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वैदिक काल में भी बीफ खाया जाता है: राम पुनियानी जी ने कहा
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ये एक महामक्कार वामपंथी इतिहासकार है मुल्लों के बीच में बड़ा लोकप्रिय है। ऐसे ही एक इतिहासकार डॉ श्रीमाली ने जनता की अदालत कार्यक्रम में बोला कि वेदों में लिखा है कि गौमांस खाया जाता था।एक व्यक्ति ने चारों वेद सामने रख कर कहा कि दिखाइए कहां लिखा है,वो नहीं दिखा पाये, चुप हो गये

@dinesh_chauhan दिनेशजी, अगर कोई सांप दूध को छू दे तो वो दूध भी जहर होजाता है.इसी तरह अप्रमाणिक व्यक्ति शास्त्र के अर्थ का अनर्थ करता है.बीफ मामले पर grok ने भी गलती मानी @SanjeevSanskrit @RadharamnDas @RituRathaur @madhukishwar @HansrajMeena @ocjain4

इस बुड्ढा का एक पाव कब्र में है और सनातन धर्म पर अंगुली उठा रहा है अरे मूढ कोई भी युग हो हर युग में राक्षसी प्रवृति रहे है और वो राक्षस गौ मांस तो क्या मानव मांस भी खाते थे ।

स्वामी विवेकानंद ने बताया: इसी भारत में एक समय ऐसा था जब बिना गोमांस खाए कोई ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं रह सकता था. अतिथियों के लिए सबसे अच्छा बैल मारा जाता था। बाद में, खेती के लिए पशुओं को बचाने के लिए इसे रोक दिया गया। Source : संपूर्ण कार्य, खंड 3 (मदुरा में दिया गया भाषण)

@tanmoyofc The one one intellectual who can spead lies with a lot of confidence.

Ye Randdi ki olade hai

Ram Puniyani ko psychiatric treatment ki jaroorat hai

.BAAT KAHO TO POORA POORA AADHAA ADHURAA SHARMAATE HUE NAHIN YADI KEHTE KI PRAACHEEN KAAL ME BHARAT K LOG BEEF BINA BHOJAN HI NAHIN KARTE THE TO KUCH AUR BAAT HOTI

वैदिक काल में क्या होता था ये तो वैदिक काल का कोई महामानव आज भी जीवित होता तो बताता।लेकिन हिंदू समाज और धर्मगुरुओं विद्वानों ने बीफ का मांस का भोजन तक निषेध बताया है।हम वेद पद नहीं सकते।पढ़ लें तो समझ नहीं सकते।इसलिए कोई वैदिक काल पर ज्ञान न दे तो ही अच्छा।

Fake news failane bala arrest hona chahiye
