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लड़का कितना है सख्त क्यों ना हो ऐसी सिचुएशन में आ कर पिघल ही जाता हैं..

14,342 просмотров • 7 месяцев назад •via X (Twitter)

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आजकल अफीम में तरह-तरह के केमिकल मिक्स होने लगे हैं,जो व्यक्ति की मानसिक शक्ति को क्षीण कर देते हैं। आदमी झूठ बोलने का आदी हो जाता हैं वो पूरी तरह से डाफ़ाचूक हो जाता हैं। उसे किसी तरह की सुध नहीं रहती हैं वो क्या बोल रहा हैं, क्या नहीं..?? दरअसल ये सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि एक खामोश ज़हर है जो इंसान के जिस्म ही नहीं उसकी अक़्ल, शऊर और शख्सियत को भी अंदर ही अंदर तबाह कर देता है। अफीम की लत इंसान को हक़ीक़त से दूर ले जाकर एक ऐसी दुनिया में धकेल देती है जहाँ ना सोच बचती है, ना समझ, ना ही कोई ज़िम्मेदारी का एहसास। हनुमान बेनीवाल भी अफीम की बुरी लत से नशेड़ी बन कर गुज़र रहे हैं.. तेजाजी महाराज उनकी सुध लें 🙏 HANUMAN BENIWAL

𝐒𝐀𝐓𝐈𝐒𝐇_𝐒𝐈𝐇𝐀𝐀𝐆_

16,549 просмотров • 5 месяцев назад

कहाँ गया वो दौर जब हिन्दी फिल्में अच्छी बना करती थीं? अनन्या पांडे का भरतनाट्यम की मिमिक्री करता वीडियो देखा। यह बॉलीवुड वालों ने भारतीय दर्शकों को समझ क्या रखा है?भारतीय नृत्य कलाओं से छेड़छाड़ क्यों? हर कला में एक शिल्प होता है, एक पवित्रता होती है। क्या दर्शक भी इन्हीं की तरह मूर्ख हैं? वैसे ही अब फिल्मों में डांस कोरियोग्राफ़ी की ऐसी की तैसी कर दी गई है। आता-जाता कुछ नहीं, सभी बस हाथ आजमा रहे हैं। भारतीय नृत्य कला कोई भी हो, यदि उसे कर रहे हैं तो भाव से आएँ, कुछ सीख कर आएँ। भरतनाट्यम सिर्फ़ उसकी वेशभूषा धारण करना नहीं है। जिस प्रकार अनन्या पांडे मटक रही हैं उसे देखकर घिन आ रही है।कितना भद्दा है सब कुछ। लेकिन इसमें अनन्या पांडे से बड़ा दोष कोरियोग्राफ़र का है और उससे बड़ा फिल्म निर्देशक का। जिन्हें इस में सब कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा। फिर शिकायत करते हैं कि आजकल फिल्में हिट नहीं हो रहीं। कोई देखता नहीं।

Vatsala Singh

46,434 просмотров • 4 месяцев назад