहिग्या और अवेध घुस्पेठियो को बसाओगे, हिंदुओ के उपर पत्थर फेकोगे और उसके बाद विक्टिम कार्ड भी खेलोगे। अब नही चलेगा अपने काग़ज़ ढुंढ़ कर रखो बहोत जल्द CAA - NRC आने वाला है। जय श्री राम।

सनातन ही सत्य है's profile picture
सनातन ही सत्य है2 years ago

अबैध घर बनाने की जरूरत क्या थी बाप की जागीर समझ रखी है क्या पलते है जिस आशियाने मे आतंकी उन्हे उजाङ देना ही बेहतर है

VINI💞's profile picture
VINI💞2 years ago

तुम बाज क्यों नहीं आते पत्थर चलाने में 🙆‍♀️

Ashok K Singh's profile picture
Ashok K Singh2 years ago

महिलाओं, गाड़ियों, बाइक वालों पर हमला करोगे - वो भी सिर्फ़ इसीलिए की उनकी गाड़ियों पर राम नाम का झंडा लगा है, तो प्रतिक्रिया भी होगी, पुलिस भी अपना काम करेगी । क्रिया की निंदा तुमलोग करते नहीं - प्रतिक्रिया पर दुनिया को दिखाते हो कि मोदी जुल्म कर रहा है । ग़ज़बें है ।

किरन जैन ( देशभक्त-हिन्दू ) 🇮🇳 🚩's profile picture
किरन जैन ( देशभक्त-हिन्दू ) 🇮🇳 🚩2 years ago

अब सबकुछ अचानक याद आ जाता है पत्थर बाजी करते वक्त तो याद नहीं रहता?? मतलब क्या है?? हिन्दू मरता रहे?? 🤔🤔🤔🤔 बाप का राज है??

रवि मिश्र *स्थितप्रज्ञ *🇮🇳's profile picture
रवि मिश्र *स्थितप्रज्ञ *🇮🇳2 years ago

Ham Watan ke liye jaan bhi haazir hai Miyaan. Gaddaron Atankyon Bangladeshion Rohingya ke liye Bull dozer aur Shashan jaroori hai... Kyu nafrat ki basti basatey ho? Sarkaari sadak samast samaaj ke liye hai Yeh rastey kisi ke baap ki jaagir nahi.

🇺🇸 𝑰 𝑨𝒎 𝑲𝒆𝒔𝒂𝒓𝒊𝒚𝒂 🇮🇳's profile picture
🇺🇸 𝑰 𝑨𝒎 𝑲𝒆𝒔𝒂𝒓𝒊𝒚𝒂 🇮🇳2 years ago

जब गाँव में नहीं था गुदा तो तलवार डंडे लेकर क्यों कूदा 😂😆

🇮🇳Bongosaurus indica🇺🇸's profile picture
🇮🇳Bongosaurus indica🇺🇸2 years ago

Zameen uska walid ka tha, ya ammi maike se le kar aayi thi? Cleanse #MiraRoad of every single jihadi encroachment .

Agni Vijay's profile picture
Agni Vijay2 years ago

हम डरते है एक चपत लगाने में तुम्हें ख़ौफ़ नहीं पत्थर चलाने में

Subhash Sharma's profile picture
Subhash Sharma2 years ago

घर व्यक्ति से ज्यादा मूल्यवान नहीं है तुमने महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों पर हमला किया उसके बदले में घर तोड़ना बहुत छोटी बात है,

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“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में। तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ मिटाने में” 50 साल पहले तमिलनाडु से हज़ारों किलोमीटर दूर दिल्ली आकर इन लोगों ने अपना छोटा सा रोज़गार शुरू किया। किसी ने मेहनत मज़दूरी किया किसी ने ठेला लगाया पूरी ज़िंदगी खून पसीना बहाकर अपना छोटा सा घर बनाया। BJP ने बेरहमी के साथ इनके घरों पर बुलडोज़र चला दिया। मोदी जी ने वादा किया था “जहाँ-झुग्गी, वहाँ-मकान” हर वादे की तरह ये वादा भी झूठा निकला। ग़रीब के लिए विनाशक बन गई है BJP AAP सड़क से संसद तक इनकी आवाज़ बुलंद करेगी। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj Sanjeev Jha प्रवीण देशमुख Akhilesh Pati Tripathi Sarika Chaudhary के साथ मद्रासी कैम्प में पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की।

Sanjay Singh AAP

24,819 views • 1 year ago

एक लड़का और एक लड़की दोनों जंगल में आपस में प्रेम की बातें कर रहे होते हैं,तभी वहां कुछ लोग पहुंच जाते हैं और अपने फोन के कैमरे से वीडियो बनाने लगते हैं। यह सब वीडियो बनाने वाले लोग लड़की से पूछते हैं तुम यहां क्या कर रही हो, बता दो नहीं तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा। दोनों लड़का और लड़की कहते हैं,हम यहां कुछ भी करें तुम लोग कौन होते हो, हम लोगों को परेशान करने वाले ! इसीलिए कहा गया है जंगल में जब भी मिलने जाओ तो सावधान रहो, वरना आपके साथ कुछ भी हो सकता है क्योंकि आजकल बहुत सारे लोग जंगल में कैमरा लगाए बैठे रहते हैं। लेकिन इस घटना पर कुछ लोग कह रहे हैं ऐसे किसी को परेशान नहीं करना चाहिए, हर किसी को आजादी है अपनी मर्जी अनुसार,चाहे जो करें !

Pranjal

80,420 views • 1 month ago

बशीर बद्र साहब की ये पंक्तियाँ मानो आज की पीड़ा को शब्द दे रही हों— “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।” एक किसान का बेटा, जिसने 120 में से 84 प्रश्न सही किए, इस भरोसे के साथ आगे बढ़ा कि चतुर्थ श्रेणी भर्ती में उसका चयन तय है। उसी उम्मीद के सहारे उसने भविष्य के निर्णय लिए। यहाँ तक कि आर्थिक मजबूरी में बी.एड. की पढ़ाई छोड़ दी, क्योंकि फीस भरने के बाद कही डिग्री बीच में न छोड़नी पड़ जाएं। लेकिन जब मेहनत का फल संदेह और अनिश्चितता में बदल गया, तो सिर्फ एक परीक्षा परिणाम नहीं डगमगाया उस बच्चे का सपना, उसका आत्मविश्वास और उसके परिवार की उम्मीदें भी टूटने लगीं। आज ऐसे न जाने कितने छात्र हैं, जो अपनी मेहनत पर नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल उठाने को मजबूर हो गए हैं। उम्मीदें धीरे-धीरे हाथ से फिसलती जा रही हैं और विश्वास चुपचाप टूट रहा है। सरकारों का दायित्व केवल परीक्षाएँ आयोजित करना भर नहीं है, बल्कि उन परीक्षाओं की पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी है। इन युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जो भी प्रयास आवश्यक हों वे हर हाल में किए जाने चाहिए ताकि मेहनत करने वाला छात्र यह महसूस कर सके कि उसका भविष्य किसी अव्यवस्था की भेंट नहीं चढ़ेगा।

Dinesh Bohra

21,210 views • 7 months ago