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शंकराचार्य समझतें हैं.. सरकार से उलझना खेल है. ऐसे सनातनियों का ठिकाना जेल है ?
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शंकराचार्य पद सनातन परंपरा में अत्यंत पूजनीय है। यदि कोई इस पद की गरिमा से हटकर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में उलझता दिखे, तो समाज को प्रश्न पूछने और असहमति जताने का अधिकार है। पद की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है, और आचरण उसी के अनुरूप होना चाहिए।

चमची भूल गई ,हम नहीं भूले है

शंकराचार्य पद सनातन परम्परा में बेहद पूजनीय है लेकिन अविकुतेश्वरानंद जैसे पाखंडी जो अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षा को पूरा करने के चक्कर मे हर जगह लतियाये गए हैं। ऐसे लोगों का सम्मान नहीं बहिष्कार होना चाहिए

आपका एक-एक शब्द तानाशाही के गाल पर करारा तमाचा है प्रज्ञा जी। ...आज उत्तर प्रदेश समेत देश को बचाने के लिए कुछ ऐसी ही पत्रकारिता की सख्त जरूरत।

शंकराचार्य का पद भगवान शंकर के समान है और सनातन धर्म में पूजनीय है लेकिन इस पद पर कोई व्यक्ति बैठकर राजनीतिक प्रवक्ता की भांति राजनीति करें यह कहां तक सही है..? रही बात आरोप की तो पुलिस जांच कर रही है जो होगा दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा

प्रज्ञा यादव ने कभी ये नहीं बताया कि इनके जातीय भसुर अखिलेश यादव के सरकार ने उसी शंकराचार्य के पिछवाड़े को लट्ठ मार मार कर तोड़ दिया था। और किसी ने एक कथन कहा है नीचे पढ़ो

सरकार को अब चापलूस और yes man साधु चाहिए जो विरोधी होगा उसको ये लोग दबाने कुचलने का प्रयास करते हैं। इसीलिए तो बेचारे सब संत डरे हुए हैं। गुरुजी की निर्भीकता देखकर फिर से भारत का साधु समाज उठ खड़ा होगा अपनी गरिमा पहचानेगा। एक दिन ये जरूर होगा। @grok कर अध्ययन विस्तार से बताए🙏🇮🇳

अदालत मौन नहीं होता है प्रज्ञा बहन ! इस बात की जानकारी नहीं है तो तुम्हारे बहुत सारे वामपंथी कानूनविद हैँ जो तुम्हें सही सलाह देंगे ! अदालत पर टिप्पणी करने से पहले कुछ रिसर्च कर लीजिये !आप की परेशानी समझ सकता हूँ !कांग्रेस ने ज़ब एक बयोवृद्ध विशुद्ध शंकराचार्य क़ो गिरफ्तार किया था तो किसी ने तात्कालीन हिन्दू विरोधी सरकार से सवाल किया ?

का उस पार्टी के तलवे चाट रही इसके मालिक बोलते थे की रेप करना तो बच्चों से गलती हो जाति है

इसी सरकार मे रैपिस्ट वैल पर है

शंकराचार्य का पद आज से नहीं अनादि काल से सम्मान कर रहा है सनातन धर्म के रक्षक के रूप में रहा है और जब कोई इस पद के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा,और सनातन धर्म का अपमान साधु संतों का अपमान किसी पार्टी के प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हो तो वह सनातन मैं शंकराचार्य नहीं हुआ उस रूप में ढोंगी हैl शंकराचार्य है जो मंदिर बनने पर खुशियां दिखाएं साधु संतों का सम्मान करें हिंदू धर्म के लिए रक्षक का कार्य करें माघ मेले का समर्थन करें ना कि वहां पर राजनीति करें गंगा मां का सम्मान करें उनको अपमानित करने का कार्य न करें

क्या बात है सिस्टर बहुत कहा है पर गोबर खाने वाले मूत पीने वाले कहाँ समझते hain

यह देखो तथाकथित यूट्यूबर पत्रकार कैसे एक बलात्कारी आरोपी का पक्ष ले रही है !! थू ......है ऐसी दो कौड़ी की पत्रकारिता पर !!

हिंदू ही हिन्दू के दुश्मन बन गये ... ये तो होना ही था .

जिओ शेर

शंकराचार्य जैसे पूजनीय व्यक्तित्व पर इस प्रकार की टिप्पणी समाज में अनावश्यक तनाव बढ़ा सकती है सरकार और धार्मिक नेतृत्व के बीच मतभेद हों तो उनका समाधान तर्क और कानून से होना चाहिए न कि कठोर नारों से

शंकराचार्य का पद मर्यादा और आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक है जिसे राजनीति से ऊपर रहकर धर्म रक्षा का दायित्व निभाना चाहिए। सनातन परंपरा का मान वही बढ़ाता है जो संतों का सम्मान करे आस्था का आदर करे और पवित्र स्थलों को विवाद का मंच न बनाए।

किसी ने कहा था जंगल न होते तो मोर कहां छिपते भगवा न होता तो चोर कहाँ छिपते

कहावत है विधवा विलाप देख कर अच्छा लगा ।।

@AnshumanYadavA4 चलो देखते हैं

@SecularSharad

ALLAH TUMHARI UMAR LAMBI KARAY BAHEN. TUMKO TUMHARI FAMILY KO HAR QAIR SAY NAWAZAY. TUMHARAY PATI KI UMR LAMBI KARAY AOR ONKA AAPKA PYAR AADAR EK DOOSRAY KAY LIYAY DUNYA MAY MISAALI BANA DAY. DIL SAY DUA HI CHOTI BAHEN PRAGYA. 🌹🕌🌹الله رب العزت هر نعمت عطا كرى🌹🛕 🌹

ये कौन आ गई, सब अपने आप को चमकाने के लिए आती हैं! सवरण अब धीरे-धीरे जाग रहा है पूरी तरह जागने दो तब सनातन को गाली देकर दिखाना फिर चाहे फांसी क्यों न हो जाए!!

चुप रहना चाहिए आपको आपको और आपके चेनल को हर तीसरे दिन भाजपा सरकार गिराने का जो काम मिला है वो ही करें हिंदू धर्म आपका सब्जेक्ट नहीं है

प्रज्ञा जी, "सच" बोलना भारत में अघोषित रूप से गैरकानूनी है. बाकी सब तो ठीकै.... है.

लोकतंत्र में सरकार से प्रश्न करना अधिकार है और सरकार का उत्तर देना दायित्व असहमति को जेल से जोड़ना न तो सनातन परंपरा की गरिमा के अनुकूल है न संवैधानिक मूल्यों के शालीन संवाद ही समाज को संतुलित रखते हैं

Uma Shankar upadhyay ko kathor se kathor dand milna chahiye

🙏

पग्गल औरत

👏👏👏

लोकतांत्रिक समाज में आस्था और सार्वजनिक जीवन के बीच संतुलन आवश्यक है। पद की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है, और आचरण भी उसी के अनुरूप होना चाहिए ताकि समाज में सम्मान, शांति और परस्पर विश्वास बना रहे।

अपने बेटे को भेज दो महाराज के गुरुकुल में दीक्षा लेने.... दिखा दो दुनिया को की महाराज पाक साफ है

माफिया के कुत्ते से हाथ मिलाने वाले राजनीति नहीं कुत्तागिरी करते थे
