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शादी से पहले का आख़िरी दिन, बेटी अपने पिता से लिपटकर रोती रहती है। 😔 दोनों खामोश हैं, लेकिन उस एक गले लगाने में सालों का प्यार, बचपन की यादें और बेटी को विदा करने का गहरा दर्द छुपा है। बिना कुछ कहे ही पिता का प्यार और बेटी...

563,251 views • 9 months ago •via X (Twitter)

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कैमरे में कैद हुआ दिल को छू लेने वाला पल, जिसमें एक पिता के बिना स्वार्थ के प्यार की गहराई ने इंटरनेट पर लोगों को इमोशनल कर दिया है। जब एक पिता अपनी बेटी को ट्रेन तक छोड़ने जाते हैं, तो उनका प्यार और चिंता शब्दों में नहीं, बल्कि उन तैयारियों में झलकती है. भले ही बेटी कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, पिता को हमेशा लगता है कि रास्ते में उसे भूख लगेगी। वह घर का बना नाश्ता, फल या रास्ते के लिए उसकी पसंद की कोई चीज़ पैक करना कभी नहीं भूलते। पैसे देना: "बेटा, ये अपने पास रख लो, काम आएंगे।" बेटी के मना करने के बावजूद, ज़बरदस्ती हाथ में या बैग के कोने में पैसे रख देना पिता का अपना तरीका है यह कहने का कि "मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।"

Kishan kumar

128,213 views • 7 months ago

काहिरा (Cairo) से वायरल वीडियो ने झकझोरा दिल—ट्रैक पर गिरी बेटी को पिता ने बना लिया ढाल। भारत में होता तलाक का मुकदमा, तो शायद मिलती नहीं ये बच्ची उसे… #काहिरा:- मिस्र की राजधानी काहिरा से एक बेहद भावुक कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पिता अपनी मासूम बेटी को ट्रेन की पटरी पर गिरने के बाद अपने शरीर से ढाल बनाकर बचा लेता है। यह दृश्य न केवल एक पिता के प्रेम की पराकाष्ठा दिखाता है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक प्रश्न भी खड़ा करता है—क्या हर पिता को अपने बच्चे के लिए यही संघर्ष करना पड़ता है? सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दिखता है कि ट्रेन के ट्रैक पर गिरी बच्ची को बचाने के लिए पिता खुद पटरी पर लेट गया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसे ढक लिया। यह क्षण भावुक कर देने वाला था, लेकिन साथ ही यह एक मौन सवाल भी उछालता है—क्या भारत में ऐसा पिता अपने ही बच्चे की कस्टडी का हकदार होता? अगर यही घटना भारत में किसी तलाकशुदा या मुकदमा लड़ रहे पिता के साथ होती, तो शायद कानूनी व्यवस्था उसे पिता नहीं, केवल पक्षकार मानती। भारत में आज भी बाल संरक्षण से जुड़ा कानून अक्सर लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रसित नजर आता है। ज्यादातर मामलों में संतान की कस्टडी स्वतः मां को सौंप दी जाती है, भले ही पिता उस बच्चे के लिए अपनी जान ही क्यों न दे दे। यह वीडियो न केवल एक पिता के प्रेम का प्रतीक है, बल्कि भारतीय समाज और न्यायिक व्यवस्था को "जेंडर-न्यूट्रल" सोच अपनाने की एक मार्मिक याद दिलाता है। #Cairo #FatherLove #GenderNeutralLaws #ChildCustody #IndiaJustice

UttarPradesh.ORG News

508,112 views • 1 year ago

ये प्यार नहीं है – प्यार कभी ऐसा हो ही नहीं सकता। यह किसी खतरनाक अपराधी का स्वार्थ, पागलपन और उसकी हिंसक मानसिकता का प्रमाण है। बिहार के बक्सर में शादी के दौरान स्वार्थी प्रेमी दीनबंधु द्वारा दुल्हन आरती को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है। ऐसी वारदातें साफ बता देती हैं कि इसे प्यार कहना, प्यार का अपमान है। प्यार में सम्मान होता है, विश्वास होता है और दूसरे की खुशी की सच्ची कामना होती है – न कि स्वार्थ, अधिकार जताना, अपने तथाकथित प्रेम को कष्ट पहुँचाना या हिंसा का रास्ता चुनना। अगर कोई व्यक्ति किसी के “ना” को स्वीकार नहीं कर पाता और गुस्से या जुनून में जान लेने या नुकसान पहुँचाने पर उतर आता है, तो वह प्रेम नहीं बल्कि खतरनाक मानसिकता और घोर अपराध है। सच्चा प्यार कभी किसी की जिंदगी छीनने की कोशिश नहीं करता; वह तो सामने वाले की सुरक्षा और खुशी चाहता है, चाहे रास्ते अलग ही क्यों न हों।

NCIB Headquarters

18,568 views • 7 months ago