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शंकर तेरी जटा से बहती है गंगा धारा...
28,072 просмотров • 7 месяцев назад •via X (Twitter)
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तेरे गुलाबी लबों से निकले जो मीठे फसाने हैं, दिल के वीराने में अब बस तेरे ही तराने हैं। तेरी हर बात में जैसे इक नशा उतरता है, मैं भी अब तो इश्क़ में तुझपे ही दीवानी हूँ। तेरी हँसी की खनक ने छू लिया है रूह को, अब लफ़्ज़-लफ़्ज़ में मैं खुद को भी भुला बैठी हूँ। तेरे गुलाबी लबों से जो ख़ामोशी बहती है, वो भी कह जाती है वो बात जो लफ्ज़ न कह पाए। मैं जो लिखती रही शेर तुझपे रात भर, वो ग़ज़लें अब मेरी आँखों से मुस्कुराने लगी हैं। ~ आरू ❣️
Pari Shekhawat
67,564 просмотров • 1 год назад
