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Ana Sayfaya Dön

विनोद कुमार शुक्ल ।

11,898 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

10 Yorum

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Super Strock1 yıl önce

This is really very beautiful story 👍😁✔️ !! हताशा हो कर एक व्यक्ति बैठ गया था.. हम उस व्यक्ति को नहीं जानते थे. हम दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे. हम हताशा को जानते थे. हमने हाथ बढ़ाया. हम हाथ बढाने को जानते थे. और वो हमारे साथ चलने लगा.. हम दो साथ चलने को जानते थे...

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Mohd Qasim Aurangzeb1 yıl önce

❤️❤️

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Solar Heavy1 yıl önce

take the journey

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Sam1 yıl önce

Aajkal aise koi haath nahi badhata, aur dhakke maar dete hain 😌

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Vishal Pandey1 yıl önce

Same feelings 😆

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Faizan Ali1 yıl önce

👍👍

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Sunil Joon1 yıl önce

🤔

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Ashok the great1 yıl önce

Sayema ji namaste

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Simon1 yıl önce

Hi sayema cutie😘

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Waseem Ahmad1 yıl önce

हिन्दुस्तान की मिट्टी का इतिहास है, ये ज़्यादा वक्त तक ज़ुल्म सहन नहीं करती, इसलिए मायूस नहीं होना चाहिए हमें । कल के @_YogendraYadav जी के रोज़े की इफ़्तार पार्टी से यही उम्मीद लेकर आया हूँ । आप सभी का शुक्रिया! @AMajidNizami @irfhabib

Benzer Videolar

आज हिंदी की दुनिया में आहिस्ता से जो चुप्पी उतर आयी है उसे शब्द देने के लिए हमें विनोद कुमार शुक्ल की ज़रूरत पड़ेगी। उनकी कविता और उपन्यासों में न कोई सनसनी थी, न नारा, न क्रांति। साधारण जीवन की तस्वीर रचती हुई वह हमें चुपचाप अपने भीतर झाँकने का साहस देती थी— “हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था… मैं उसे नहीं जानता था, हताशा को जानता था…” अशोक वाजपेयी के शब्दों में, विनोद कुमार शुक्ल की कविता “घर वापसी की कविता” थी— जो हमें अपने अधूरे जीवन को भरपूर जीने और अपनी मनुष्यता को परखने का अवसर देती है। अगर वे अंग्रेज़ी में लिखते, या फिर हिंदी का समाज अपने इस हीरे का मान करता, तो शायद दुनिया उन्हें नोबेल पुरस्कार से पहचानती। लेकिन वे शायद ऐसे नायक बनना नहीं चाहते थे। उनकी कविता अनायक की महिमा को उद्घाटित करती है। विनम्र श्रद्धांजलि। #VinodKumarShukla (यह एक पूर्व-रिकॉर्डेड वीडियो है — स्मृतियों के लिए)

Yogendra Yadav

11,923 görüntüleme • 8 ay önce