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वो शख़्स आसमान था… 🥰
10 Comments

क्या बात है, आलोक सर! आपकी कविता में भावनाओं की गहराई और शब्दों की मधुरता अद्भुत है। हर पंक्ति में आपने प्रेम, आदर और विश्वास की भावनाओं को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा है। ऐसा लगता है जैसे ये कविता दिल से निकली है और सीधे दिल तक पहुंचती है।आपकी लेखनी को सलाम! पंकज उदास जी को नमन🙏

वाह क्या ख़ूब कहा

Shukriya Bhai 🥰

जी आलोक, वाकई में वो शख़्स आसमान था! बहुत ही हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ आपने लिखी हैं और स्वर देकर तो यह प्रस्तुति बिलकुल आसमानी लग रही है!

Shukriya Sir

वाकई... बेहद भाव पूर्ण नमन पंकज उदास सर 🙏🙏🙏

कितनी सुंदर नज़्म हुई भैया...पंकज जी का स्मृति-उत्सव कैसी बुलंदी पर चला गया इस नज़्म से 🙏

सब जगह शेयर कर दिया है.. सबको सुनना चाहिए 👍

साए में उसकी याद के एक नीेंद सोए थे नम हो गई इक दोपहर आहिस्ता आहिस्ता

भैय्या बहुत लाज़वाब लिखा है आपने 🙏🏼❤️
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बहती हवा सा था वो, गुजरात से आया था वो कहां गया उसे ढूंढो...🤭
❤️ INDIAN ❤️
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