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'वे गोली खाते हैं मगर प्रमोशन नहीं मिलता...' CAPF Assistant Commandant अधिकारियों को 10- 15 साल तक प्रमोशन नहीं मिलता. सपा के राज्यसभा प्रो. राम गोपाल यादव इसी विषय से जुड़ा मुद्दा सदन में उठाते हुए क्या कहा, सुनिए...

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नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी और उनके परिवार से मुलाकात कर उनके संघर्ष को सुना ▪️अजय जी ने 15 साल तक देश की सेवा और सुरक्षा की, लेकिन आज उनकी तरह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कई अधिकारी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं ▪️CAPF में ऊंचे पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित होने के कारण फ़ोर्स के अधिकारियों को वहां तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं ▪️समय पर प्रमोशन ना मिलने पर अधिकारियों को उचित वेतन वृद्धि और उससे जुड़ी सुविधांए भी नहीं मिलती ▪️सुप्रीम कोर्ट द्वारा मई, 2025 में इस व्यवस्था को सुधारने के आदेश के बाद भी मोदी सरकार इसी व्यवस्था को स्थायी करने के लिए कानून बनाने की तैयारी में है 👉👉क्या देश के वीर सपूत सम्मान और न्याय के हकदार नहीं हैं?

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अजय माकन ने राज्यसभा में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक, 2026' का कड़ा विरोध करते हुए इसे जवानों के अधिकारों पर हमला बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: जो जवान देश की रक्षा करते हैं, ये सरकार उनके भविष्य और पदोन्नति का गला घोंटना चाहती है। जब सुप्रीम कोर्ट ने बार बार यह कह दिया कि पैरामिलिट्री फोर्स के साथ अन्याय हो रहा है, तो सरकार कानून बनाकर उनका प्रमोशन क्यों रोक रही है? पदोन्नति में देरी और भेदभाव (Career Stagnation) पदोन्नति का संकट: CAPF अधिकारियों को एक पदोन्नति के लिए 15 से 30 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, CISF में सीनियर कमांडेंट बनने में 15 साल लगते हैं, जबकि IPS अधिकारी यही स्तर केवल 7 साल में प्राप्त कर लेते हैं। CRPF एवं BSF में तो और बुरा हाल है। CRPF में पहली प्रमोशन 18 वर्षों में और BSF में पहली प्रमोशन 20 वर्षों में होती है! इस बिल में आने वाले CAPF में vacancy होने के बावजूद, entitlement होने के बावजूद, न तो प्रमोशन मिलता है और न ही NFFU (Non-Functional Financial Upgradation) या अन्य वित्तीय लाभ मिलता है! देश की आंतरिक और बाहरी ताकतों से रक्षा करने वाले इन जवानों के साथ यह कैसा न्याय है? अजय मलिक का उदाहरण: झारखंड में कर्तव्य निभाते हुए अपना पैर गंवाने वाले असिस्टेंट कमांडेंट को 15 साल बाद भी पदोन्नति न मिलना तंत्र की विफलता को दर्शाता है। जवानों की बदहाल स्थिति और आंकड़े (Grim Statistics 2021-25) शहादत: पिछले 5 वर्षों में 529 जवानों ने देश के लिए बलिदान दिया। स्थापना से अभी तक कुल 150 से ज्यादा अधिकारियों ने अपनी शहादत दी है! मानसिक तनाव: पिछले पाँच वर्षों की इसी अवधि में 749 जवानों ने आत्महत्या की और 46,000 जवानों ने समय से पहले सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। रिक्तियां: लगभग 1 लाख पद खाली पड़े हैं, जिससे मौजूदा जवानों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। न्यायिक और संवैधानिक आपत्तियां: अदालती आदेशों की अवहेलना: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने 2015 से 2026 के बीच कुल 6 बार इन अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। माकन के अनुसार, यह विधेयक संविधान के Article 14 और 16 का उल्लंघन कर न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करता है। क्लॉज 3 की आलोचना: विधेयक में प्रयुक्त 'Not-withstanding' क्लॉज का उद्देश्य पुराने सभी न्यायोचित फैसलों को शून्य करना है, जिसे उन्होंने "वैधानिक छल" करार दिया। प्रक्रियात्मक खामियां: स्थायी समिति (Standing Committee): उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के पास नहीं भेजा गया, जहाँ जवानों और अधिकारियों की समस्याओं को सीधे सुना जा सकता था। वित्तीय विसंगतियां: सरकार के इस दावे को उन्होंने गलत बताया कि इस विधेयक से कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, जबकि क्लॉज 5 में वित्तीय लाभों का स्पष्ट उल्लेख है। OGAS, NFFU के benefits जब मिलेंगे तो कैसे अतिरिक्त वित्त भार नहीं पड़ेगा? निष्कर्ष: अजय माकन ने कहा कि यह मुद्दा केवल 13,000 अधिकारियों का नहीं, बल्कि उनसे जुड़े 10 लाख जवानों का है। 1 प्रमोशन होती है तो chain में 11 और कर्मी नीचे तक लाभान्वित होते हैं। अजय माकन नें सरकार से आग्रह किया कि नौकरशाही के हितों के बजाय सरहद की रक्षा करने वाले जवानों के मनोबल को प्राथमिकता दी जाए और इस विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए। 🇮🇳CRPF🇮🇳 CISF ITBP SK Chakraborty MBT UPSC Maj Digvijay Singh Rawat, Kirti Chakra (Retd) PRO, Hyderabad, Ministry of Defence CAPF Soldiers APS - CISF Maneesh Aggarwal GC CRPF PUNE HWWA - Himveer Wives Welfare Association Pooja Rakesh vijayakumar kadam(V.S.KADAM)

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