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शिक्षा विभाग के नए फरमान पर मचा सियासी घमासान।
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#बिहार_सरकार_शर्म_करो

#बिहार_सरकार_शर्म_करो

समस्या ये है कि हम जिस संघ में है वो संघ ही कमजोर है। ये सिर्फ़ सरकार कि बात को आगे बढ़ाने और उसकी हाँ में हाँ मिलाने के लिए है । शिक्षकों की जाँच चपरासी से करवा दिया। फिर भी इन्हें समझ नहीं आया। बिहार में छठ की, 2 दिन की छुट्टी है आप अंदाज़ा लगा सकते है की क्या चल रहा होगा ।

अंधेर नगरी चौपट राजा टके सेर भाजा टके सेर खाजा। पलटू चच्चा को अब चुनाव लड़ना नही है और भतीजे को सत्ता देना नही है।

अब तो नियोजित शिक्षक के साथ सरकार अन्याय कर रही है, ये बहुत ही गलत निर्देश है, इस फैसले को तुरंत वापस ले सरकार

यह तो शिक्षकों के साथ शोषण हुआ उनकी छुट्टियां रद्द करके मानसिक पीड़ा से गुजरेंगे वह क्या भला बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाएंगे केके पाठक जी इस पर एक बार फिर से विचार करिए हम लोग भी शिक्षा के प्रति सजग है और अच्छे से विद्यालय में पठन-पाठन करते हैं कृपया छुट्टियां रद्द न करें

अवकाश घोषित रद्द बहुत अच्छा किया k k पाठक आज बिहार के शिक्षा व्यवस्था इतनी खराब है जिसका जिम्मेदार स्कूल के मास्टर है इनको सबसे पहले अपने बच्चो को सरकारी स्कूल में पढ़ाने चाहिए इनके लिए निजी स्कूल के दरवाजे बंद होना चाहिए ये जिम्मेदारी के साथ बच्चो को नही पढ़ाते हैं एक सर्वे कर

बिहार में Hitlarsahi

जो घोषित छुट्टीयों को रद्द करना ठीक नहीं, इस से शिक्षकों के मन में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पुनर्विचार की आवश्यकता है।

कहने को कुछ भी कहिए। मगर पाठक और गटबंधन का जुगलबंदी का मुख्य उद्देश्य सिर्फ नियोजित का शोषण करना रह गया है।
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