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वह बचपन से ही सब कुछ बनना चाहता था.

78,024 views • 2 years ago •via X (Twitter)

10 Comments

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MANJUL2 years ago

😂

Taritkumarbiswas's profile picture
Taritkumarbiswas2 years ago

बहुत खूब! क्या क्या नाम है - झुठलर, मैपोलियन,खर्चील, झंडेला.... मज़ा आ गया।अब नाम तो बताना है नहीं कि यह अपना वाला 'मोती' है!

Dr Sandeep Yadav's profile picture
Dr Sandeep Yadav2 years ago

दंगेज खान!

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Subodh Vishwakarma2 years ago

फ़ोटो खिंचवा खिंचवाकर फटीचर बन गया ! भैया चलेगा यह ?😄

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Jagat Pasi2 years ago

शानदार!!👌☝️🔥🙏 झुठलर,खर्चील,चेहरू........ठगतसिंह!!😜🤣🤣

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D2 years ago

CHHA GAYE GURUUUU! 🤣🤣 ठोको ताली !

Rational कुमार's profile picture
Rational कुमार2 years ago

प्रणाम वालेकुम ध्यानी जी, एक त्रुटि हो गई। चर्चिल महान नेता नहीं था ।

Rajeev Dhyani•राजीव•راجیو•ਰਾਜੀਵ•রাজীব•రాజీవ్'s profile picture
Rajeev Dhyani•राजीव•راجیو•ਰਾਜੀਵ•রাজীব•రాజీవ్2 years ago

महान तो हिटलर भी नहीं था.

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Anis Ahmed2 years ago

Jabardast

Ashfaque Ahmed 🇮🇳's profile picture
Ashfaque Ahmed 🇮🇳2 years ago

Live: देश का नाक कटा रहा था पनौती ! Anjana Om kashyap ने धर के कान के नीचे भयंकर बजा दिया ! Modi in Moscow #AnjanaOmKashyap #Moscow #Modi #RahulGandhi #Nehru

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शिक्षा शेरनी का दूध है, और इस बालिका ने उसे पूरा पिया है। उसकी हर बात पर ध्यान देना चाहिए। भाई, बाहर मत निकलो। बाहर निकलोगे तो तुम्हारा अस्तित्व ही आपत्तिजनक हो जाएगा। अमेज़न से पत्थर मँगवाकर उसकी तस्वीर दिखानी पड़ेगी कि मेरे घर के बाहर कौन घूम रहा है। जब किसी के ऊपर 40 दिन बाद 80-80 धाराएँ लगाई जा सकती हैं, तो फिर विश्वास कैसे किया जाए? यही तो बात है। चालीस दिन बाद यह सब कैसे हुआ? किसी की मति मारी गई थी। संजय भाई सोच ही नहीं पा रहे थे कि उनके साथ कुछ हुआ था। उन्हें कुछ याद ही नहीं आ रहा था। आपने गंगाधर विद्याधर ओंकारनाथ शास्त्री, यानी शक्तिमान को तो देखा होगा; जब गीता विश्वास को भुला देता था और वह किसी तरह शक्तिमान को पकड़ लेता था, तब उसके माथे से प्लाज़्मा निकलता था और वह और भी बहुत कुछ भूल जाता था। संजय भाई के साथ भी कुछ ऐसा ही किया गया। वह सब भूल गए। फिर 40 दिन बाद जब वह स्पेल टूटा, तो उन्हें याद आया; हाँ, कुछ जातिसूचक कहा गया था और रात में मारने की कोशिश भी हुई थी। यह सब चल रहा था, तब जाकर उन्हें पूरी बात याद आई। अब वह बिल्कुल सही बोल रहे हैं। ब्राह्मण बाहर क्यों निकलेंगे, भाई? घर में रहो, पैक रहो। अगर लोग बाहर आकर कुछ उलटा-सीधा ही करेंगे, तो उससे बेहतर है कि घर में ही रहें।

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